Tuesday, November 23, 2010

लवगुरु-१०५
केशव- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? मैं बात कर सकता हूँ. मैं मेमसाब से इतना तो कह ही सकता हूँ कि जब वे काम क्रीडा के इस खेल में मेरे भाई और पत्नी को शामिल कर रही हैं तो बिजली को भी शामिल किया जाए. भले
ही उस वक्त पर तुम किसी के साथ सेक्स मत करना. मगर एक रास्ता तो ओपन हो ही जाएगा , बाद में हम दोनों छिप-छिपकर ऐश किया करेंगे .
बिजली- वे इतनी नादाँ नहीं है केशव, आज जब मैंने दर्द की बात कहकर तुम्हारे साथ रहने को कहा है तो वे समझ ही गयी होंगी कि मेरी काम वासना भी भड़क चुकी है.
केशव- और इस कामवासना को शांत करने के लिए उन्होंने मुझ जैसे गंवार को चुना है , यही कहना चाहती हो तुम ?
बिजली- कौन कहता है तुम गंवार हो, अरे तुम तो मेरे सपने के राजकुमार हो. मेरा जब विवाह होगा तब होगा, आज के पति तो तुम ही हो ना. अगर आज तुम साथ नहीं देते तो मैं टूटकर
बिखर जाती. मैं कोई गलत रास्ता चुन सकती थी. अब कोई दिक्कत नहीं है हम दोनों अपनी इच्छा से सुरक्षित सेक्स को चुन रहे हैं.
केशव- हाँ, और दोनों ही वयस्क हैं. आपको भी कसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होगी साथ ही कोई बाहर का इंसान भी यह जान नहीं पायेगा कि हमारे बीच किसी खिचड़ी पाक रही है.
बिजली- तुम मेरी प्यास बुझाते रहो. बाकी किसीकी फ़िक्र मैं नहीं करती. अगर कुछ भी होता है तो उसकी मैं अकली जिम्मेदार रहूंगी. इस वक्त मेरे अंदर कामोत्तेजना की आग दहक रही है. इस आग में सब कुछ भस्म हो सकता
है. मैं जलकर राख हो सकती हूँ तो मेरे संस्कार या विचारों की क्या औकात है ?
केशव- मैं तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए कटिबद्ध हूँ, जब तक इस शरीर में आख़िरी सांस रहेगी , तब तक मैं इसी तरह तुम्हारी सेवा करता रहूंगा. अब तो यही सेवाव्रत ले लिए है.
बिजली बहुत खुश थी, केशव उसके ऊपर था और उसे हर तरह से संतुष्ट करने में लगा था. वे दोनों काफी देर पहले ही चरम पर पहुंचकर संतुष्टि पा चुके थे मगर इस समय वह बिजली से खूब प्यार कर रहा था, उसने यह
बात जानी थी कि जब बेड पार्टनर के साथ प्रेम किया जाता है तो चरम पर पहुचते ही उससे दूर नहीं होना चाहिए, तुरंत दूर हो जाने से महिला [पार्टनर को लगता है कि पुरुष उससे सच्चा प्रेम नहीं करता . वे दोनों प्यार के रंग
में डूबे थे और उधर बिजली की माँ रानी केशव के भाई रमन और केशव की पत्नी चम्पा के साथ आनंद ले रही थी. वहाँ पर सिगरेट के छल्ले उड़ रहे थे. शराब का दौर चल रहा था. बेहद मादक माहौल था. तीनों के जिस्म पर
कसम खाने के लिए भी कपडे मौजूद थी. रमन इस वक्त रानी के यौवन द्वार पर चुम्बन ले रहा था और चम्पा उसके यौवन उभारों को चूम रही थी. सहसा रानी ने टोक दिया-
- अरे ये क्या उलटा-उलटा कर रहे हो ? ऐसे नहीं होता. चम्पा को नीची की सेवा करनी चाहिए और रमन को सीने के ऊपर प्यार करना चाहिए.
उसकी डपट का असर तुरंत देखा गया . चम्पा ने फ़ौरन हिमालय की चोटियों को छोड़ दिया और अब वह रानी के यौवन द्वार पर उँगलियों की दस्तक देने लगी. रानी ने केशव के कड़क अंग पर हाथ फिराना शुरू कर दिया .
रमन ने एक हाथ के सहारे से चम्पा की चिकनी-चिकनी जाँघों पर हाथ फिराना चालू कर दिया . इस तरह वे तीनों एक साथ काम क्रीडा में इन्वोल्व हो गए . रानी ने एक और पैग बनाने का आदेश देते हुए बोला-
- अब आया है मजा . मगर तुम लोगों को इस वक्त कैसा महसूस हो रहा है , यह जानना भी जरूरी है. मैं पहले चम्पा से जानना चाहूंगी.
चम्पा- लगता है जैसे धरती पर स्वर्ग उतरा आया है, यह सुख की पराकाष्ठा है, मैंने पहले कभी इतना आनंद नहीं उठाया ठा. जितना मजा इसमें आता है, उतना किसी में नहीं आता. मगर ?
रानी- मगर क्या रानी ? रुक क्यों गयी ? बोलो ...
चम्पा- मगर ये कि अगर ऐसे समय में केशव भी होते तो अलग बात होती , क्योंकि हम जब तक आपके यहाँ नौकरी कर रहे हैं , तब तक तो ठीक है मगर बाद में कभी न कभी उनके दिमाग को यह बात जरूर खलेगी
कि मैं उनकी गैमौजूदगी में आपके साथ -साथ रमन के साथ भी अय्याशी करती थी. अगर वे भी यहाँ होते तो मैं जवाब दे सकती थी कि आप भी तो वही सब करते थे , और मैंने जों भी किया वह आपके कहने पर
ही तो किया. मगर अब तो मेरे पास कहने के लिए यह रास्ता भी नहीं बचा है.
रमन- हाँ, ये बात सही है. क्योंकि उनके सामने मैं तो इनके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाता नहीं, और अगर ऐसा करता तो उनके बार-बार आग्रह करने पर ही करता , उस समय मेरे पास भी कहने के लिए बहुत कुछ होता.
रानी - मौज मस्ती के समय में तुम लोग भी क्या रोना लेकर बैठे हो . मेरे गालों की चर्चा करो , और करना ही है तो मेरी कातिल अदाओं की बात करो ..
चम्पा- हाँ, शायद हमें ऐसा ही करना होगा.
केशव- मैं तो जीवन भर आपकी इस मनमोहक मुस्कान की बात करना चाहता हूँ. आपके यौवन सागर में सदा डुबकियां लगाना चाहता हूँ मगर ऐसी किस्मत भला है कहाँ ?
रानी - क्यों ? ऐसी हारी -थकी बात क्यों करते हो ? मैं अपनी जवानी तुम दोनों भाइयों के नाम करती हूँ. सदा-सदा के लिए.
बिजली- अच्छा जी, मेरे लिए आप कुछ बचाकर नहीं रखेंगी ?


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