क्योंकि मैं सब कुछ कर सकता हूँ मगर अपनी प्रेमिका पर इल्जाम नहीं लगा सकता , कोई दूसरा लगाए यह भी बर्दाश्त नहीं कर सकता। आओ , तुम्हें आंखों में ऐसे बसालूँ की फ़िर कुछ देखने के लिए गुंजाइश ही नहीं बचे।
स्वीटी- तुम तो जज्बाती हो गए यार। मैं तो ऐसे ही मजाक कर रही थी।
राज- हैरत है, किसीके लिए कोई बात महज एक मजाक है और किसीके लिए वही बात जिन्दगी और मौत की तरह मायने रखती है। फ़िर भी मैं तुम्हारी तरह ही देखने की कोशिश करूँगा। तुम्हारा नजरिया ही अपनाऊंगा।
स्वीटी - अच्छा जी, बड़े आज्ञाकारी बन रहे हो,क्या खास बात है ? जैसे बकरे को हलाल करते समय उसकी हर इच्छा पूरी की जाती है , मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है।
राज- ये मजाक अच्छा है, अगर मैं ये कहता तो उसे इल्जाम बताया जाता।
स्वीटी ने मुस्कराते हुए अपनी दायीं आँख दाबादी, अब रास्ता साफ़ था। दोनों जवान थे और दोनों के ही दिल में अरमान सुलग रहे थे। वे अपना जिस्मानी दर्द दूर करने का पूरा प्रयास करने लगे। यह एक अजीब क्षण थे, राज भी खामोश था और यहाँ तक की स्वीटी ने भी मौन धारण कर लिया। वे दोनों एक दूसरे की आंखों में झाँकने लगे, दिल में आग सी लगने लगी थी। यह आग इतनी खतरनाक थी की राज ने स्वीटी के होठों को चूम लिया, यह एक शानदार और हमेशा याद रखने वाला दीर्घ चुम्बन था। आनंद के अतिरेक में स्वीएती मस्त हो चुकी थी , उसने अपनी आँखें बंद करके समर्पण का संकेत दिया था। राज समझ गया की अब मंजिल दूर नहीं है, लेकिन वह जल्दी मंजिल पर पहुचने का इच्छुक नहीं था , वह तो आराम से वहाँ जाना चाहता था ताकि हर लम्हे को सुख के साथ जिया जा सके। हर पल यादगार बना रहे । स्वीटी उसका सहयोग करने लगी। आहिस्ता -आहिस्ता राज के हाथ स्वीटी के संवेदनशील अंगों पर घूमने लगे, वह सिर्फ़ आह भरके रह जाती थी। राज उसके दिल में धधक रही आग को जावालामुखी बनाने की कोशिश करने लगा। वह जानता था की कुछ ही देर में स्वीटी भी कामवासना के शिखर पर pahuch जायेगी , tab वह उसीकी तरह तपने लगेगी, जैसे की राज का हाल था । राज भले ही काम क्रीडा के मामले में अनजान था मगर दुनियादारी से तो अनभिग्य नहीं था। सब जानता था की किस तरह वह स्वीटी जैसी खूबसूरत लड़की को संतुष्ट कर सकता है। उसने यूं ट्यूब पर कई बार सफल सुहागरात वाला वीडियो देखा था, उसने यह गुर भी सीख लिए थे की किस तरह ज्यादा देर तक बिस्तर पर महिला पार्टनर को सुख दिया जा सकता है। स्वीटी के होठों पर मुस्कान थी, दिल में हलचल। इसी कारण वह चुप थी। राज ने उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए। स्वीटी ने कोई ऐतराज दर्ज नहीं कराया । वह भी राज के कपड़े उतारने का प्रयास क्लारने लगी। कुछ देर बाद उनके जिस्म पर सिर्फ़ अंदरूनी वस्त्र ही बचे थे। स्वीटी ने अब बोलना जारी किया, बोली-
- बस , अब नहीं यहाँ से आगे बढना मना है। यह फुल स्टॉप है।
राज- अच्छा जी, यहीं से तो राह शुरू हुई है अभी, तुम कहती हो की अब रुक जाऊं।
स्वीटी- रुकना ही पड़ेगा, मुझे डर लग रहा है । देखो, सीना कैसा धड़क रहा है ।
राज- हाँ, थोड़ी सी देर में सब कुछ ठीक हो जाएगा। मन में दहशत नाम की कोई चिड़िया नहीं होगी। हर तरफ़ सुख ही सुख होंगे। मौज मस्ती होगी। तकलीफ का नामोनिशान नहीं रहेगा। यहाँ से आगे खुशियों का खजाना है।
स्वीटी - अगर कुछ हो गया तो जिम्मेदार कौन होगा ?
राज- ये कंडोम हमने क्यों लिया है। इसका भी तो इस्तेमाल किया जाएगा ।
स्वीटी- देख लेना, कुछ उलटा सीधा हुआ तो जिम्मेदारी तुम्हारी होगी।
Thursday, November 19, 2009
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