- आज तो बदन से अंगारे रहे हैं , क्या आग लगाकर ही दम लोगे ?
राज- नहीं मेरी जान। यह असली सुख है, इसको महसूस करके तो देखो, जब इसे आत्मसात कर लोगी तब समझ में आएगा की इस इश्क के लिए लोग किसी भी हद तक क्यों गुजर जाते हैं ?
स्वीटी - हाँ, समझ सकती हूँ मैं।आओ न , अब मेरे करीब आ जाओ । इतने करीब की फ़िर कोई दूरी ही न बच पाये। मुझे अपने आपमें समालो मेरी जान।
राज- ठीक है । मैं और भी करीब आ जाता हूँ, जब तक तुम संतुष्ट नहीं हो जातीं, तब तक आता रहूँगा।
स्वीटी खुश थी, राज की खुशी का भी कोई ठिकाना नहीं था। वह अचानक स्वीटी से मिला और पहली बार में ही उसे यौवन का रस चखने को मिल गया। यह उसका ख़ास अनुभव था। स्वीटी को भी मनचाहा दोस्त मिल गया था, उसने जिसे चाहा, जिससे वह प्रभावित थी, वह क्या उसके जैसी न जाने कितनी लड़किया जिस लड़के पर जान छिड़कती थीं, वही लड़का आज उसके पास लेटकर उसके तलवे चाट रहा था। वह अपने आपको किसी महारानी से कम नहीं समझ रही थी । उसके मन में अनगिनत हिलोरे उठ रही थीं। और फ़िर वही हुआ जिसकी उन दोनों को प्रतीक्षा थी। उन दोनों की भावनाएं भड़कने लगी। सीने धड़कने लगे, होठ से होठ मिले और काम्ज्वाला की लपटें जोर -जोर से उठने लगीं। बहुत हसीं मंजर था। शाम घिरने लगी थी, वृक्षों से पक्षी उड़कर अपने -अपने घरों की तरफ़ निकलने लगे थे, वहीं स्वीटी और राज एक अलग ही दुनिया में नया बसेरा बनाने में मस्त थे। राज ने अपने लगभग सभी कपड़े उतार कर एक तरफ़ रख दिए और स्वीटी ने भी अपने सभी ख़ास अंगों को इतना खुला कर दिया था की जिससे राज को कोई तकलीफ न हो, वह अपनी मर्जी के मुताबिक खेल खेल सकता था , तभी तो उसकी उँगलियाँ स्वीटी के नाजुक अंग तक पहुच चुकी थीं , जब काम वासना का तूफ़ान उठने को हुआ तो स्वीटी ने अपनी आँखें बंद करलीं, वह उस स्वर्णिम समय को भोगना चाहती थी , ठीक तरह से महसूस करना चाहती थी, वह सोचने लगी की काश , यह मंजर यहीं पर आकर रुक जाए तो उसका जीएवन सफल हो जाएगा। राज ताकतवर युवक था , उसने स्वीटी को अपनी मजबूत बांहों में इस तरह कैद कर रखा था की वह हिल दुल भी नहीं सकती थी, राज उसकी तरफ़ ऐसे देख रहा था जैसे की आज्ञा मांग रहा हो। वह बेचारा क्या समझता था की स्वीटी तो पहले से ही यह अनुमति दे चुकी थी। उसकी गर्म साँसों से ही वह अनुमान लगा रही थी। क्योंकि झाडी के अन्दर तो इस समय अँधेरा था, हाथ को हाथ सुझाई नहीं देता था, पार्क के चौकीदार भी बीच-बीच में सब लोगों को आवाज लगाकर अपने -अपने गहर जाने की याद दिला रहे थे। मगर प्रेम की दुनिया में मस्त लोगों को इस सबकी परवाह कहाँ होती है । उनके लिए तो महबूब का दिल ही सब कुछ होता है। सारी दुनिया वही होती है।जिस तरह भक्त को भगवान् प्यारा होता है , उसी तरह चाहने वाले भी अपने आशिक से मोहब्बत करते हैं। चौकीदार अपना काम कर रहे थे और प्रेमी -प्रेमिका अपने काम को अंजाम दे रहे थे। स्वीटी की सां लोहार की धौकनी की तरह चल रही थीं। राज की आवाज भी बदल चुकी थी। वे दोनों प्यारण के समुन्दर में गोते लगाने के लिए पूरी तरह तैयार थे , स्वीटी ने पहली बार अपनी तरफ़ से पहल करते हुए राज के सम्ब्वेदंशील अंग को सहलाना शुरू कर दिया , कुछ देर में ही राज का अंग दहाड़ने लगा। स्वीटी उसे सहलाकर असीम आनंद महसूस कर रही थी। उसने कहा भी-
- मुझे बहुत आनंद आ रहा है, तुम कैसा महसूस कर रहे हो ?
राज- तुम्हारा सुख ही मेरा सुख है।
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