लवगुरु-१०२
-जानती हूँ, मगर यहाँ से आगे नहीं बढूंगा. हाथ से जों करना है कार्लो, मगर इससे कुछ नहीं करने दूंगी . जानती हूँ फिर गडबड हो जाती है. टीवी में बताते हैं कि इससे बीमारी भी हो जाती है.
-मैं बहुत आहिस्ता-आहिस्ता , बड़े प्यार से करूँगा, तुझे पता भी नहीं चलेगा. बस आगे -पीछे ही तो करना है.
- न बाबा न, और जों करना है करो , मगर यही तक सीमित रहो.
-सोचलो ऐसा मौक़ा कभी नहीं मिलेगा . हो सकता है तुम किसी और के साथ मजे लेती होंगी , इसलिए इनकार कर रही हो.
-नहीं, कभी नहीं लिया और लेना भी नहीं है. जब इतने में ही पूरा मजा मिल जाता है तो आगे कुछ क्यों करें ?
-तुमने कभी दो जिस्मों के मिलन का मजा चखा नहीं न , इसलिए इनकार कर रही हो. एक बार आनंद उठा लोगी तो सब भूल जाओगी.
-कई लोगों ने खूब जोर लगा लिए हैं. वे तो हजार दो हजार का लालच भी देते थे मगर मैं अपनी इज्जत का सौदा नहीं कर सकी. हाँ, ये बात अलग है कि जों मेरा शौक है , उसे पूरा कर लेती हूँ. मुझे मर्दों से कम और उनके इस अंग
से ज्यादा लगाव होता है, इसके लिए मैं पागल सी हो जाती हूँ, मुज पर दीवानगी सी छा जाती है. तुम्हें जब यहाँ देखा तो इसको देखने और चूमने की इच्छा मन में जाग्रत हो गयी. कल दिन में दिखा सकते हो इसे ?
-हाँ, -हाँ क्यों नहीं ? चाहो तो इस वक्त भी मैं सेवा करने के लिए तैयार हूँ. चलो घर के अंदर.
-नहीं यार, अब नहीं. बहुत गर्मी पद रही है, अब मजा नहीं आएगा. मैं चाहती हूँ कि दिन के उजाले में तसल्ली से आनंद लिया जाए .
-ये तो रही तुम्हारे आनंद की बात , अब ये तो बताओ कि अगर इस बीच मेरा दिल कुछ और करने को चाहने लगा तब क्या होगा ?तुम तो असली आनंद के लिए इनकार कर रही हो ?
-उसका इंतजाम है न मेरे पास, मैं सब कुछ संभाल लूंगी. उसके बिना ही ऐसा सुख दूंगी कि तुम्हें आगे किसी काम की इच्छा ही नहीं रहेगी.
-लेकिन एक सवाल ये भी तो हो सकता है कि जब तुम किसी की इच्छा को पूरा नहीं करतीं तो कोई क्यों तुम्हारी इस हसीन आरजू को पूरा करेगा ? किसीको किसी काम में मजा आता है तो किसीको को किसी और काम में .
यानि कि जों काम तुम बता रही हो, वह मुझे ज़रा भी पसंद नहीं है....
बिजली- अच्छा, समझ गयी , तुमने उस लड़की को फंसाने की कोशिश तो बहुत की मगर वह तुम्हारे झांसे में ही नहीं आई ? आई भी होगी तो तुम बता नहीं रहे हो. बीच में ही गोल कर जा रहे हो.
केशव- नहीं यार , तुम तो कम से कम ऐसा मत कहो. आखिरकार मैं आपकी दो परीक्षाओं में पास हो चुका हूँ और अपनी इस सफलता को हर बार, बार-बार दोहराना चाहूँगा.
बिजली- उसने तो वादा किया था न अगले दिन खेल खेलना का ? उसका क्या हुआ ?
केशव- अगले दिन तो वह गायब ही हो गयी. साले बड़ी तेज थी. गली में इधर-उधर निकलती तो ऐसे मुंह फेरकर निकल जाती थी जैसे कि मुझे जानती ही न हो. और दोपहर के बाद वह गाँव से चली गयी .
बिजली- ओह, बेचारी ... काश वह भी तुम्हारे इस खास हथियार का आनंद उठा पाती. लेकिन अच्छा ही हुआ, वरना वह तुम्हें छोड़ ही नहीं पाती. आखिर तुम तोप ही ऐसी हो.
केशव- अब तुम जों भी समझो. मैंने जों किया या कहा वह तुम्हें बता ही दिया है. दरअसल वह किसी दुसरे गाँव से आई थी. अगर रुकती तो शायद आगे का काम भी हो जाता.
बिजली- बहुत कामुक लड़की थी. बेहद चालाक भी. ऐसी लड़कियों की आदत ऐसे ही खराब हो जाती है. वह जिस घर में काम करती थी, उसका मालिक जरूर उसके साथ यौनाचार करता होगा.
केशव- बिलकुल, इतना तो वह खुद भी बता रही थी. आगे भी जरूर कुछ किया होगा.
बिजली- आज तो इस शराब का भी कुछ असर नहीं हो रहा है. कुछ अधूरापन भी महसूस हो रहा है.
केशव- शायद यह अधूरापन ब्लू फिल्म का है. अगर यहाँ पर कोई कामुक फिल्म लगादी जाए तो मजा आ जाए. तब यह खालीपन भी समाप्त हो जाएगा. सीडी प्लेयर यहाँ पर है ही, पेन ड्राइव मेरे पास में है. इसमें से जों अच्छी लगेउस फिल्म को
चालु लकर सकती हो/. एक से एक मस्त फिल्म है. एक तो ऐसी कामुक महिला की कहानी है जों अपनी शारीरिक प्यास को बुझाने के लिए पालतू जानवर का सहारा लेती है.
बिजली- मुझे लगता है कि ऐसा सब फिल्मों में हे संभव है. वरना इंसानों की क्या कमी है जों कोई महिला जानवरों का सहारा लेगी ?
केशव- कामवासना बहुत बुरी चीज है, जिसे इसका रोग लगा वह काम से गया. मैं मानता हूँ कि ऐसा भी हो सकता है.
बिजली- इतना यकीन के साथ तुम कैसे कह सकते हो ? तुमने कभी कुछ देखा है काया ?
केशव- एक नहीं कई बार. मैंने खुद अपनी आँखों से एक महिला को ऐसा करते हुए देखा है. अगर चाहो तो तुम्हें भी दिखा सकता हूँ. कामवासना की आग में झुलसा हुआ व्यक्ति एक तरह से अंधा हो जाता है
और वह किसी भी घटिया स्तर तक उतर सकता है.
No comments:
Post a Comment