लवगुरु-७८
चम्पा- मगर माँ और पिताजी ? उनको पता चल गया तो ?
रमन- वे क्या कहेंगे ? उलटे सपोर्ट ही करेंगे. इसमें क्या बुराई है . जब तुम्हारे पतिदेव आ जाएँ , तब तुम उनके साथ मजा लेना, जब तक नहीं हैं. तब तक मैं सेवा कर दूंगा .
रानी- घरवालों की छोडिये, अगर उन्हें पता लग गया तो मुझे ज़िंदा गाढ़ देंगे . तब मैं क्या करूंगी ?
रमन- बेवजह परेशान होती हो, क्या वे नहीं जानते कि तन्हाई का दर्द क्या होता है ? क्या वे नहीं जानते कि तुम यहाँ गाँव में उनके बिना कैसे रह सकती हो . और क्या तुम उनसे यह उम्मीद रखती हो कि शहर में वह
कुछ नहीं करेंगे ? क्या वे साधू बने रहेंगे ? क्या शहर में गोरियों की कमी है ? क्या वहाँ पर तुमसे खूबसूरत और जरूरतमंद नहीं होंगी ? क्या वे भी तुम्हारे बिना जी सकते हैं ? अरे यहाँ तो घर की बात है. जब तक जी
चाहा, और जब तक सही माहौल रहा आनंद लिया वरना छोड़ दिया. घर का माल घर में ही रहेगा और किसीको कानों कान खबर भी नहीं लगेगी. अगर लास्ट में किसीको पता चला भी गया तो क्या फर्क पड़ता है ? सब लोग
जानते हैं कि जों परदेश जाता है, उसकी बीवी को कुछ न कुछ समझौते करने ही पड़ते हैं. बड़े पीपल के पाद जों टेकरी पर घर बना है, उसके मालिक दीनू काका को जानती हो, बुड्ढे हो गए मगर अपने बेटे की पत्नी को संतुष्ट
करते उम्र गुजर गयी . उनका बेटा दूर शहर में नौकरी मारता है. साल , दो साल में आता है . ऐसे में क्या करते ? उनकी बहू ही उनकी पाटने बनकर रहती है ?
चंम्पा- दैया रे दैया . ये क्या कह रहे हो ? बुड्ढे की घरवाली नहीं है काया ?
रमन- नहीं, वो तो कबकी स्वर्ग सिधार गयी. और उधर उनके लड़के ने भी शहर में दूसरे गोरी के साथ तानाका भिड़ा लिया है. मौज ले रहा है. इधर यह भी आनंद ले रही है.
चम्पा- मुझे बहुत डर लग रहा है. मैं कोई गलत काम नहीं कर सकती .
रमन- कौन कहता है गलत काम करने के लिए. मैं खुद गलत काम में भरोसा नहीं करता. हम तो अच्छा काम करेंगे . मैं तुम्हें खूब प्यार करूँगा . अपनी जाँघों पर बिठाकर रोजाना तुम्हें खाना खिलाउंगा . तुम्हारे लिए रोजाना
नए-नए कपडे लाउंगा. मिठाइयाँ लाउंगा . तुम्हारा हर तरह से ख़याल रखूंगा . और जब तुम्हारा जी चाहा, तुम्हारी सहमति के बाद , जबरदस्ती नहीं, तो जब तुम्हारी इच्छा हुई तब हम सेक्स का आनंद उठाएंगे .
चम्पा- छी, तुम्हें शर्म नहीं आती , डायरेक्ट सेक्स कहते हो.
रमन- इसमें शर्म की क्या बात है प्यारी भाभी . सरकार तो सेक्स शिक्षा अनिवार्य करने पर विचार कर रही है .
चम्पा- सरकार में मारो झाड़ू , और सीधे आ जाओ कमरे में. अपने कपडे बदलो और चलते बनो. चाहो तो आराम करो, मैं दूध लाये देती हूँ, मगर मैं जा रही हूँ अपने कमरे में . आराम करना है मुझे .
रमन- ठीक है सरकार. जाइए आप दूध ले आइये , तब अगली बात करेंगे .
रानी- वाह री चम्पा, उस्ताद है तू भी , ये ले , यह शरबत पी ले , तू बहुत लंबी बात कर रही है . इसे पीने के बाद शोर्टकट पर आ जायेगी .
चम्पा- वो तो ठीक है , मगर शरबत तो थोड़ा सा है, इससे मेरा क्या होगा ?
रानी- अच्छा ये ले, मैं गिलास भर देती हूँ, मगर एक ही सांस में खत्म करना होगा ,. तभी आएगा आनंद.
चम्पा ने रानी का दिया हुआ कांच का गिलास अपने हलक से लगा लिया और नाक मुंह बनाते हुए उसे एक ही सांस में खतम कर दिया . उसे पीते ही उसने जोरदार डकार ली ,. रानी ने अपनी सिगरेट उसके होठों से
लगादी, न न करते हुए वह सिगरेट के सुट्टे लगाने लगी. कुछ देर बाद ही उस पर नशा हावी होने लगा. रानी ने उसे शरबत की जगह शराब पिलादी थी. शराब के कारण उसके हाथ डगमगाने लगे , बोली-
-यह क्या हो रहा है मालकिन, ऐसा लगता है मानो इस शरबत को पीते ही मैं हवा में उड़ने लगी हूँ .
रानी- मैंने कहा था न यह जादुई शरबत है. अब तुम तोते की तरह बोलोगी , बताओ फिर उस दिन क्या हुआ था ?
चम्पा-उस दिन मैं रमन के पास दूध लेकर गयी तो वह अपने खास अंग को रगद राह था , मैंने उसकी तरफ दूध का गिलास बढ़ाया तो उसे एक हाथ से गिलास थामा और दुसरे हाथ से मुझे अपनी तरफ खींच लिया . मैंधडाम से उसके ऊपर गिर पडी.
मेरी साँसे जोर -जोर से चल रही थी. वह मेरी आँखों में क्झांक रहा था. मेरे हाथ -पाँव सुन्न जैसे हो गए, ना जाने क्यों , मैं उसका विरोध नहीं कर पा रही थी. शायद मेरे दिल के किसी कोने में उसके लिए प्यार और
समर्पण की भावना छिपी हुई थी . मैं बड़ी मुश्किल से बस इतना ही कह पाई-
-क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा तो क्या होगा ?
रमन- कुछ नहीं मेरी जान, मैंने सब दरवाजे बंद कर दिये हैं. सिर्फ यही एक दरवाजा बचा है, इसे भी बंद कर दिया जाएगा.
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