लवगुरु- १०८
-अपनी समूची शक्तियों का इस्तेमाल करो, मुझे संतुष्टि चाहिए. सम्पूर्ण संतुष्टि. खूब मजा आ रहा है.
चम्पा- यह लीजिए, अब बताइये कैसा महसूस हो रहा है ?
रानी- सच पूछो तो असली मजा तुमने ही बुलाया है वरना मैं तो ऐसे ही .... मजा लिया करती थी.
चम्पा- मैं खुश हूँ कि मेरी सेवा का कोई अंश आपको इतना पसंद आया है, यह तो शुरुआत भर है, अब तो इस तरह के प्रयोग अक्सर होते रहेंगे .
रमन- अगर कुछ और तरह से चाहिए तो आदेश करना. हुक्म की फ़ौरन तामील की जायेगी.
चम्पा- अपनी टांगें फैला लीजिए प्लीज, शायद और आनंद आ जाए.
रानी- अब कब तक टांगें फैलवाती रहोगी ? बस करो. अब और नहीं...
केशव- लगता है आप संतुष्टि की तरफ बढ़ रही हो. ?
रानी- हाँ, तुमने ठीक पहचाना , और तुम ?
रमन- मैं भी...
चम्पा- और मैं तो कबकी संतुष्ट हो चुकी हूँ. बस साथ देने के लिए चल रही थी. मुझे क्या है ? मैं तो आपकी संतुष्टि में ही अपनी सुख संतुष्टि समझती हूँ. जब मैं आपको कामोत्तेजल आहें भरते , होठों को सिकोडकर सी सी करते
देखती हूँ तो मेरा बदन काम वासना की आग में झुलसने लगता है और मैं जल्द ही स्खलित हो जाती हूँ. सच कहूँ तो आप बेहद सेक्सी हैं. चेहरे से भी, दिखने में भी और बातें तो बाप रे बाप.
रानी- बस कर. जब तू लड़की होकर भी इतनी तारीफ़ कर रही है तो अगर लड़का होती तब तुम्हारा क्या हाल होता ?
चम्पा- तब तो मैं आपको लेकर ही भाग जाती , सच कहती हूँ. मगर अब भी मेरी दीवानगी कुछ कम नहीं है. दरअसल मैं चाहती हूँ कि हमेशा आप ही के साथ रहूँ लेकिन अकेली नहीं. सब लोगों के साथ , क्योंकि मजा सभीके
साथ आता है. काश आज यहाँ पर अब केशव भी होते तो मजा दोगुना आ जता , शायद शराब भी पिए हुए थे . आपने व्यर्थ ही जाने दिया कहीं ऐसा तो नहीं कि पीने के कारण वे बिजली.....
रानी- रुक क्यों गयी ? बोल ना ? बिंदास बोल... अपना वाक्य पूरा कर. शराब पीकर वह ज्यादा से ज्यादा क्या कर सकता है ?
चम्पा- वही तो डरती हूँ कि कहीं ? इसलिए कहती हूँ कि वहाँ पर बिजली अकेली है न और जब पेट्रोल के साथ आग भी हो तो तकलीफ हो ही जाती है.
रानी- तू झिझकती बहुत है, मैं समझ गयी हूँ तेरे कहने का मतलब . तू यही कहना चाहती है न कि शराब के नशे में केशव अकेली बिजली के साथ काम क्रीडा कर सकता है ?
चम्पा- हाँ, मेरा कुछ ऐसा ही सोचना था.
रानी- सही सोचती है तू. लेकिन फर्क इतना है कि झिझकती बहुत है . अरे करने दो न उसे भी मौज करने दो. क्या फर्क पड़ता है . अगर बिजली जवान हो रही है तो उसके जिस्म के हार्मोन्स भी चेंज हो रहे होंगे . वह भी
किसी अच्छे साथी के साथ कुछ अंतरंग पल बिताना चाहती होगी . तो क्या बुरा है ? बल्कि केशव ठीक है उसके लिए. वह उसकी भावनाओं की कद्र करेगा . उसका शोषण तो हरगिज भी नहीं करेगा , मेरा पक्का विश्वाश है.
रानी- ये क्या कह रही हैं आप ?
चम्पा- तुम्हें थोड़ा अजीब लग रहा अहि न. चल, मेरे उस कमरे में चलकर देख, तेरा पति कितने प्यार से बिजली के साथ सेक्स कर रहा है. उन्हें तो पता भी नहीं उन लोगों के बेडरूम में मैंने खुफिया सीसीटीवी
कैमरा लगाया हुआ. बिजली बहुत खुश है. अगर उसके साथ उसकी उम्र का कोई दूसरा लड़का पहली बार सम्बन्ध बनाता तो गडबड हो सकती थी. वह उसे ब्लेकमेल भी कर सकता ठा. जबकि केशव ऐसा नहीं है . वह तो
बहुत ही प्यारा लड़का है. हर कहना मानता भी है. और सुरक्षित सम्बन्ध बना रहा है तो क्या बुराई है .
चम्पा- आप बड़े लोग भी न सच में , ऐसे ही बड़े नहीं होते हैं.
रानी- अब तू मक्खन पोलिश मत कर. चुपचाप अपना अकाम कर. अगर तेरी अग्नि शांत हुई तो जा , जाकर बाथरूम में स्नान कर.
चम्पा- मैं तो कब की शांत हो चुकी हूँ. सिर्फ आपकी एन्तारतें कर रही थी.
रानी- अरे वाह, अग्रेजी का इस्तेमाल ? अच्चेई बात है . लगता है धीरे -धीरे सब कुछ सीख जायेगी . अच्छा सुन तो, कहीं तू केशव पर मन ही मन गुस्सा तो नहीं हो रही है ? बेचिंता रहना वह तुझे छोड़कर कहीं जाने वाला
नहीं है. मेरी गारंटी है. क्योंकि हम दोनों की मजबूरी भी यही है.
चम्पा- भला मैं क्यों नाराज रहने लगी. ?
No comments:
Post a Comment