Wednesday, November 17, 2010

लवगुरु-१००

केशव- कोई देख लेगा तो ?
-कौन देखेगा ? सब हारे -नीरे खर्राटे भर रहे हैं.
केशव - तुम ही आ जाओ न, यहाँ पर. मुझसे उठा नहीं जाता, देखो न मेरा यह अंग भी बेताब होकर पाजामे से बाहर निकलना चाहता है.
-अभी आती हूँ, आकर इस नाग का फेन कुचल डालूंगी , तब इसके होश ठिकाने आयेंगे .
केशव- अगर इसका मुंह कुचल दोगी तो मजा कैसे लोगी ? असली मजा तो यही देता है.
-अच्छा , बहुत गुंडे हो तुम. जाओ मैं नहीं आती, तुम्हें आना हो तो आओ, गरज तुम्हारी है तो तुमको ही आना चाहिए न.
केशव- लेकिन एक कदन भर रखने की तो बात है. और मजा मैं अकेला तो लेने वाला नहीं, तुम भी बराबर का सुख भोगने वाली हो. तुम ही आओ.
बिजली- पहले- आप , पहले आप में ही फंस गया रोमांटिक सीन ?लेकिन मजे की बात है, मजा आ रहा होगा . फिर किसको झुकना पड़ा ?
केशव- मुझे ही, मैं ही उसकी चारपाई पर चला आया. मैं पहले ही बता चुका हूँ कि उसकी चारपाई मात्र कुछ ही दूरी पर थी , मगर एक कदम रखने में ही मुझे नानी याद आ गयी . वह एक फर्लांग का फासला मेरे लिए
जीवन का सबसे बड़ा सफर था. मैं बुरी तरह काँप रहा था, ऐसा महसूस हो रहा था जैसे दुनिया के सभी खतरनाक और बुरे लोग मेरा पीछा कर रहे हों, और सबका काम सिर्फ मुझे देखना भर ही रह गया हो, वे पल बड़े अजीब
बड़े भयावह थे. उसकी चारपाई पर जाते ही मैंने सबसे पहला जों काम किया वह था उस लड़की की चादर को खुद भी ओढ़ लेना. ताकि मेरा चेहरा उसमे छिप जाए. इसके बाद उस लड़की ने मेरी टांगों पर अपनी टांगें रख्दीन. मैंने
राहत की सांस ली, क्योंकि वह लड़की जिस तरह का तेवर दिखा रही थी उससे मन में एक डर के जैसा माहौल पैदा हो गया था. उसी डर को बाहर निकालने के लिए मैंने जल्दी से उसके होठ चूम लिए , वह कुछ नहीं बोली
बिजली- अरे बोलती क्या बुद्धू , वह तो आनंद के सागर में गोते लगा रही होगी. उसकी भावनाओं को भडकाकर फिर तुमने क्या किया ?
केशव- क्या बताऊँ, वह उम्र में जितनी छोटी थी, शरारत में उतनी ही मोटी थी. उसने तो फ़ौरन मेरे गुप्तांग को पकड़ लिया और ऊपर नीचे करने लगी. मेरा अंग फडफडाने लगा . मैंने उसकी जीभ को चूमना शुरू कर दिया ,
वह बड़े परिपक्क ढंग से दीर्घ चुम्बन दे रही थी. मैं हैरत में ठा, मुझे लगा जैसे कि वह इस चीज की पहले से ही अभ्यस्त रही होगी. सच कहता हूँ, आप भी किस करने का स्टायल ठीक तरह से नहीं जानती जबकि वह
इस मामले की उस्ताद दिख रही थी. बावजूद इसके कि वह गाँव में रहने वाली थी.
बिजली- तुम क्या समझ रहे हो कि गाँव की सभी लड़कियां सीधी सादी और चरित्रवान होती हैं. मैंने एक सर्वे में पढ़ा था कि गाँव में भी बहुत सी कम उम्र की ऐसी लड़कियां होती हैं जों बचपन में ही अपना कुमारी गँवा चुकी
होती हैं. मेरी एक मित्र बता रही थी कि गाँवों में रहने वाली कुछ लड़कियां तो १२ से १४ की उम्र में ही दर्जनों लोगों के साथ सेक्स कर चुकी होती हैं.
केशव- हाँ, मैं भी उस दिन उस लड़की को देखकर दांग रह गया था. मेरी समझ में नहीं आ रहा ठा कि आगे क्या करूँ, जबकि वह लगातार बढ़ती जा रही थी.
बिजली- तब तो तुमने उसके सेक्स जरूर किया होगा .
केशव- नहीं यार भरोसा करो . ऐसा मौक़ा ही नहीं मिला.
बिजली- देखो झूठ मत बोलना . सच-सच बताओ , किया था कि नहीं ?
केशव- नहीं, नहीं नहीं. उसने मुझे इतना ज्यादा उत्तेजित कर दिया ठा कि मैं मंजिल पर पहुँचने के बारे में सोचता उससे पहले ही चारों खाने चित्त होकर गिर पड़ा. मैं स्खलित हो चूका था .
बिजली- क्या कहते हो ?
केशव- हाँ, सिउनोगी तब न कहूँगा. उसने मेरे इस मुलायम अंग को जोर-जोर से सहलाना शुरू कर दिया. मैंने उसके होठों को चूम रहा ठा, उसकी गोलाइयों को दबा रहा था और वह अपने उसी काम में लगी थी. उसके उभारों पर मैं
खूब जोर डाल रहा था इसके बावजूद भी वह मुझसे मना नहीं कर रही थी. थोड़ी देर के बाद मुझे मजा सा आने लगा और फिर मैं उतीजना के शिखर पर गिरकर टूट गया.
बिजली- इतनी जल्दी फेल हो गए ?
केशव- जल्दी कहाँ मेरी जान. कम से कम २० मिनिट तक वह इस अंग से छेडछाड करती रही थी. वह मेरा पहला अनुभव ही तोथा.
बिजली- फिर क्या हुआ ? वह लड़की क्या बोली?
-मैं अपनी चारपाईपर वापस आ चूका था, वह इस बात पर हैरान थी कि मैं इतनी देर कैसे रुक गया ?

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