Thursday, October 14, 2010

लवगुरु. 68
बिजली- तुमने अभी बिजली को जाना नहीं है, मैं ऐसी नहीं हूँ, भरोससा करो, मैं तुमको किसी मुसीबत में नहीं डालूंगी . अगर किसीने देख भी लिया तो मैं कहूंगी कि मैंने जों कुछ भी किया है वह अपनी मर्जी से किया है
और क्या चाहिए तुमको ? क्या मर्द होकर इतना डरते हैं आप ? तब तो लानत है तुम्हारे ओने पर . मैंने तो सोचा था कि तुम अंदर -बाहर से स्ट्रोंग होंगे . मगर तुम भी न यार...
केशव - आप अपनी जगह ठीक हैं मेमसाब. आपने ये कहावत तो सूनी ही होगी कि औरत का खसम आदमी होता है और आदमी का खसम कर्ज होता है . जिस मर्द के सिर पर कर्ज का भार होता है , वह कभी भी अपने
मूड में नहीं रहता. न वह अच्छी तरह से सोच सकता है , न समझ सकता है . हर वक्त उस पर कर्ज का भूत सवार रहता है . मेरा भी यही हाल है. इसलिए हरदम डरा -सहमा रहता रहता हूँ .
केशव- हें , ये अब क्या नया करेक्टर ढूंढकर लाये हो? कितना कर्ज है तुम पर ?
केशव- ब्याज-व्याज मिलाकर यही कुछ होंगे , २२ -२५ तक . अगर ये रकम निकल जाए तो मेरी जान छूटे . मगर इतनी मंहगाई में कुछ बचता ही कहा है , कितना भी कोशिश करता हूँ मगर हो ही नहीं पाता .
बिजली- अच्छा-अच्छा ठीक है . ये पैसे सुबह मुझसे ले लेना. लेकिन रहो अपने होशोहवाश में ठीक है . तब तो डरे-सहमे नहीं रहोगे ?
केशव- क्या बात करती हैं मेमसाब ? तब तो मैं किसीसे भी नहीं डरूंगा . आप सुबह इतना काम करदें , मेमसाब एक बात पूछूं, आपके मुंह से कुछ ड्रिंक जैसी बदबू आ रही है , क्या बात है बताओ न ? आप भी ?
बिजली- नहीं, कभी-कभी . आज डिस्को पब गयी थी , वहीं एक सहेली जिद करने लगी , तो वोदका के दो पैग लगा लिए , उसीकी महक आ रही होगी , मगर तुम ये सब क्यों पूछ रहे हो ? क्या तुम दूध के धुले हुए हो ?
मैंने तुम्हें अंदर खूब पीते हुए देखा है, बहुत जम छलकाए हैं तुमने .
केशव- हां, लेकिन... वो तो कबकी उतरा गयी . अब तुम्हारे साथ भी जम छलकाने का मौक़ा मिले तो बात बने.
बिजली- तुम जानते हैं मैं स्टोर नहीं रखती, जिस तरह से मोम के पास से कंदों लेकर आये हो उसी तरह बोतल भी उन्हीसे लानी होगी , समझे ?
केशव- इस बार तो माफ कर दिया था , अब नहीं मानेंगी . नौकरी से ही निकाल बाहर करेंगी , मुझे डर लगता है उनके मिजाज से , अब राहने दो. कल से मैं खुद ही इंतजाम कर लिया करूँगा .
बिजली- अब तुमने बोतल का नाम ले ही दिया है, तो ;लेकर आओ. मुझे भी तलब होने लगी है. दो चा सिगरेट भी लेते आना. आप लोगों को तो औरतों को उल्लू बनना खूब आता है. जाकर कोई मीठा सा बहाना बना देना,
कहना कि तुम्हें उनकी बहुत याद रही है, या फिर तुम्हारी ज़रा सी आँख लगी तो सपने में देखा कि वे आपको बुला रही हैं, या फिर ऐसा ही कोई दूसरा बहाना गढ़ लेना ...
केशव- ठीक है, जैसी आपकी आज्ञा. हुक्म की तामील होगी. मैं जरूर जाउंगा. चाहे जों हो सो हो ..
केशाव अपने आपको दुरुस्त करने के बाद रानी के बेडरूम तक गया. दो बार हलके से दस्तक दी, तब भी कोई हलचल नहीं हुई तो उसने बेल बजादी . इस बार रानी उठी, दरवाजा खोला और आश्चर्य से बोली-
-तू ? क्या हुआ रे केशव नींद नहीं आ रही है क्या ? चल एक पैग मारले , और जाकर आराम से सोजा. तेरी भी आदत बिगड़ती जा रही हैं, ना खुद सोता है और न सोने ही देता है.
केशव- बहुत याद आ रही थी मालकिन , बस एक बार देखने चला आया. कमबख्त नींद आने का नाम ही नहीं लेती. आये भी तो कैसे ? आँखों में तो हमेशा तुम ही तुम समाई रहती हो . किसीने क्या खूब कहा है -
'जों नींद आती तो खाब आते , जों खाब आते तो तुम आते , ना नींद आई , ना खाब आये , ना खाब आये ना तुम आये '.. अच्छा है न.
रानी- अच्छा है , मगर एक ही शेर को कितनी बार सुनाओगे. कुछ नया सीखकर आओ, हमें सुनाओ , तो अलग बात है दाद तो तभी मिलगी. आब चलते -फिरते नजर आने के लिए क्या करना होगा ?
मैं जाता हूँ, आप भी सो जाओ , अरे हाँ, आप पैग लगाने की बात कर रही थीं न, तो ऐसा करो मुझे एक बोतल देदो. मैं आराम से अपने कमरे में ही पी लूँगा , यहाँ आपकी नींद खराब होगी. मैं एक बोतल लेलेता हूँ.
शुभरात्रि . स्वीट ड्रीम्स .
बिजली एक बार झरोखे से देख आयी थी, उसे लगा कि केशव साधारण नौकर नहीं बल्कि उस्तादों का उस्ताद है,. उसने ऐसी एक्टिंग की थी कि वह हैरान रह गयी. जब केशव ने उसके कमरे में प्रवेश किया तो वह
उससे लिपट गयी . उसके होठों पर एक चुम्बन जड़ते हुए बोली-
-तुम भी चालू चीज हो केशव, मेरा मतलब है कि तुम इस्त्ने सीधे भी नहीं हो जितना कि मैं सोचती थी, तुमने मोम को बहुत बढ़िया तरीके से उल्लू बनाया, कोई मंजा हुआ कलाकार ही ऐसी एक्टिंग कर सकता है .
केशव- तारीफ़ के लिए शुक्रिया, लेकिन यह भी जान लीजिए कि मैंने जों कुछ भी किया है वह आपके लिए किया है. आपकी खातिर ही मुझे झूठ बोलना पड़ा. असल में तारीफ़ तो उन भावनाओं की होनी चाहिए .
बिजली- उस सब काम के लिए तो पूरी उम्र पडी है. हर चीज का एक समय होता है , जैसे कि लोग जवानी में गुनाह करते हैं और बुढापे में पुण्य करते हैं. तो इस वक्त हमें गुनाह करना है. आओ. एक बार फिर से हम
पहले वाली स्थिति में आ जाएँ , मैं देखना चाहती हूँ कि बिना कपड़ों के तुम करीब से कैसे लगते हो. आह ... देखो न, मेरा बदन अकिसा टूट रहा है,हड्डी,पसली सब चटक रही हैं.
केशव-कुछ ही पलों के बाद तुम्हें जवानी का असली मजा चखाउंगा, उस वक्त सब कुछ ठीक हो जाएगा.

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