लवगुरु , भाग-८६
रानी- ठीक है तो अभी आ ही रही हूँ. इस बार तुम आगे से नहीं पीछे से करना , रमन को आगे से चांस दिया जाएगा .
चम्पा- आह. आगिस्ता-आहिस्ता करिये वरना-.....
केशव- वरना क्या मेरी जान. आज बड़ी नाजुक बन रही हो. भूल गयी वो दिन जब खुद जोर-जोर से प्रहार करने के लिए जिद किया करती थी, तुम्हारे इसी जोर के चक्कर में तो मेरी दो खाट भी टूट गयीं . और आज
तुम इतनी अचका बन रही हो. आज भी तुम वही हो, कुछ घटी नहीं, बल्कि बढ़ गयी हो. साइज भी तो बढ़ा ही होगा न .
चम्पा- चुप भी करो, जल्दी से निकाल डालो, पूरे राक्षस हो गए हो. मैडम को कितनी देर से लगा रहे थे और उसे हिलाने के बाद अब मेरी हालत खराब कर रहे हो, जल्दी से फिनिश करो , मैं ज्यादा देर तक नहीं सह
पाउंगी , तुम्हारा झटका तो बाबा मैडम ही झेल सकती है.
केशव- मैडम की बात तो छोडिये, अभी तो मुझे बिजली की गर्मी भी शांत करनी है. बिजली को जानती हो ?
चम्पा- नहीं. कभी तुमने बताया ही नहीं बिजली के बारे में. तो कैसे जान पाउंगी ?
केशव-मैडम की शरारती बेटी है, वह मैडम से भी गर्म है, बेहद गर्म. वह मेरा इन्तजार कर रही होगी, वह दरवाजे के छेद से यहाँ का नजारा देखती रहती है. मैडम तो फिर भी जल्दी ही संतुष्ट हो जाती है , मगर बिजली
तो बाप रे बाप ... संतुष्ट होने का नाम ही नहीं लेती .
चम्पा- तो क्या तुम दोनों के साथ बिस्तर पर खेल खेलते हो ? ये तो नैतिक रूप से भी गलत है . मैं इसका समर्थन नहीं करूंगी .
केशव- मैं भी समझता हूँ यार, ज़रा धीरे -धीरे बोल . बाथरूम नजदीक ही है. रमन और मैडम उसीमे गए हैं. इस कमरे से बाहर नहीं, रही बात नैतिकता की तो मैंने भी बहुत मना किया . मगर वह तो मुझेफंसाने पर आमादा
हो गयी थी, मान ही नहीं रही थी. मैं करता ? कहावत है न मारता क्या न करता ? आखि९र ,मैंने सोचा कि मुझे पैसे भी तो कमाने हैं. जब दोनों माँ बेटी पैसे दे रही हैं तो कोई बात नहीं. दोनों से पैसे निकालो .
चम्पा- तुमने अब तक बिजली के साथ कितनी बार सम्बन्ध बनाए हैं ?
केशव- सिर्फ एक बार, पहली बार ही सुहागरात मनाई है , लेकिन अब तो उसकी भावनाएं और भी ज्यादा भड़क रही होंगी . क्योंकि सेक्स ऐसी चीज है कि जब तक इससे दूर रहा जाए तब तक तो कोई बात नहीं , मगर
जब इसकी एक बार आदत पडी तो फिर नहीं छूटती , लगातार बढ़ती ही जाती है. यह ऐसी आग है कि जों एक बार लगी तो फिर इसे जितना बुझाना चाहोगे यह उतनी ही ज्यादा भडकती जायेगी .
चम्पा- हाँ, वो तो है. तो क्या यह बात मैडम को भी पता है ?
केशव- ठीक से जानकारी नहीं, मेरा मतलब है कि मेरी जानकारी में तो बिलकुल नहीं. वैसे मैं कह नहीं सकता.
चम्पा- ठीक से जानकारी नहीं से मतलब ?
केशव- मतलब कि ये रहस्यमयी लोग हैं, हो सकता है कि मैडम ऐसा जाहिर कर रही हो जैसे कि हमको कुछ जानकारी नहीं है और वैसे उसे सब कुछ पता हो, बल्कि ये भी हो सकता है कि उसीने बिजली को मेरे पीछे
लगाया हो. सोच रही हो कि लड़की बाहर किसी के साथ सेक्स करे उससे अच्छा यहीं पर सुरक्षित सेक्स करके वह अपनी इच्छा पूरी कर लेगी और बाहर तलाश नहीं करेगी .
चम्पा- तुम्हें काया लगता है ? क्या वह बाहर के लड़कों के साथ जिस्मानी समबन्ध नहीं बनाएगी ?
केशव- मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि उसे रोजाना सम्बन्ध बनाने की आदत पद जायेगी. एक नहीं, वह कई लड़कों के साथ सम्बन्ध बनाएगी , क्योंकि उसकी जिस्मानी भूख बढ़ती ही जायेगी .
चम्पा- और इस अतारः तो वह गर्भवती भी हो सकती है, मैंने सुना है कि गैरों से जिस्मानी सम्बन्ध बनाने से एड्स जैसी जानलेवा बीमारी भी हो जाती है .
केशव- बिलकुल हो सकती है. अगर हम सुरक्षित सेक्स सम्बन्ध नहीं बनाएंगे तब क्या होगा ?
चम्पा- मुझे तो बहुत डर लग रहा है. ना जाने हम कैसे अजीब लोगों में फंस गए हैं. जितनी जल्दी हो सके हम सबको इस झमेले से निकालना होगा , जितने पैसे कमाने हैं कमालो.
केशव- हाँ, शायद तुम ठीक कहती हो. इस महीने में ही हम तीनों मिलकर दो लाख तक कमा सकते हैं. इसके बड गाँव चलकर कोई काम धंधा कर लेंगे.
चंपा- और अब क्या करोगे ? क्या बिजली को संतुष्ट करने जाना ही पडेगा ?
केशव- हाँ, मजबूरी है. जब तक यहाँ हैं, इन लोगों की हर बात माननी ही होगी .
चम्पा- मगर कंडोम लगाना मत भूलना . मुझे दौलत से नहीं , आपसे प्यार है. . अब जल्दी से निकाल दो.
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