लवगुरु , भाग-८७
केशव- हाँ, शायद तुम ठीक कहती हो. इस महीने में ही हम तीनों मिलकर दो लाख तक कमा सकते हैं. इसके बड गाँव चलकर कोई काम धंधा कर लेंगे.
चंपा- और अब क्या करोगे ? क्या बिजली को संतुष्ट करने जाना ही पडेगा ?
केशव- हाँ, मजबूरी है. जब तक यहाँ हैं, इन लोगों की हर बात माननी ही होगी .
चम्पा- माग्र कंदों लगाना मत भूलना . मुझे दौलत से नहीं , आपसे प्यार है. . अब जल्दी से निकाल दो. मेरी टांगों में दर्द हो रहा है, सच कहती हूँ, अब सहन नहीं कर पाउंगी . सेक्सी लोगों की संगत में रह-रहकर
तुम भी बहुत सेक्सी हो गए हो. ऐसे हमला करते हो,जैसे कि मैं इंसान नहीं जानवर हूँ. मैं तो खैर पत्नी हूँ, लेकिन अगर मेरे स्थान पर कोई दूसरे होती तो वह समझती कि तुम उसके साथ जबरदस्ती कर रहे हो.
केशव- क्या बताऊँ यार , मैडम को ऐसे ही मजा आता है, वे जोर-जोर से हमला करने को कहती हैं. मुझे करने पड़ते हैं, सच कहूँ तो अब मुझे ऐसी ही आदत पड़ गयी. आहिस्ता-आहिस्ता तुम्हें भी इस तारह की आदत जरूर
पड़ेगी , मेरा भरोसा है. मैडम की कई बातें बड़ी सटीक होती हैं. जैसे कि वे बोलती हैं कि जिंदगी इसी मौज मस्ती का नाम है, मरने के बाद क्या होगा कौन जाने ? इसलिए जैसे हो सकें खुश रहो. आनंद का कोई भी
पल बेकार न जाने दो.
चम्पा- हाँ ये बात तो है. मजा तो लेना ही चाहिए मगर एक हद भी तो होती है, हद से आगे बढ़ना ठीक नहीं है. आह, अब छोड़ दो प्लीज.
केशव अपनी पत्नी के साथ प्रणय क्रीडा में मगन था और रानी मैडम रमन के साथ बाथरूम में गयी थी और रानी की बेटी सचमुच दरवाजे के होल से अन्दर का द्रश्य देख रही थी. बेहद कामोत्तेजक सीन था . उसके
रौंगटे खड़े होने लगे. दिल में कामवासना का तूफ़ान उठने लगा. जब बिजली ने देखा कि कमरे के अंदर सिर्फ केशव और चम्पा हैं तो उसने सोचा कि अंदर घुस जाना चाहिए , इसीलिए उसने कई बार हलके से दरवाजे
को नौक भी किया लेकिन वे दोनों तो मस्ती की ऐसी अनोखी दुनिया में व्यस्त थे कि इस पर कुछ ध्यान ही नहीं दिया. कुछ देर बाद रानी अपने साथ रमन को लेकर लौटी तो वह बिलकुल नगन अवस्था में थी ,
उसे देखकर बिजली तो अपने कमरे में खिसक गयी मगर बैड पर गिरकर तकिया से अपना सीना रगड़ने लगी. रानी ने जब केशव और चम्पा को प्रणय अवस्था में देखा तो बोली-
-वाह, इसको कहते हैं जवां मर्द , असली मर्द ... तुम्हारा स्टैमिना तो गज़ब का है केशव, बादाम -सादाम खाना शुरू करो. चम्पा से कहो आज से तुम्हें अच्छी खुराक खिलाए. तुम्हारी जों ये ताकत है , बिलकुल भी कम
नहीं होनी चाहिये . क्योंकि अब तुम्हारी जिम्मेदारी बढ़ गयी है, चम्पा के साथ -साथ कभी -कभी मुझे भी मजा चाहिए .
केशव-कभी-कभी ही क्यों ? रोजाना क्यों नहीं ? मैं सक्षम हूँ इसमें.
रानी- सक्षम तो हो, वह तो दिख ही रहा है . मगर मैं नहीं चाहती कि बेकार में तुम्हें परेशानी हो. रमन आ गया है न, इसे तैयार करो .
रमन- यह पहली बार ठा इसलिए मिस्टेक हो गयी मैडम. यह गलती हमेशा नहीं होने वाली. मैं फिट हूँ. आपको मनचाहा आनंद दे सकता हूँ.
केशव- अगर ऐसी बात है तो मैं चलता हूँ अपने कमरे में, मुझे थोड़े से आराम की जरूरत है. चम्पा यहीं पर तुम लोगों की मदद करेगी. मैडम को सम्पूर्ण संतुष्टि देकर दिखाओ तो जानू.
रमन- ठीक है, यदि आपका काम खत्म हुआ तो आप जा सकते हैं. मैं मैडम को खुश रख सकता हूँ.
उसकी चुनौती से रानी खुश थी, केशव ने चम्पा को सम्पूर्ण संतुष्टि दी थी और अब वह बाथरूम की तरफ जा रहा ठा. पीछे से उसके कपडे समेटे चम्पा भी जा रही थी. फ्रेश होने के बाद केशव के बाहर से दरवाजा बंद करके
बिजली के कमरे में चला गया और अंदर रह गए रानी, चम्पा और केशव . तीनों नग्न थे. रमन काफी देर तक आराम कर चुका था यानि की रीचार्ज हो चूका था , जबकि केशव बुरी तरह से थका ठा. अब तक वह अपनी पत्नी
चम्पा सहित रानी को भी चरम अवस्था में पहुंचा चुका था. उसके कमरे में घुसते ही बिजली उससे लिपट गयी , बोली-
-तुम तो साक्षात कामदेव की तरह हो केशव, कितनी देर तक तुम अपने आपको संभाले हुए थे , मैं छिपकर सब कुछ देख रही थी.
केशव- ये तो कुछ भी नहीं, मैं अभी तो तुम्हें सुख देने के बाद भी एक -एक बार उन दोनों को संतुष्ट कर सकता हूँ.
बिजली-ना बाबा ना, अब तुम्हें यहाँ से नहीं जाने दूंगी, रात भर का मजा चाहिए.
केशव- और तुम्हारी मोम, उनका कैसे होगा ?
बिजली - उनके लिए रमन है न. वह संभाल लेगा . और कितना लगेगा उन्हें ? वे तो बहुत सुख भोग चुकी हैं, अब हमारी बारी है.
केशव- अगर वे जान गयी तो क्या होगा ?
बिजली- अच्छा, वे तो एक साथ और आगे -पीछे से दो-दो मर्दों से वार करवाती हैं, और मेरे एक से प्यार करने पर भी ऐतराज उठाएंगी . उनकी तुम छोडो .
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