- महाराज, बिना सोचे कोई फैसला मत करना। मैं राज से शादी के बारे में अभी सोचने का समय चाहती हूँ।
पीर- ठीक है, इसीलिए तो मैंने तुम्हारी राय जानी है। क्या तुम राज से मोहब्बत नहीं करती हो ?
स्वीटी- ये मैंने कब कहा महाराज ? मैं राज से बहुत प्यार करती हूँ लेकिन ये जरूरी तो नहीं की प्यार करने वाले शादी जरूर करेंगे। बताइए ऐसा मोहब्बत की कौनसी किताब में लिखा है ?
पीर- हाँ, बात ठीक है। मगर ज्यादातर देखने में यही आया है की मोहब्बत करने वाले शादी करने की खातिर किसी भी हद तक बगावत करने पर उतारू हो जाते हैं। कुछ लोग तो मोहब्बत करते ही इसलिए हैं ताकि शादी कर सकें , मगर तुम्हारे मामले में एक नया अनुभव हो रहा है ।
स्वीटी- हम लोग आज ही मिले हैं। अभी किसीको इस बारे में पता भी नहीं लगा है। हम चाहते हैं की पहले एक दूसरे को अच्छी तरह से समझ लें, जानलें , उसके बाद शादी जैसा महतवपूर्ण निर्णय लें।घरवालों से बगावत करना भी तो शोभा नहीं देता ।
पीर- हाँ , ठीक कहती हो, यह भी आवश्यक है। माँ बाप की सहमती लेनी चाहिए ।फ़िर तुम क्या चाहती हो, मांग लो । मैं उसे पूरा करने की कोशिश करूँगा।
स्वीटी- बस यही महाराज की मैं जो भी काम करुँ मुझे उसमें जीवन भर सफलता मिलती रहे , मेरा कभी कोई काम अधूरा नहीं रहे । मेरी कोई भी जिद अधूरी न रह जाए । ऐसा होगा न महाराज।
पीर- ठीक है बेटी, तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी होगी। ऐसा ही होगा । मैं राज को भी समझाने की कोशिश करता हूँ, की वह कोई दूसरी इच्छा पूरी करवाने के लिए कहे। एक बात और बतादूँ की हमारी और तुम्हारी इन बातों को फिलहाल राज नहीं सुन रहा है।
स्वीटी- वाह, यह तो बिल्कुल लेटेस्ट तकनीक है। विज्ञान से भी तेज।
पीर- मालिक सबसे बड़ा होता है, उससे बड़ा कोई नहीं। वह जो चाहे कर सकता है, जिसको चाहे शक्तिमान और जिसको चाहे निर्धन बना सकता है। कोई उसकी ताकत के बारे में अंदाजा भी नहीं लगा सकता।
स्वीटी इन बातों को बहुत हैरत से सुन रही थी, पीर कह रहा था-
- मैं इस नतीजे पर पहुचा हूँ की राज को अपना दूसरा वरदान मांगना चाहिए , क्योंकि स्वीटी से तुम्हारी मुलाक़ात आज ही हुई है, पहले तुम लोगों को एक दूसरे की विचारों और व्यवहार से परिचित होना चाहिए, जब एक दूसरे को ठीक तरह से समझलो उसके बाद तुम लोग अपने अपने घरवालों की सहमती ले लेना। यह काम मुश्किल नहीं है, चाहो तो कुछ और मांग सकते हो , कोई और महत्वपूर्ण चीज, जिसे पाकर तुम्हारा जीवन धन्य हो जाए।
राज- माफ़ करें महाराज, मेरे लिए स्वीटी से महत्वपूर्ण कोई और नहीं है। मैं स्वीटी से मोहब्बत करता हूँ और इसकी तस्बीर मेरे दिलो दिमाग पर छाप चुकी है, अब अगर स्वीटी मुझे नहीं मिली तो मेरा जीवन व्यर्थ हो जाएगा, मेरे जीने की आरजू, मेरा अरमान , मेरी देवी और मेरा मंदिन जो कुछ भी है वह स्वीटी है। यही एक ऐसी हस्ती है जिसे पाकर मैं ख़ुद को धन्य समझूंगा, मैं गर्व से जी सकूँगा।
पीर - इस वक्त तुम जज्बाती हो रहे हो। जज्बात में इंसान बहक जाता है और वह सही फैसला नहीं ले पाटा।
राज- आप ठीक कहते हैं मगर मैं अपनी मांग पर अडिग हूँ , आप चाहें तो अपने वादे से मुकर सकते हैं, मुझे दारा और बहका सकते हैं मगर आप भी मुझे मेरे इरादों से नहीं डिगा सकते , मैं अपनी स्वीटी से प्यार करता हूँ , मतलब करता हूँ और जब तक मेरी साँस चलेगी तब तक मैं ऐसे ही मोहब्बत करता रहूँगा,
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