दीपू- थकान की दूकान बंद करना तो मैं बखूबी जानता हूँ... इस तरह लेट जाओ मैं देखता हूँ की तुम्हारा बदन कैसे दर्द करता है.... मैं यहाँ मौजूद हूँ फ़िर भी अगर तुम्हें तकलीफ होगी तो मेरे रहने का क्या मतलब होता है ?
शैली- मसाज करना भी जानते हो क्या ?
दीपू- समझिये उस्ताद हूँ, मैंने विधिवत प्रशिक्षण भी लिया है , जैसी मसाज मैं कर दूंगा दूसरा कोई नहीं कर सकता... इसके लिए मुझे एक हर्बल तेल की जरूरत पड़ेगी मगर फ्रेश हो जाओगी... कमरे में चलते हैं, वेटर से तेल मंगवा लिया जाएगा... उसके बाद आनंद लेते हैं... ना तो आपको कोई जल्दी है और ना ही मुझे कुछ ख़ासजल्दी है...
शैली- मेरे ग्राहक पागल हो जायेंगे, कुछ लोग तो ऐसे हैं की दो दिन मुझसे दूर हुए तो परेशान हो जाते हैं,
दीपू- कोई बात नहीं है... उन्हें भी थोड़ा सा तरसने दीजिये, अगर वे तरसेंगे नहीं तो जुदाई के महत्त्व को नहीं समझ पायेंगे... सच तो ये भी है कि ये सब स्थितियां पैदा की जाती हैं...
शैली- तुम होशियार हो, हर बात मालूम है... लगता है पहुचे हुए फ़कीर हो , मेरे सामने ही बाल ब्रहमचारी बन्ने कि कोशिश कर रहे हो... मगर ये मत भूलना मैंने भी तुम जैसे कई लड़कों से सारे राज उगाल्वाये हैं...
दीपू- अगर कोई राज होता तो उसे तुम्हें सुनाकर गर्व कि अनुभूति करता ...मुझे तुम्हारा चैलेन्ज भी स्वीकार है , मगर मुझसे कुछ झूठ मत उगलवाना ... ऐसा न हो कि डर के मारे उन गुनाहों को भी कबूल कर बैठूं जो कि मैंने कभी किए ही नहीं... पुलिस स्टेशन में क्या होता है , यही ना... दहशत के मारे लोग उन आरोपों को भी कबूल कर लेते हैं जो उन्होंने किए ही नहीं.... जब पुलिस का आन मिलो सजना बदन पर पड़ता है तो फ़िर सब बातों के लिए हाँ होने लगती है... मैंने ख़ुद देखा है ऐसा होते हुए... पुलिस खुश... अपनी पीठ थपथपाती है कि उसने इतने केस हल कर लिए... मैं सच कह रहा हूँ ना...?
शैली- झूठ का सवाल ही कहाँ आता है , जब तुम कहोगे तो सच ही कहोगे... अब चलो कमरे में ही चलते हैं....
शैली का जिस्म गर्म हो रहा था , उसको संतुष्टि कि सख्त जरूरत महसूस हो रही थी लेकिन उसने आखिरकार दीपू कि बात मानली और होटल के कमरे में आ गयी... वेटर से कहकर हर्बल तेल भी मांगा लिया गया... दीपू ने शैली को जमीन पर नीचे लिटा लिया और उसके सारे कपड़े उतारकर उसकी मालिस करने लगा...शैली ने महसूस किया की उसके स्पर्श में गज़ब का आकर्षण था... वह आह भरके कहने लगी-
- तुम तो छलिया हो, धीरे -धीरे खुल रहे हो... मैं सब जानती हूँ... जादू है तुम्हारे हाथों में ,,, तुम्हारा हाथ लगते ही नीद जैसी आने लगी है... देखो न शरीर के साथ-साथ आत्मा को भी सुख मिल रहा है... यह सुखद एहसास ही प्यार है दीपू... मुझे प्यार हो गया है तुमसे...
दीपू- हाँ सच कहती हो , मैं भी यही महसूस करने लगा हूँ... तुम्हें हर वक्त खुश देखना चाहता हूँ... तुम्हें अपने करीब पाना चाहता हूँ... जब तुम किसी ग्राहक की बात करती हो तो मुझे ना जाने क्यों तुमसे जलन होने लगती है... ऐसा क्यों हो रहा है... ? यह प्यार नही तो और क्या है ?
Tuesday, May 26, 2009
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