लवगुरु-८८
केशव- और तुम्हारी मोम, उनका कैसे होगा ?
बिजली - उनके लिए रमन है न. वह संभाल लेगा . और कितना लगेगा उन्हें ? वे तो बहुत सुख भोग चुकी हैं, अब हमारी बारी है.
केशव- अगर वे जान गयी तो क्या होगा ?
बिजली- अच्छा, वे तो एक साथ और आगे -पीछे से दो-दो मर्दों से वार करवाती हैं, और मेरे एक से प्यार करने पर भी ऐतराज उठाएंगी . उनकी तुम छोडो . उनको मैं अपने आप देख लूंगी . अगर वे हमें देख लेती हैं
या फिर हमारे बारे में किसीसे सुन लेती हैं, या मैं तो कहती हूँ कि भले ही वे हमें सेक्स करते हुए रंगे हाथों पकड़ भी लेती हैं, तो भी मेरे पे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है. अच्छा ही होगा अगर ऐसा हो जाता है.
केशव- आपका तो कुछ नहीं बिगडेगा मगर मैं गरीब मारा जाउंगा . वे मेरा बुरा हाल करेंगी , नौकरी भी जाएगा और जान भी.
बिजली- किसकी मजाल है जों मुझे शारीरिक सुख पहुंचाने वाले को शारीरिक दुःख पहुंचा सके, यमलोक नहीं पहुचवा दूंगी , जब तक तुम मुझे सुख दे रहे हैं, मेरी प्यास को ठीक तरह से बुझा रहे हो , तब तक तुम्हें कोई
उंगली दिखाने वाला नहीं है. तुम्हारी हर जिमेदारी मेरे ऊपर छोड़ दो. तुमने ही इस तन में आग लगाना शुरू किया है, अब इसे बुझाने की जिम्मेदारी भी आपकी ही है. मन अच्छी भली जिंदगी जी रही थी. पहले कभी
मेरे मन में सेक्स करने का ख़याल तक भी नहीं आता था, मगर जबसे तुम्हें नग्न अवस्था में सेक्स करते देखा है, तभी से बेचैन हूँ. ऐसा लगता है जैसे किसीने मेरे जिस्म में गोला बारूद भर दी हो. अब तुम्हारे बिना
कहीं मन नहीं लगता. ऐसा महसूस होता रहता है जैसे कि मुझे तुम्हारी सख्त जरूरत है. अब मुझे छोड़कर नहीं जाना.
केशव- ये आप क्या कह रही हैं ? हम ठहरे नौकर. आज यहाँ तो कल वहाँ . हम जैसे आपको न जाने कितने मिल जायेंगे . गली- गली घुमते हैं,. हमारी क्या औकात है ?
बिजली- ओह , ऐसा मत कहा करो, ऐसे शब्द सुनने में मुझे कष्ट होता है. मुझे किसी और से कोई मतलब नहीं , मैं सिर्फ तुम्हारे साथ मजे लेना चाहती हूँ. इस नीरस जिंदगी को खुशहाल बनाना चाहती हूँ.
केशव- मैं तुम्हारे दामन को खुशियों से भर दूंगा. तुम्हारे अनाग-अंग की रोजाना मालिस किया करूँगा , इतना प्रणय सुख दूंगा कि शरीर तो शरीर तुम्हारी आत्मा भी प्रसन्न रहे .
बिजली- बस, और मुझे क्लुच नहीं चाहिए, हाँ , इतना है कि तुम्हारी बाकी जरूरतों को पूरा करना मेरा काम है. चाहे वे आर्थिक जरूरतें हों या फिर कोई और . मेरे इस शरीर को अपना ही समझो , इसका जैसे चाहो
इस्तेमाल करना , मुझे कोई ऐतराज नहीं होगा, मैं तुम्हारे साथ नौकर एकी तरह नहीं बल्कि दोस्त की तरह पेश आना चाहती हूँ.
केशव- मालकिन को बोलकर अपनी शादी करवा लीजिए , फिर आप पूरे जीवन भर बिना किसी भय के ऐसा सुख लूट सकती हैं. मेरे साथ अगर आनंद लोगी तो यह छद्म आनंद होगा .
बिजली- रहने दो , मुझे ये सब मत सिखाओ, अगर शादी करने से सम्पूर्ण सुख संतुष्टि मिल सकती तो मोम तुम्हारा सहारा क्यों लेती ? डैड से ही संतुष्ट नहीं रहती ?
केशव- ओह, यह कोई जरूरी नहीं कि सबके साथ ऐसा हादसा पेश आये, यह महज इत्तेफाक भी हो सकता है.
बिजली- क्या जरूरी है कि ऐसा इतिफाक मेरे साथ नहीं होगा ?
केशव - एक बात कहूँ, तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हें पाने के लिए तो कोई भी मचल सकता है , कसीस भी हद से गुजर सकता है.
बिजली- मगर मुझे तुम्हारी जरूरत है. शादी के बाद भी तुम्हें मेरे साथ चलना होगा, मुझे लगता है कि ससुराल में तुम्हारे बिना मुझे असली मजा नहीं मिल पायेगा . मैं भी पति को सिर्फ नाम भर के लिए ही रखूंगी .
केशव- मैं सौभाग्यशाली हूँ जों तुम्हारे जैसी जन्नत की हूर मिल गयी.
बिजली- जिसे तुम हूर समझते हो , वह अपने आपको तुम्हारी दासी समझने लगी है.
केशव- यह गलत है, अत्याचार है हम पर. सेवा करने का अधिकार और सेवक कहलाने का हक आप हमसे नहीं छीन सकती.
बिजली- और मेरे दिल का चैन -करार आप भी इस तरह नहीं लूट सकते. मेरे जिस्म को इस तरह प्यासा नहीं रख सकते.
केशव- आई लव यू बिजली, ऐसा न करो, ऐसा कुछ मत कहो कि मालिक और नौकर के बीच की दीवार ही गिर जाए. मालिक हो मालिक ही रहो.
बिजली- इस झूठी दीवार के गिरने से सबसे ज्यादा खुशी तो मुझे होगी , मैं नहीं चाहती कि हमारे बीच कोई बेमेल रिश्ता कायम हो.
केशव- आप हद से गुजर रही हैं.
बिजली- काश , मैं ऐसा कर पाति. प्यार में हद से गुजर पाती. क्योंकि इश्क का असली मजा तब तक नहींमिल सकता , जब तक कि आशिक और महबूबा हद से ना गुजर जाएँ , दीवाने न हो जाएँ.
और यकीन मानो , मैं आपकी दीवानी हो चुकी हूँ.
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