Saturday, October 23, 2010

लवगुरु ,-७६ रानी- रखनी पड़ती है यार, बताना तो नहीं चाहता था लेकिन एक दिन पीने के बाद केशव ने इस तरफ इशारा किया था. अब मैंने उस तरफ तुक्का मारना शुरू किया ही था कि वह तीर की तरह लग गया .
चम्पा- अब आपसे क्या झूठ बोलना, वैसे रमन कोई बहुत बड़ा राय बहादुर नहीं है मगर जब केशव घर नहीं होता तो देवर से ही काम चला लेती हूँ, मैं जिस सोसाइटी से आती हूँ वहाँ पर पाखण्ड बहुत चलता है . ऐसा होता
है कि जों दौलतवाले लोग हैं, उनके लिए कोई नियम नहीं और जों गरीब घर की महिलायें हैं, अगर वे किसी गैर मर्द से बात भी करलें तो उनको वैश्या करार दे दिया जाता है . समाज में उनका जीना हराम कर दिया जाता
है, बहिष्कार करने तक की धमकियाँ दी जाती हैं और इसी बहाने समाज के ठेकेदारों को जुल्म करने मौक़ा मिल जाता है .
रानी क्या कहती हो ? कैसा जुल्म ? बताओ न मुझे .
चम्पा- मुझे याद है कम्मो की कहानी . कम्मो के माँ -बाप बचपन में ही मर गए थे इसलिए वह अपने फूफा के घर यानि हमारे गाँव में रहती थी. जब कम्मो जवान हुई तो मौहल्ले के लड़के भँवरे की तरह उसके आगे-पीछे
मंडराने लगे. वह बेचारी सीधी सादी थी, अपने काम से काम रखती थी. न जाने कहा से गाँव में एक लड़का चला आया , वह उस कम्मो के पीछे पड़ा गया. एक दिन कुआ पर जब वह पानी भरने गयी तो लड़का उससे बात करने .
कम्मो उस लड़का को समझा रही थी कि लोगों ने इसी बात का बतंगड बना दिया . बात समाज के ठेकेदारों तक पहुँची . कुछ गुंडे लोगों की पंचायत बुलाई गयी और गाँव का माहौल खराब करने तथा चरित्रहीनता का आरोप लगाते हुए
कम्मो को सजा सुनाने की बात की जाने लगी. कम्मो के फूफा मज्दूढ़ थे, कमजोर थे बेचारे डर गए . उनकी भी सयानी लड़कियां थीं, बेचारे डर गए कि अगर कम्मो पर आरोप लगे तो उनकी बेटियों से कण ब्याह करेगा ? आखिरकार
फैसला सुनाने वाले जे घर गए , उसके हाथ जोड़े , गिडगिडाए . सामने वाला दबंग था , ऐसे ही नहीं माना. कम्मो को माफी मांगने के लिए बुलवा लिया और फिर वही हुआ , जिसकी आशंका थी. उस दबंग ने कम्मो की इज्जत तार-तार
करदी और रोजाना रात को आने का हुक्म सूना दिया. वह दबंग दो माह तक कम्मो के जिस्म को नोंचता रहा. इतने से भी बात नहीं बनी यतो उसने अपने साथियों को बुलाकर कम्मो को उनके सामने परोसना शुरू कर दिया .
बेचारी कम्मो, ज़िंदा लाश बनकर रह गयी. उसकी ख़ूबसूरती ही एक अभिशाप बनकर रह गयी . जब उसकी अंतरआत्मा उसको धिक्कारने लगी तो वह सीढी पुलिस स्टेशन पहुँची . थाने में उसके साथ दो दिन और दो रात ताका लगातार
बलात्कार किया गया. आखिरकार उसकी मौत हो गयी . इसके बाद शुरू हुई नेतागीरी . लोगों ने रास्ता जाम किया, सरकारी वाहन फूं डाले, तब जाकर सरकार के कानों पर जून रेंगी . पूरा थाना बर्खास्त कर दिया गया. कुछ अधिकारियों
-कर्मचारियों को गिरफ्तार भी किया गया. मगर उससे क्या होने वाला था. उससे कम्मो की जिंदगी तो वापस आ नहीं सकती.
रानी- ओह, बहुत बुरा हुआ . अफ़सोस की गाँव में अब भी क़ानून का शासन नहीं चलता .
चम्पा- हाँ, मेमसाब. इसलिए जब केशव की याद आती थी तो रमन से ही अपनी जिस्मानी भूख शांत कर लिया करती थी , इससे घर की इज्जत घर में ही रहती थी और फिर रमन भी इधर -उधर की तांक झाँक से बच जाता था.
रानी -ठीक है , लेकिन यह तो कहा ही जाता है कि देवर के साथ सेक्स करना मर्यादा तोडना है , क्योंकि भाभी को माँ जैसी माना गया है.
चम्पा- अहन दोषी तो अहम हैं, दोष तो है ही मगर क्या करें, ज्यादा बड़ा गुनाह करने से अच्छा मुझे लगाकि छोटा सा गुनाह कर लिया जाए.
रानी- कोई गुनाह नहीं है, तुम्हारा पति और देवर हम उम्र ही हैं, एकाध साल का फर्क ही तो है . और दूसरे नजरिये से देखा आजाये तो तुमने उसे गलत रास्ते से जाने से तो बचाया ही है. खैर, एक बताओगी?
चम्पा- अहन, सच-सच बताउंगी .
रानी- ज्यादामजा कौन देता है ?
चम्पा- मेरा पति रमन. वो दिखता ही हल्का -पतला है मगर है मस्त. जबरदस्त.
रानी- और रमन ? उसके बारे में क्या राय है ?
चम्पा- वह दिखने में ही ताकतवर है, जोशीला भी है लेकिन मैदान पर ज्यादा देर तक रुक नहीं पाता.
रानी -जब तक बिस्तर पर हाहाकार मचाने वाला मर्द न मिले तब तक सेक्स का असली सुख नहीं मिल पाता .
चम्पा- आपने कभी बाहर के मर्द का मजा लिया है मेमसाब ? बुरा मत मानियेगा . ऐसे ही पूछ रही हूँ.
रानी- हा हा हा, ये कैसा सवाल पूछ रही हो चम्पा. जों हमारे शरीर को सुख दे वह बाहर का कहाँ रह गया . वह मर्द भी तो अपना ही कहलायेगा .
चम्पा- जी , मालकिन, आप होशियार बात घुमाना जानती हैं , तर्क देना जानती हैं. ठीक है. जों अच्छा न अलगे उसका जवाब मत दीजिए , मगर मैं आपके हर सवाल का जवाब जरूर दूंगी .

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