Tuesday, November 10, 2009

मोहब्बत के मसीहा , भाग-13

मैं इस सुख को शब्दों में बयां नहीं कर सकता । इसके लिए कुछ और करना होगा।
स्वीटी -सब कुछ तो सौंप दिया है तुमको , सभी अधिकार तुम्हारे पास मौजूद हैं। जो चाहे करो, मुझसे क्या पूछ रहे हो ? आप ऐसे कैसे कमाल कर रहे हैं ? कुछ भी मत पूछिए, कुछ भी कीजिये ।
राज- तुम्हारी इसी अदा पर तो फ़िदा हूँ , जो भी कहती हो , बिंदास कहती हो, जुबान से बहुत मीठे शब्द निकलते हैं, ऐसा लगता है जैसे शहद टपक रहा हो। कानों में घंटियाँ सी बजने लगती हैं। बहुत सहयोगी है तुम्हारा व्यवहार ।
स्वीटी-तुम्हारा भी जवाब नहीं है , हर बात में मस्ती भरी होती है। आपके अंदाज का भी कोई जवाब नहीं है।
राज- हमारा यह मिलन हमेशा -हमेशा के लिए रहेगा। सब लोग हमारी मोहब्बत की मिसाल पेश किया करेंगे।
स्वीटी को इस सबमे ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी, उसका बदन जल रहा tha , वह उस आग को बुझाने में दिलचस्पी रखती थी। तभी तो वह उससे लिपट गयी । यह उसकी राज के साथ पहली मुलाक़ात थी, इसलिए वह चाहती थी की मर्यादा में रहना ही ठीक रहेगा, अगर वह ख़ुद अपनी जुबान से कहती की उसके मन में इस तरह की भावनाएं उमड़ रही हैं तो राज बुरा मान सकता था, वह उसके चरित्र पर शक भी कर सकता था। वह जानती थी की महिला की लाज ही उसका सबसे अच्छा गहना होती है। वह इसको सही सलामत रखना चाहती थी। इस लोक लाज के कारण ही वह कुछ कह नहीं पा रही थी। मगर राज की क्या मजबूरी थी, वह क्यों इतना विलंब कर रहा था, शुभ काम में इतनी देरी तो नहीं होनी चाहिए। उसने इशारे में पुछा-
-क्या बात है, कुछ परेशानी है क्या ? पहले तो बहुत उतावले हो रहे थे और अब देखती हूँ की एकदम ठंडे पड़ गए हो। शाम गहरी हो चली है, चौकीदार भी चिला रहा हैं। घर नहीं चलना है क्या ?
राज- अभी तो आनंद की तरंगें शुरू ही हुई हैं, ऐसे में तुम जाने की बात करती हो। चौकीदार अपना काम कर रहा हाउ और हमको अपना काम करना है। इसके बाद तुम कहोगी की तुम्हारे परिवार वाले भी तुम्हारा इन्तजार कर रहे हैं, ऐसा नहीं चलेगा मेरी जान , आज तो मन के सब अरमान निकालने हैं , मैंने बहुत बार तुम्हारे बारे में सोचा है , खयालों में ही प्यार किया है। इस सपने को आज साकार करना है।
स्वीटी- कैसे होगा मगर ? मैंने तो अपने घरवालों की वजह से मोबाइल भी बंद कर दिया है। बैट्री का बहाना कर दिया है। अगर किसी सहेली का बहाना करती तो वे वहाँ फोन करके पूछते इसलिए मैंने ऐसा किया , अब अगली ही फुर्सत में एक एस एम् एस भी कर दूंगी ।
राज- अब यहाँ के बाद हमको होटल में चलना है। वहाँ आराम से अपना पहला हनीमून मनाएंगे। यहाँ पर मजा नहीं आ रहा है, होटल में सेफ भी रहेंगे। यहाँ पर डर जैसा लग रहा है।
स्वीटी- नहीं ऐसी भी कोई ख़ास बात नजर नहीं आती, इतना डर होता तो फ़िर यहाँ पर दूसरे लोग क्यों मौज मस्ती करते, देख रहे हो ना आसपास से कैसी आवाजें आ रही हैं। यहाँ पर सब बेफिक्र हैं। सब लोग खुश हैं। मेरे ख़याल से यहाँ के लोग पुलिसवालों को हफ्ता देते होंगे तभी यहाँ पर आराम से सब चलता है।
राज- हाँ, शायद ऐसा भी हो सकता है। मगर ऐसी जगहों पर पुलिस से ज्यादा चोरों की दहशत होती है। मुझे इस बात से डर लगता है की अगर दस पाँच लोग हथियार लेकर यहाँ आ जाते हैं और वे तुमसे बदसलूकी करते हैं तो मैं किसी भी हद तक गुजर सकता हूँ , यहाँ तक की अगर किसीकी ह्त्या भी करनी पडी तो मैं कर सकता हूं। इसलिए मैं चाहता हूँ की किसी होटल पर चलकर अआराम से प्रणय क्रीडा का सुख भोगा जाए ।
स्वीटी -तुम्हारी किसी बात से इनकार नहीं कर सकती मैं। जो चाहते हो वो करो।
राज - मेरे खायाल से हम लोगों को अब यहाँ से निकलना चाहिए ।
स्वीटी ने अपने कपड़े ठीक कर दिए । कुछ ही देर बाद वे दोनों उस भयंकर झाडी से निकल गए , वहाँ से बाहर निकलते ही वे दोनों men रोड पर आ गए। चारों तरफ़ khatarnaak andheraa था, havaa saany - saany chakl रही थी।



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