Monday, November 30, 2009

मोहब्बत के मसीहा , भाग-33

ऐसा करना सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं है। पता नहीं हमको इसकी क्या सजा मिलेगी ?बैठे बिठाए किसीकी हाय लेना अच्छी बात नहीं है। मैंने बहुत सोच विचार के बाद तुमको ऐसी सलाह देने के फैसला किया है।
स्वीटी- कैसी कायरों वाली बात करती हो, तुम मेरी सबसे बहादुर दोस्त हो , इसलिए तुम्हें अपनी हमराज बनाना चाहती हूँ, मगर जब तुम अभी से इस तरह दरोगी तो काम आगे कैसे बढेगा ? मुझे लगता है की तुम हमारी टीम में रहने लायक भी नही हो, अरे किसीको थोड़ी सी सजा देने में , सिर्फ़ मजा चखाने में ऐसा कौन सा पहाड़ टूट जाएगा की हमें सब फांसी पर चढ़ा देंगे । मजाक करना कौन सी क़ानून की किताब में अपराध है ?
सपना - पहले किसी से प्यार करना , उसे अपनी अदाओं में उलझाना, उसे दीवाना बना देना और फ़िर अचानक साजिस के तहत उसका दिल तोड़ देना , यह गुनाह नहीं तो और क्या है ?
स्वीटी- ऐसे किस्से तो हम रोजाना सुनते रहते हैं, लोग रोजाना अपने संबंधों को रीफ्रेश करते हैं। फोरेन में तो सुबह शादी और शाम को तलाक हो रहे हैं।
सपना - मैंने सूना है की दिल तोड़ना सबसे बड़ा पाप होता है। कुछ भी करना मगर किसीका दिल मत तोडना।मेरी जितनी समझ है मैं तुम्हें उतना बता रही हूँ। आगे तुम्हारी इच्छा ।
स्वीटी- अरे यार , मैं यहाँ भजन कीर्तन करने नहीं बल्कि मौज मस्ती के मूड में आयी हूँ लेकिन देखती हूँ की आजकल तुम पर कुछ ज्यादा ही भक्तिभाव छाया हुआ है। दखो , तुम्हें अच्छी तरह मालूम है , यह हमारी साधू बनानने की नहीं पढने -लिखने और खेलने खाने के दिन हैं। हर बात पर सीरियस हो जाना और उसके विषय में सात जन्मों तक के बारे में सोचना यह हमारे उसूलों के ख़िलाफ़ है। हमारी टीम में जितनी भी लड़कियां हैं, मैं तुम्हें उन सबमे बुद्धिमान समझती हूँ, तुम हो भी ऐसी। मगर इसका मतलब यह नहीं की बेमतलब जब चाहो तब बीच में टांग अदाओं। वह भी छोटे से काम के लिए, तुम्हें करना ही क्या है। अरे सही टाइम देखकर राज के सामने मेरा जिक्र करना है, बातों ही बातों में उसे बाताना है की मैं उसे कितना चाहती हूँ, रात दिन उसीके ख्यालों में पडी रहती हूँ मगर झिझक के मारे अपना हालेदिल नहीं कह पाती। इस छोटे से काम के लिए तुम अपनी सबसे प्यारी सहेली को नाराज कर रही हो , दिल तोड़ रही हो उसका । फ़िर तो तुम भी बेदर्द ठहरी न। तुम नहीं तोड़ रही हो मेरा दिल ? सोचो, अगर तुम्हारी ना सुनकर मैंने कोई अनहोनी कर डाली जैसे की आत्महत्या या फ़िर ऐसा ही कोई दूसरा काम, फ़िर भगवान् को क्या जवाब दोगी तुम ? बोलो है कोई इसका जवाब ?
सपना- प्लीज , ऐसा मत कहो । तुम ऐसा कुछ नहीं कर सकतीं। भगवान् के लिए प्लीज... तुम जो कहोगी मैं करने के लिए तैयार हूँ, मैंने कहा था ना की इसके लिए पूरी योजना भी तैयार है।
स्वीटी- मैं भी तो सुनूं, तुमने कैसी प्लानिंग की है ? आख़िर मुझे भी पता होना चाहिए ।
सपना- आज शाम को राज जब जिम जाएगा तो मैं भी उसे वहाँ पर मिलूंगी। वहीं बातचीत में उसका ध्यान तुम्हारी तरफ़ आकर्षित कर दूंगी। यह यदा मुश्किल नहीं है।
स्वीटी- मगर शाम को और जिम ? मैं कुछ समझी नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है ? मैंने तो कभी नहीं कहा की राज शाम के वक्त जिम जाता है। मैंने तो यह कहा था की वह सुबह सवेरे ही वहां पर मिलता है।
सपना -तुमने जो सूचना दी थी वह पुराणी हो चुकी है। आज शाम को वह पक्का वहाँ जाने वाला है । हम भी किसी मर्ज की दवा तो हैं ही। अरे मन्दिर तो गाम गाम हैं, मगर वृन्दावन तो इसी का नाम है।
स्वीटी- वाह । मान गयी सपना । मैंने तुम्हें ऐसे ही थोड़े चुना था। इसका मतलब हम बहुत जल्द कामयाब होंगे। फ़िर देखना कैसे टूटेगा उस राज का घमंड ?
सपना - तुम्हारा भी कोई जवाब नहीं है। तुम बहुत सयानी हो। इतनी जिद ठीक नहीं होती।
स्वीटी- ऐसा कहके दिल ना तोड़ो। आ जाओ मेरे धड़कते दिल से लग जाओ। आजकल तो ऐसा हाल है की वह कमबख्त सपने में भी आने लगा है।
सपना - कुछ उलटा सीधा तो नहीं किया न सपने में ?
स्वीटी- चल , शरारती कहीं की ......















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