शैली- ऐसा गज़ब ना करना , कभी किसी से प्यार ही ना करना... मैं हमेशा अपने लोगों को यही राय देती हूँ किकुछ भी करना यहाँ तक कि जरूरत पड़ने पर एक बार के लिए डकैती भी दाल लेना मगर प्यार का रोग ना पालना... यह रोग दीवाना बना देता है, कभी जीने नहीं देता....अरे मरने भी नहीं देता तो....तभी तो इसे कहते हैं -कमबख्त इश्क.............
दीपू- मैंने सुना है कि प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है... मुझे भी यही महसूस हो रहा है... बिल्कुल यही...
शैली- तुम तो शायराना मिजाज के होने लगे मेरी जान... मैं जान ही कहा करुँगी...मुझे अच्छा लगता है....
दीपू - तुम्हें हर बात कि परमीशन है, जो चाहो कहो, जो चाहे करो... अगर मेरे सौ खून भी कर देती हो तो गम नहीं...रही बात शायराना मिजाज की तो मैं भी छोटा -मोटा शायर ही हूँ... बाथरूम सिंगर भी... कभी फुर्सत हो तो बताना ऊंची आवाज में सुनाऊंगा... जगह बड़ी होनी चाहिए...
शैली- अरे वाह , बहुत खूब... अगर ये बात है तो किसी दिन तुमको अपने बंगले पर बुलाऊंगी...
दीपू- तुम्हारे पास बँगला भी है ? वाह- वाह ... लगता है तुम दौलत वाली दोस्त हो....
शैली - नहीं यार... कुछ ख़ास दौलत वाली नहीं... आजकल लोन पर हर चीज मिल जाती है... अभी इसमे काम चल रहा है... पूजा वाले दिन बुलाऊंगी तुमको... कोई भजन याद करके आना... सुनाऊंगा... लोगों को अच्छा लगेगा...
शैली- लोगों को लगे या न लगे मैं जरूर प्यार से सुनूंगी... ध्यान से सुनूंगी....
दीपू- वैसे यह तुम्हारा पर्सनल मामला है , औए मुझे इसमे दखलंदाजी नहीं देनी चाहिए फ़िर भी दिल में यह सवाल उठाता है की आखिरकार तुमने अब तक शादी क्यों नहीं की... जबकि तुम्हारे पास तो सब सुविधाएं मौजूद हैं...
शैली- शादी... हां -हां हां............कौन करेगा हमसे शादी? वैश्या से कोई शादी नहीं करना चाहता दीपू....लोग एक बार के लिए लंगडी-लूली ,कानी भिंडी को पसंद कर लेते हैं , शादी कर लेते हैं मगर जान्बूझते हुए हम जैसी काल गर्ल से कोई नहीं... हांलाकि जब शरीफ लोगों को हम जैसों की जरूरत पड़ती है तो हमारे तलवे चाटते हैं... प्यार का नाटक करते हैं, कसमे वादे करते हैं...हाँ कुछ लोग जो दिलचस्पी लेते भी हैं तो वे मेरी ही दलाली करके खाना चाहते हैं... वे जानते हैं की मेरे पास घर है, गाडी है , बेंक बैलेंस है , सभी सुविधाएं हैं... वे इस सबका फायदा उठाना चाहते हैं... मैं ऐसे लड़के से शादी करुँगी जो सिर्फ़ मुझसे प्यार करता हो , मेरे व्यक्तिगत विचारों से सहमत हो जिसे मेरी दौलत की नहीं मेरी तलब हो...जो मुझसे सच्चा प्यार करे... जिसकी ऐसी भावना हो की की कमाकर मुझे खिलायेगा, मैं जैसी भी हूँ वह मुझे इसी रूप में स्वीकार करे.... किसी शर्त के साथ नही ... कोई ये ना कहे की शादी के बाद तुम्हें यह काम छोड़ना पडेगा... मैं चाहूँ तो इस काम को करती रहूँ और चाहूँ तो छोड़ दूँ...
दीपू- तुमने कहीं तलाश किया क्या ऐसा लड़का ?
शैली - तो तुम करदो... तुम हो ना मेरे दोस्त ... अब तक मेरा अपना कोई ना था , सब लोग पराये थे... अब जबकि तुम अपने बन चुके हो क्या मैं अब भी ख़ुद ही ये काम करुँगी ?
दीपू- बगल में छोरा और गाँव में ढिंढोरा ? तुम्हारी आंखों के सामने लड़का है और तुम ना जाने कहाँ ढूंढ रही हो...
शैली- दीपू.... मेरे अच्छे दोस्त.... रहने दो इतने जज्बाती मत बनो... तुम अच्छे लड़के हो अपना जीवन बरबाद मत करो , यह जीवन भर का सौदा होता है... साल दो साल कटाने की बात नहीं है... मेरे दोस्त बनकर रहो , मुझे इसीमे बहुत खुशी है...
दीपू- पहले तो मुझे दीवाना बना दिया और अब दीवानगी ना करने की सलाह देती हो...
शैली- ये तुम्हारे क्षणिक जज्बात हैं, जब जोश ख़त्म होगा तो नशा उतर जाएगा... यथार्थ के धरातल पर जाकर गिरोगे तो सब इश्क भूल जाओगे....
दीपू- जब ओखली में सर दाल ही दिया तो मूसल से कैसे डरना ? अब जो चाहे हो... मैं तुमसे शादी करने के लिए तैयार हूँ... मैं तुम्हारी हर शर्त मानने के लिए तैयार हूँ....
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