लवगुरु-९१
बिजली- हो सकता है, तुम्हें भी भवनाओं के वेग में बहा दिया गया हो ? अभी तो बता रहे थे तुम कि प्रेमिका भावनाओं के आवेग में बाहा देती है और.....
केशव- कहीं तुम्हारा इशारा इस तरफ तो नहीं ? न बाबा ना. हम लोग दवाब में आकर सिर्फ बिस्तर तक पहुँच सकते हैं मगर किसी का क़त्ल ? तौबा ... तौबा... सपने में भी नहीं सोच सकते...
बिजली- कभी-कभी इंसान ऐसे काम भी कर गुजरता है, जों उसने कभी खाब में भी नहीं सोचे होते . क्या तुमने कभी सपने में मुझे देखा था ? या फिर ख्यालों में यह सोचा था कि मेरे साथ सुहागरात मनाओगे ?
केशव- जी नहीं, कभी नहीं...
बिजली- फिर भी ये सब कर रहे हो न. इसका मतलब साफ़ है कि जीवन में ऐसा कुछ भी हो जाता है, जिसे हम पहले से सोचकर नहीं रखते .
केशव- हाँ, बिलकुल . मानना ही पडेगा . आपकी बात में मानता हूँ, यह स्वीकार करता हूँ कि कभी सपने में भी मैंने यह नहीं सोचा था कि आपके साथ सेक्स करने का अवसर मिलेगा . आप जैसी हूर परी के साथ
सुहागरात का आनंद भोगने का मौक़ा मिलेगा. इसके बावजूद भी यह सब संभव हो पाया है., तो इसका मतलब यही है कि कुछ भी हो सकता है.
बिजली- एक पर्सनल सवाल करती हूँ, सच बताना . यह आपकी अंतिम परिक्षा है . अगर इसमें फेल हो गए, तो कम नंबर मिलेंगे , बहुत कम और पास हो गए तो सौ बटा सौ के चांस हैं.
केशव- मैं सचाई के साथ कहना चाहूँगा कि मैं कभी झूठ नहीं बोलता. आप जों भी सवाल करेंगी , मैं ठीक तरह से जवाब दूंगा . अगर ज़रा भी विश्वाश है तो विश्वाश करिये , मैं कुछ गलत नहीं करूँगा .
बिजली- भरोसा है तब तो इतना व्यक्तिगत सवाल पूछ रही हूँ. ये बताओ कि किसके साथ सहवास करके तुम्हें सबसे ज्यादा आनंद आया ? मेरे साथ ? अपनी मालकिन के साथ या फिर चम्पा यानि तुम्हारी पत्नी के साथ ?
केशव- निसंदेह , अपनी पत्नी चम्पा के साथ. उसका कोई जवाब नहीं है. उससे किसीकी तुलना नहीं की जा सकती. यह जवाब सुनकर आपको दुःख होगा, मुझे इसका दंड भी मिल सकता है. मगर मैं आपके भरोसे को नहीं तोड़ सकता.
आपने मुझसे सच बोलने का वादा लिया है . इसलिए जों कहूँगा , सच कहूँगा .
बिजली- वेलडन केशव. मैं बिलकुल नाराज नहीं , बल्कि सही जवाब सुनकर खुश हूँ. तुम्हारी निडरता की कायल हो गयी हूँ. आ जाओ , मुझे लूट लों . मुझे बताओ वो राज . जिनके कारण तुम चम्पा को इतना पसंद करते हो, उसकी
कुछ खासियत के बारे में मैं भी जानना चाहती हूँ, ताकि उसका अनुसरण करके तुम्हें बहुत संतुष्ट कर सकूं.
केशव- वह मेरे साथ बिस्तर पर बहुत बिंदास रहती है, साथ ही वह हया का घूंघट भी ओढ़े हुए होती है. बिस्तर के मैदान पर वह मेरी हर फरमाइश पूरी करती है. जबकि आप लोगों के साथ ऐसा नहीं है. आप लोगों से हमेशा
एक डर सा लगा रहता है. एक झिझक , एक दूरी सी बनी रहती है.
बिजली- सहवास में कैसा डर ? किसी झिझक ? थोड़ा डिटेल में बताओ.
केशव- जैसे कि मैं तुम्हारे शरीर को स्पर्श करने से पहले कई बार इस बारे में सोचता रहता हूँ कि कहीं तुम किसी बात का बुरा न जान मान जाओ. सेक्स के दौरान भी कई बातें ऐसी होती हैं जिन्हें हम आप लोगों से नहीं
कह सकते, उदाहरण के तौर पर कई बार हमारे दिल में ऐसा आता है कि बेड पार्टनर के साथ बेहद अंतरण सम्बन्ध बनाए जाएँ, जब उत्तेजना चरम पर होती है तो इच्छा होती है कि तुम मेरे खास अंग को अपने मुंह से
स्पर्श करो, उसे लोलीपोप की तरह इस्तेमाल करो,. अब यह बात हम आप लोगों से नहीं कह पाते, जबकि पत्नी के अंग को मैं खुद चूम लेता हूँ और वह मेरे अंग को चूमती -चाटती रहती है. वो भी किसी ख्वाहिश
या दवाब में नहीं, बल्कि अपने दिल से. अगर तुम भी इस क्रिया को दोहराओगी तो जन्नत जैसा मजा पाओगी .
बिजली- ओह, केशव . मैंने कितनी बार कहा है कि मेरा जिस्म अब मेरा नहीं है,. इसे अपना समझिए यार. तुम्हारा अपना. इसे जैसे चाहे भोग सकते हो.
केशव- कोशिश तो पूरी करता हूँ मगर हो नहीं पाता. और जितना हो सकता है, उतना प्यार करने और मजा लेने -देने की कोशिश करता हूँ. बाकी हम लोग मिलजुलकर कर लेंगे . पूछताछ करके.
बिजली- तुम कितनी जल्दी मेरी जान , मेरी जरूरत बन गए हो .
केशव- शायद यह हमारा सदियों का अधूरा मिलना होगा . वैसे गरीब होकर भी मैं दुसरे जन्म, भाग्य अदि पर कम ही भरोसा करता हूँ मगर तुम्हारे मामले में मेरी राय बदलती सी महसूस होती है.
बिजली- यह प्यार है या अपनी कामवासना को शांत करने का बहाना , मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूँ.
केशव- मेरे ख़याल से तुम्हारा पहले वाला ख़याल ही सही है.
बिजली- बात चाहे जों हो, मगर मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकती. रखोगी ,
केशव- मैं इस बार ऐसा सुख दूंगा की हमेशा याद रखोगी , पहले तुम्हारे इन यौवन उभारों को सहलाने दो,चूमने दो.
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