लवगुरु-९०
बिजली- होता होगा, कुछ भी हो सकता है, मगर मैं तो तुम्हारे बिना चैन से नहीं जी सकती . आज भी कल की तरह ही आहिस्ता -आहिस्ता प्यार करना.
केशव- अब भूल जाओ आहिस्ता का राग, ये तो तब तक ही होता है जब तक कि रास्ता ओपन न हो, एक बार राह खुल गयी तो कोई भी आओ, जाओ कुछ फर्क नहीं पड़ता .
बिजली- मुझसे मजाक कर रहे हो केशव, कि गाली दे रहे हो. ?
केशव- यह कहावत है बिजली, आज तुम्हारा हुस्न बिजलियाँ गिरा रहा है. जबसे हमने सुहागरात मनाई है, तबसे तुम्हारा रूप रब्ग और भी निखर गया है.
बिजली- प्यार में बहुत ताकत होती है केशव, आओ, मेरे करीब मुझे अपनी बांहों में कसकर दबालो. मेरी देह को चटका डालो. बड़ी चतर -मटर कर रही है. इसको ज़रा दुरुस्त करदो. ऐसा करो कि यह कभी भूल ही ना पाए.
केशव- कोशिश करता हूँ, हमारा तो काम ही सेवा करना है, ऐसी चटकाऊंगा कि यह भी याद रखेगी और तुम भी. मगर मुझे तुम्हारी मम्मी से डर लग रहा है. वह मुझे खोजती होंगी , पता नहीं रमन उनको संतुष्ट कर भी पा
रहा होगा कि नहीं ? हांलाकि चम्पा वहाँ है, वह माहौल को संभालनी की अच्छी खासी क्षमता रखती है. हो सकता है वह बात को बिगड़ने न दे, मगर फिर भी...
बिजली- फिर भी क्या ? जब वहां पर उन्हें मजा देने के लिए दो -दो लोग मौजूद हैं, क्या तब भी उन्हें तसल्ली नहीं होगी ? मेरे हिस्से तो तुम अकेले ही हो न ? और चम्पा वाली बात क्या बता रहे हो , वह भला कैसे बात संभाल
सकती है ? जों चीज औरतों के पास होती है, उनके पास भी तो बस वही होगी न , ?
केशव- हाँ, बाबा, है तो वही चीज , मगर वह अपने हाथ और होठों की ऐसी जादूगरी चलाती है कि मालकिन आह भरके रह जाती हैं. कहती हैं कि वह जों सुख देती है, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता. मर्द जों सुख देता है, वे उसको
कम नहीं मानती लेकिन चंपा द्वारा दिए गए सुख की भी तारीफ़ करते नहीं थकतीं.
बिजली- तब तो उनसे भी मिलना ही होगा. कल रात हमारी उनके साथ फिक्स कर दीजिए, हम भी ऐसे सुख को हर हालत में महसूस करना चाहेंगे..
केशव- बिलकुल. कल की रात हम तीनों तुम्हारे साथ ही रहेंगे, क्योंकि कल की रात मालकिन यहाँ पर नहीं रहेंगी , उन्हें कहीं बाहर जाना है.
बिजली- वाव. क्या खुशखबरी सुनाई है कह्स्व, मजा आ गया. दिल को बड़ी ठंडक पहुँची. तब तो कल पूरी रात जिस्मानी खेल खेला जाएगा. ऐसा आनंद लेंगे कि जीवन भर तक याद रहे.
केशव- कल आपने मेरे साथ पहली बार सुहागरात मनाई थी ? मैं जानना चाहता हूँ कि कोई तकलीफ तो नहीं हुई ?
बिजली- दर्द हुआ था. इस वक्त भी मीठा -मीठा दरद हो रहा है. लेकिन जब तुम्हारा यह हथियार इसमें प्रवेश करेगा तो इसके स्पर्श से सब ठीक हो जाएगा . जों तकलीफें हैं, वे सब दूर हो जायेंगी .
केशव- हाँ, वो तो है. इस जादुई चिराग में असीम ताकत है. यह कुछ भी कर सकता है. तुम्हारे नीरस जीवन को फिर से हरा -भरा कर सकता है और अंधेरों में रोशनी प्रवाहित कर सकता है. यह बहुत कमाल की चीज है. बहुत जबरदस्त ,
इसकी ताकत को मैं पहचान चुका हूँ. अगर मर्द के पास यह हो तो बीवी खूब प्यार करती है, सेवा करती है और जिसका यह कमजोर होता है उसका घर के अंदर बहुत अपमान होता है.
बिजली- मैंने भी सूना है कि औरतें अपने प्रेमियों से मिलकर अपने पति की ह्त्या तक करवा देती हैं.
केशव- हाँ, क्योंकि उन्हें पति से सम्पूर्ण संतुष्टि नहीं मिल पाति और वे अपने जिस्म की प्यास बुझाने के लिए किसी गैर मर्द का दामन थाम लेती हैं. फिर पति के पास चाहे करोड़ों की दौलत क्यों न हो मगर वह किसी काम नहीं
आती और उस कमजोर मर्द की पति रास्ता भटक जाती है. कभी -कभी ऐसा होता है कि पति उसे बाहर आने -आने जे टोकता है तो उसे हमेशा के लिए अपनी राह से हटाने के लिए पत्नी अपने प्रेंमी से सलाह -मशविरा करती है.
भावनाओं में बहकर पति उसे हमेशा के लियी रास्ते से हटाने की साजिश रच लेता है.
बिजली- इतने दावे के साथ इतनी सटीक स्टोरी तुम कैसे बता सकते हो ?
केशव- क्योंकि मैंने अखबारों में इससे रिलेटिड कई स्टोरी पढ़ी हैं. पत्रिकाओं में अक्सर इस तारह की घटनाएं छपती हैं .
बिजली- कहीं ऐसा तो नहीं कि कभी किसी महिला ने आपसे भी अपने पति को रस्ते से हटाने के लिए कहा हो ?
केशव- नहीं, बिलकुल नहीं. मैंने तो कभी चीटी तक को नहीं मार सकता . कोई मुझसे अपने पति को क्या मरवाएगी ?
बिजली- हो सकता है, तुम्हें भी भवनाओं के वेग में बहा दिया गया हो ? अभी तो बता रहे थे तुम कि प्रेमिका भावनाओं के आवेग में बाहा देती है और.....
केशव- कहीं तुम्हारा इशारा इस तरफ तो नहीं ? न बाबा ना. हम लोग दवाब में आकर सिर्फ बिस्तर तक पहुँच सकते हैं मगर किसी का क़त्ल ? तौबा ... तौबा... सपने में भी नहीं सोच सकते...
बिजली- कभी-कभी इंसान ऐसे काम भी कर गुजरता है, जों उसने कभी खाब में भी नहीं सोचे होते . क्या तुमने कभी सपने में मुझे देखा था ? या फिर ख्यालों में यह सोचा था कि मेरे साथ सुहागरात मनाओगे ?
केशव- जी नहीं, कभी नहीं...
बिजली- फिर भी ये सब कर रहे हो न.
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