राज- ठीक है , समझ में आ गयी है बात । अगर जरूरत पडी तो आपकी सेवायें लेंगे । फिलहाल हम खाना खाने के मूड में हैं, दूर से आए हैं और थके हुए भी हैं।
वेटर चला गया तो स्वीटी मुस्कराने लगी । वह जान गयी की राज को किस तरह की भूख लगी हुयी है। राज पैग तैयार करने लगा, यह उसके लिए पहला मौका था । इससे पहले तो उसने कभी सुरा का स्वाद भी नहीं चखा था। हाँ, उसके और साथी खूब जाम से जाम टकराते थे मगर वह अपने प्राकृतिक नशे में रहना ही ज्यादा पसंद करता था , उसकी सोच थी की वह अपने ऊपर किसीको हावी नहीं होने देना चाहता था चाहे वो शराब ही क्यों ना हो। शराब के बारे में उसने सुन रक्खा था की एक बार जिसको इसकी आदत लगी फ़िर वह जीवन भर नहीं छोताती । तभी से उसे शराब से डर लगने लगा था , वह पार्टियों में जाता जरूर था मगर बहुत कम समय के लिए, दोस्तों या रिश्तेदारों को खुश करने मकसद से वह वह अपनी उपस्थिति दर्ज करता था। स्वीटी इस वक्त उसको गौर से निहार रही थी। उसका पूरा ध्यान इस बात पर था की राज किस तरह से पैग तैयार करता है । राज ने पहले गिलास में व्हिस्की डाली , फ़िर सोडा और इसके बाद दोनों गिलासोंने में पानी भरते ही चीयर्स बोल दिया। जाम से जाम टकराए , निगाह से निगाह टकराईं और शराब हलक से पार हो गयी, स्वीटी ने तो आँखें बंद करके एक बार में ही मोर्चा साफ़ कर दिया। अब बारी राज की थी , उसे बहुत कडवी महसूस हो रही थी। स्वीटी ने भी बुरा सा मुह बना रखा था , देखने से साफ़ लगता था की स्वीटी ने भी बिना मन से गिलास खाली किया है।राज ने काजू के टुकड़े स्वीटी की तरफ़ बढ़ा दिए। राज भी अपना पहला गिलास साफ़ कर चुका था। वे दोनों खुश थे। शराब ने जब अपना असर दिखाना शुरू किया तो उन्हें लगा जैसे वे आसमान पर उड़ रहे हैं। उनको अजीब फील होने लगा । राज को स्वीटी की बातें याद आने लगीं,। उसने एक फ़िल्म में यही सब तो देखा था। धीरे -धीरे उनको सुरूर चढ़ने लगा। मस्ती का दूसरा जाम भी तैयार किया गया। राज ने सिगरेट जलाली। वे दोनों धुंआ उड़ाने लगे। स्वीटी बोली-
-ये मुझे क्या हो रहा है , क्या तुम भी कुछ अलग महसूस कर रहे हो ? क्या तुम्हें भी चक्कर से आ रहे हैं ?
राज- तुमने जो कहा था ना बिल्कुल ऐसा ही हो रहा है। जी चाहता है की क हिल्ला चिल्लाकर तुमसे प्यार का इकरार करुँ। तुम्हें बताऊँ की कितनी मोहब्बत है मेरे दिल में , कितना चाहता हूँ तुम्हें। तुम्हारे लिए क्या -क्या कर सकता हूँ। मेरा उड़ने का भी दिल कर रहा है। कोई झिझक नहीं , कोई डर नहीं । कोई परेशानी नहीं। हर तरफ़ आनंद ही एंड नजर रहा है । तुमसे नहीं मिला था तो बात अलग थी मगर जब तुम मिलीं तो यह दुनिया अच्छी लगने लगीं , और अब जबकि तुम और हम प्रणय क्रीडा में मगन हैं मुझे यह दुनिया स्वर्ग नजर आने लगी है। ऐसा लगता है जैसे मालिक ने हमारी खुशियों के लिए ही ये सब चीजें बनाई हैं।
स्वीटी- और मेरा हाल तो उस नायिका जैसा है जैसा मैंने उस फ़िल्म में देखा था। शब्दों में बयान नहीं कर पा रही हूँ।
राज- फ़िक्र की बात नहीं है , पहले तो पियेंगे खायेंगे ऐश करेंगे और इसके बाद आराम से मोहब्बत के समुन्दर में गोते लगायेंगे मगर सिर्फ़ ऐसे ही नहीं , उस फ़िल्म के साथ जिसका तुमने जिक्र किया था।
स्वीटी- अच्छा , झूठ बोलते हो , तुम्हें कहाँ से मिली सीडी ?
राज - अरे बाबा , वेटर से मैंने पहले मंगाकर रखली है।
स्वीटी- सच , तब तो आज खूब मजा लेंगे ।
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