Monday, November 15, 2010

लवगुरु - ९८
बिजली- अच्छा जी, समझ रही हूँ. तुम भी बहुत बेहतरीन बोलने लगे हो.
केशव- असर तो पड़ता ही है. थोड़ा-थोड़ा तुम्हारा असर हो रहा है. और किसका होगा ?
बिजली- अब तक तुमने कितनी लड़कियों के साथ रंगीन रात बिताई है केशव ? देखो, झूठ न बोलना . मुझे कोई ऐतराज नहीं है. भले पहले तुमने कुछ भी किया हो और बाद में भी चाहे जों करो.
केशव-तुम चौथी हो मेरी जान. इनके अलावा औरकिसीके साथ सेक्स नहीं किया.
बिजली- अच्छा, सेक्स नहीं किया .तो रोमांस तो किया होगा,. वो कितनी हैं ?बताओ यार अब तो तुम्हे तुम्हारी मालकिन का भी ख़तरा नहीं करना. अब तो रात भर मौज मस्ती करनी है, और कुछ नहीं.
केशव- सिर्फ रात भर की बात क्यों करते हो ?मैं तो सरकार जीवन भर के लिए सेवा करने के लिए तैयार हूँ.
इतने कहने के बाद केशव ने बिजली को अपनी बांहों में उठा लिया, कुछ क्षणों में वे दोनों निर्वस्त्र हो गए, नग्न अवस्था में उन दोनों के बदन आग की तरह दहक रहे थे . काम वासना की चिंगारियां
उन दोनों को जलाने के लिए बेताब थी, केशव ने बिजली के सीने के उभरे हुए हिस्से को अपने होठों और जीभ से चूमना आरम्भ कर दिया . नस-नस में उत्तेजना का तूफ़ान उठा हुआ था. बिजली की सांस
जोर-जोर से चल रही थी, उसने भी केशव के गुप्त अंग को सहलाना शुरू कर दिया. उसे सहलाते ही केशव का अंग काले नाग की तरह फडफडाने लगा. इसके बाद जब बिजली ने उस नागमणि पर अपने होठ
स्पर्श किये तो वह और भी भयंकर होने लगा. केशव ने उसको अपनी गिरफ्त में कसकर पकड़ लिया. वह मचलने लगी. केशव ने उसको बेड पर पटक दिया और उसके घुटने को मोड़कर उसमे प्रवेश करना शुरू
कर दिया. बिजली के हलक से थोड़ी सी चीख उभरी , मगर केशव ने उसके मुंह पर अपना हाथ रख दिया, कुछ देर में ही फिर सब कुछ सामान्य हो गया.अब वह उसका ठीक तरह से साथ दे रही थी. वह तो ठहरा
जाना -माना खिलाडी. एक ऐसा खिलाड़ी जों मौक़ा देखकर चौका मारता है. वह उसी तरह से चौके-छक्के लगा रहा था. केशव का चेहरा तमतमा रहा ठा. वह जोर -जोर से प्रहार कर अपनी ताकत का एहसास कर करवा
रहा ठा. बिजली की जुबान से आह , ऊह जैसे कामुक शब्द निकल रहे थे. अपनी समस्त ताकत समेटकर वह कह रही थी-
- क्या आज -आज में ही जान लेने का इरादा है ?
केशव- कुछ बोलो मत, चुपचाप पडी रहो, बहुत मजा आ रहा है. अगर टोक दोगी तो आनंद कम हो जाएगा.
बिजली- तुम्हें सिर्फ आनंद की पडी है और मेरी जान पर बन आई है. ऐसा क्यों करते हो ?
केशव- अब तो बड़ी दांत रही हो , थोड़ी देर के बाद कहोगी, जोर से हमला करो , जैसा तुम्हारी मोम कहती हैं. उनको तो जमता ही नहीं है. बस फास्ट सेवा चाहिए .
बिजली- उनमे और मेरे में बड़ा अंतर है, उन्होंने दुनिया देखी है और...
केशव- कुछ कहास नहीं, एक बार जब रास्ता बन जाता है तो उस पर होकर कितने राहगीर गुजरते हैं, यह कोई मायने नहीं रखता .
बिजली- जों मैं पूछ रही हूँ, उस सवाल को तो तुम हवा में उड़ा देते हो .
केशव- पूछो न ...
बिजली- अब तक कितनी लड़कियों के साथ रोमांस कर चुके हो ? सेक्स की बात तो बता ही चुके हो .
केशव- याद नहीं आ रहा . जों सामने आई, जैसा मौका मिला वैसा कर लिया. हमारे गाँव में यह इतना मायने नहीं रखता.
बिजली- कुछ तो अनुमान होगा ही. बताओ न और मामला कहाँ तक पहुंचा, कैसे बिगडा , कुछ जानकारी दो.
केशव- एक दर्जन से अधिक तो होंगी ही. एक बार की बात है , जब मैं छोटा सा ही ठा . तब हमारे गाँव में कोई लड़की आयी हुई थे/. गर्मी के दिन थे. और मैं चबूतरे पर बाहर सो रहा था , वहीं पर पास में ही
उस लडकी की चारपाई थी.
बिजली- वाव , क्या रोमांटिक इतिफाक है , क्या नाम था उस लड़की का ?
केशव- नाम तो बिलकुल भी याद नहीं, शक्ल भी थोड़ी बहुत ही याद है, बहुत पुराना मामला है न इसलिए.
बिजली- लड़की तो सुन्दर ही होगी न ?
केशव- ठीक ठाक थी, मैंने देखा कि उस कम उम्र में भी उसके सीने की गोलाईयां बहुत बड़ी -बड़ी थी, मैंने उनको सहलाया भी और चूमा भी.
बिजली- बाहर इतना सब करने का मौक़ा मिल गया था ?
केशव- हाँ, आराम से ... सब लोग सो चुके थे.

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