गीत सुनकर राज के मन में संगीत के नए नए फव्वारे छूटने लगे, उसने कहाँ सोचा था की इस तरह उसको अचानक स्वीटी जैसी हसीना मिल जायेगी । वो तो अपनी ही दुनिया में मस्त था की अचानक स्वीटी से उसकी मुलाक़ात हो गयी। वह स्वीटी के जिस्म का स्वाद चखकर बेहद खुश था, उसके अन्दर से यही आवाज आती थी की स्वीटी के साथ उसका यह अंतरग सम्बन्ध हमेशा ऐसा ही बना रहे, वह अपनी खुशी का इजहार करने के लिए स्वीटी के कन्धों को चूम रहा था। उसकी नग्न कमर को भी सहला रहा था। स्वीटी अपनी मस्ती के सनार में गुनगुना रही थी। वह सोच रही थी की काश राज भी रंगीन मिजाज होता तो वह भी उसके लिए शराब की वयवस्था करता , उसको अश्लील फ़िल्म देखने का ऑफर देता । मगर वह तो बिल्कुल सीधा सादा था। इतना सज्जन की इश्क भी बहुत मुश्किल से कर पा रहा था। फ़िर भी उसने कह दिया -
- तुम ऐसे कैसे हो, आख़िर हमको और लोगों की तरह होना चाहिए।
राज- तुम्हारे लिए तो मैं किसी भी हद तक जा सकता हूँ, अपने आपको क्या दुनिया को भी बदल सकता हूँ । एक बार आदेश देकर तो देखो।
स्वीटी- कुछ काम ऐसे होते हैं जिनके लिए किसी तरह की आज्ञा की जरूरत नहीं पड़ती । और तुम भी ऐसे आशिक हो की बस कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसी -ऐसी बात करते हो । अपने आप कब करना सीखोगे ?
राज- तुमसे ट्रेनिंग लेनी पड़ेगी मेरी जान, इसके बिना गुजारा नहीं होगा, वैसे आज के लिए इतना ही काफी है। अब मैं आराम से प्यारी जान को प्यार के नए रंग में रंग डालूँगा। खूब मजा आएगा।
स्वीटी- तुम बहुत भले और भोले हो। बहुत सुख मिलता है तुम्हारी उपस्थिति में । स्पर्श पाकर आंतरिक सुकून मिलता है। मेरी आत्मा भी प्रफुल्लित हो जाती है।
राज- मुझे भी एक नई अनुभूति होने लगी है। इससे पहले कभी अध्यात्म के बारे में कुछ जाना नहीं, समझा नहीं। अब मगर इसके बारे में काफी डिटेल्स मिलने लगे है। एक नई इच्छा जाग्रत होने लगी है। बहुत कुछ जानने की उत्सुकता है।
sweeti- इस utkanthaa को तुम्हें बहुत oonchaaee तक ले जाना है।
राज ने स्वीटी के अन्तिम शब्द नहीं सुने , वह स्वीटी को नीचे गिराकर चूमने लगा। फव्वारे का पानी अभी भी चल रहा था, वह पानी उन दोनों के बदन में आग लगा रहा था। वे दोनों इस समय पूरी तरह निर्वस्त्र थे। स्वीटी की गोलाइयों पर अपने हाथों का भार बढाते हुए वह बोला-
-इन्हें देखते ही मुह में पानी आ जाता है। आह । अब कभी अलग मत होना मुझसे । इन स्वर्णिम पलों का सुख भोगने के लिए सदा मेरी आगोश में ही रहना। तुम्हारे बिना अब जीवन की कोई कल्पना भी नहीं की जा सकती। तुम हो तो जीएवन है , तुम नहीं तो नीरसता है, बेरंग दुनिया है।
स्वीटी- हाँ, अब हम एक दूसरे से कभी भी जुदा नहीं हो सकते।
राज- अगर प्यार नहीं तो दुनिया बड़ी अजीब लगती है । कुछ समझ ही नहीं आता की लोग क्यों जिय्र जा रहे हैं।
स्वीटी- हाँ, न जाने क्यों लोग आपस में झगडा करते हैं। मार काट करते हैं। क्यों लोग एक दूसरे के ख़िलाफ़ साजिस रचते हैं, एक दूसरे को नीचा दिखाते हैं।
राज- और क्यों पाप करते हैं। झूठ बोलते हैं। बे ईमानी करते हैं ? क्यों लोग किसीका दिल दुखाते हैं,। एक दूसरे से मोहब्बत क्यों नहीं करते ?
स्वीटी - हम दोनों इस नफरत से भरी दुनिया को प्यार का पैगाम देंगे। मोहब्बत करना सिखायेंगे।
राज - मोहब्बत खुदा की इबादत की तरह है , मगर मोहब्बत सच्ची होनी चाहिए, उसमे कहीं स्वार्थ नहीं होना चाहिए। अगर स्वार्थ आ गया तो सब बेकार हो जाता है।
स्वीटी- ये तुमने बहुत पते की बात कहीं है, हमारा और तुम्हारा प्यार ही ऐसा है जहाँ किसीको किसी से कोई ऐतराज नहीं है। कोई लालच नहीं है। सब सच्ची मोहब्बत के लिए यहाँ पर हैं। तुम भी , और मैं भी।
राज- हाँ यही कारण है की सदैव हम इसी तरह मिलते रहेंगे। एक दूसरे के करीब रहेंगे।
स्वीटी - अब तुम समझे मोहब्बत की गहराई को। इसके सामने सब फेल हैं। मोहब्बत सबसे बड़ी होती हैं,। शादी विवाह इसके सामने बहुत छोटी चीज है।
Monday, November 23, 2009
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