स्वीटी- ये क्या कर रहे हो, तारीफ़ या फ़िर बुराई ? कुछ समझ में नहीं आ रहा है ।
राज ने उसकी बात सुनने के बजाय उसके जिस्म को सहलाना शुरू कर दिया। यह सुख भोगने की शुरुआत भर थी, स्वीटी समझ गयी की राज अब मूड में आ गया है, उसके पास पार्क में लिए गए कंडोम मौजूद थे क्योंकि वहां पर तो उनके इस्तेमाल हो नहीं पाया था वैसे भी होटलों में इस तरह की दिक्कतें कभी नहीं आतीं, वहां तो थोक के भाव में कंडोम मिल जाते हैं। मगर स्वीटी ने होटल से मंगाने के बजाय उसी कंडोम का इस्तेमाल करना बेहतर समझ, इसका एक कारण तो यह था की होटल वालोँ को विशेषकर वेटर को भनक भी नहीं लगेगी।
राज भी उसकी बात को अच्छी तरह से समझ रहा था। जब उसने उसे बाहर निकालकर रख दिया तो राज ने उसकी तरफ़ एक खुशनुमा मुस्कान उछाल दी। राज ने फ़िर से कल वाला राग अलापना शुरू किया-
देर से विवाह करने वाले स्त्रीपुरूषों के प्रति समाज का रवैया भी कुछ संदेहास्पद और मजाक का विषय बन जाता है। समाज में विवाह को युवावस्था की जरूरत माना जाता है न की अधे़डावस्था को। देर का जो स्त्रीपुरूष अपनी युवावस्था रिश्तों को नापसंद करने में गुजार देंते है उन्हे बाद में अपनी सभी चाहतों से समझौता करना प़डता है। ढ़लती उम्र में जैसा साथी मिलें उसी में संतोष करना प़डता है। अपनी चाहत या पसंद उम्र के इस प़डाव पर आ कर कोई मायने नहीं रखती। अधे़डावस्था में विवाह एक जरूरत बन जाती है, जिस के लिए पतिपत्नी को हर कदम पर समझौता करना प़डता है। इस विवाह का उद्देश्य मात्र एक सहारा होता है, जो वास्तव में इस उम्र में शारीरिक अक्षमताओं की वजह से सहारा बनने के बजाय बोझ ही बनता है। ढ़लती उम्र का अहसास: युवावस्था में पतिपत्नी की अठखेलियां, उन का रूठना, मनाना और प्रेमालाप इन प्रौढ़ावस्था के विवाहितों में दूर-दूर तक नजर नहीं आता। युवक की खत्म होती शारीरिक क्षमताएं, पस्त होता रोमाचं और उत्साह, साथ ही नारी के नारीसुलभ आकर्षण का अभाव उन में एक दूसरे से प्यार, लगाव व रूचि को खत्म कर देता है। अधे़डावस्था में युवाओं जैसा उत्साह, रोमाचं व शारीरिक क्षमता नहीं रहती तब उन का एकमात्र ध्येय अपने अकेलेपन को दूर करना होता है, जिससे जीवन में नीरसता आ जाती है और दंपत्ति को अपनी ढ़लती उम्र का अहसास सताने लगता है। अधे़डावस्था के विवाह में उत्साह व जोश की कमी के कारण जीवन में आनंद नहीं रहता और वह रिश्ता एक जरूरत और औपचारिकता बन कर रह जाता है। अधे़डावस्था में विवाह होने पर दंपत्ति के पास भविष्य के लिए योजनाएं बनाने का न तो समय होता है और ना ही उनमें उनको पूरा करने का शारीरिक सामर्थय होता है। ढ़लती उम्र का अहसास उनके जीवन मे गंभीरता व नीरसता भर देता है और परिवार में हंसीमजाक, ल़डना-झग़डना व रूठना-मनाना जैसे उत्सवों का कोई नाम नहीं होता।
स्वीटी- ठीक कहते हो तुम। ऐसा ही होता है। मैं सोचती हूँ की तुम समय से पहले ही परिपक्व हो गए हो। बहुत समझदारी वाली बातें करते हो। क्या डॉक्टर बन्ने का इरादा है ?
राज- नहीं यार । ऐसी बात नहीं है, मैं अखबार पढता रहता हूँ, मैगजीन पढता रहता हूँ , इसी कारण ये सब हो रहा है। मैं भी कितना अजीब हूँ, पहले भी पूरा समय इसी भाशंबाजी में बिगाड़ चुका हूँ और अब भी यही करने बैठ गया। ने आ जाने मुझे भी किस दिन अक्ल आएगी।
स्वीटी- जब भगवान् अक्ल बाँट रहे थे तो उस समय कहाँ गए थे तुम ?
राज- तुमसे अँखियाँ मिलाने । तुमसे मोहब्बत करने ।
स्वीटी- जाने भी दो, रहने भी दो। किसी लड़की की तरफ़ आँख उठाकर तो देखते भी नहीं बड़ी आये मोहब्बत करने, उसके लिए कलेजा चाहिए , मजबूत मर्दों वाला kaleja।
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