Thursday, May 14, 2009

तड़प,भाग-33

दीपू- ऐसा बोला उसने ? उस राजेश ने जो तुमसे प्यार का दावा करता था ?
शैली- हाँ यार, मैं तो सन्न रह गयी थी... मैं समझ नहीं पाई की इस बात का मतलब क्या है , दरअसल मैं ठहरी गाँव की सीधी सादी लड़की ... मुझे दुनिया के दांव पेच का ज्ञान नहीं था ... मैं मोहब्बत पर कुर्बान होने वाली दीवानी थी... जब किचन में थी तभी राजेश का शहरी दोस्त रवि वहां आ धमका ... उसने पीछे से मुझे अपनी बांहों में कसकर कैद कर लिया और मेरे hoth को choom लिया ... कुछ kshan के लिए तो मैं सोच भी नहीं पाई की मुझे क्या करना chaahiye , मैं अभी विचार कर ही रही थी की तभी राजेश वहाँ आ धमका .... वह मुस्कराते हुए बोला-
-आखिरकार रवि को अपना हक़ छीनकर ही लेना पडा न... अगर तुम राजी से इससे प्यार कर लेतीं तो क्या बिगड़ जाता ।, मेरे ख़याल से तुम्हें शर्म या झिझक हो रही होगी... शहरों में यह सब सामान्य बात है... वहाँ तो एक दूसरे की प्रेमिकाओं को भी बदल लिया जाता है, सेक्स करने के बाद फ़िर सब सामान्य हो जाता है... जब तक जवानी है तब तक इसका रस लेना चाहिए, बुढापे में कोई किसी को नहीं पूछता ... तुम और हम चाहकर भी कोई मजा ने अहं ले पायेंगे, अरे शरीर के अंग भी काम करना छोड़ देते हैं... इसलिए मौज मस्ती जहाँ मिले , वहाँ प्यार से स्वीकार करो, खूब आनंद लो...
शैली- मैं आपकी प्रेमिका हूँ , किसी दूसरे को छूना भी मेरे लिए पाप है...
राजेश- बात बिल्कुल सही है, मैं मानता हूँ... स्वीकार है मुझे लेकिन दूसरे के साथ, और यह रवि कोई दूसरा नहीं है , हमारा अपना है... मेरे जिगर का टुकडा है ये... जो मेरा है वो तुम्हारा भी तो हुआ न , यह क्यों नहीं समझतीं....
शैली- ठीक है, मैं तो मूर्ख हूँ,, कुछ नहीं जानती... तुम खुश रहो ... मैं भी खुश हो ही जाउंगी... अब तो किस ले लिय्या अब तो यहाँ से हटो... मैं नाश्ता कैसे तैयार karungi ?
राजेश- ठीक है , जल्दी से नाश्ता तैयार karlo , फ़िर तो हवेली में आ जाना , वहाँ रंगमहल में हम तुम्हारा इन्तजार करेंगे...तुम्हारे समान में आज हमने स्पेसल बकरा बनवाया है , वहां पर रवि मिलेगा , रवि की प्रेमिका मिलेगी और मैं -तुम रहेंगे... हो सके तो आज किसी काम का बहान करदो, आज की रात हम साथ गुजारना चाहते हैं... समझ गयी न मेरी जान ...
शैली- ये क्या कह रहे हो , तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं आती, अपने दोस्त के सामने ऐसी गन्दी बात करते हो...
राजेश- ये तो कुछ भी नहीं है , ये मेरा दोस्त तो मेरी आंखों के सामने अपनी प्रेमिका के साथ प्रणय क्रीडा भी करता है, वो भी खूब मजे ले लेकर साथ देती है ...
शैली- अच्छा, ये सिर्फ़ सामने ही करते हैं, तुम्हें आमंत्रित नहीं करते ?
राजेश- कह चुके हैं कई बार ... इनको कोई आपत्ति नहीं है... इसकी प्रेमका तो मुझे अपने ऊपर खीचकर कहती है कई तुम दोनों एक साथ मेरे न्बदन की अगन बुझाओ , लेकिन तुम्हारा टेस्ट मुझे कैसे मिलेगा ... तुमने बिस्तर पर मुझे जो आनंद दिया है मेरे लिए वाही काफी है, मैं किसी दूसरी लड़की में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं रखता ... हाँ अगर तुम्हारी इच्छा हो तो मैं इनकार भी नहीं करूँगा...
शैली- नई नई लड़कियां तुम्हें ही आकर्षक लगती हैं मगर मुझे नए लड़कों का कोई शौक नहीं है... मैं तो तुहें ही बर्दाश्त नहीं कर पाती... तुम्हीं इतना सुख देते हो जितना की किसी शादीशुदा को भी नहीं मिलता होगा... जब मैं तुम्हें ही पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाती तो मेरी इच्छा कैसे होगी ...
राजेश- अभी तो तुम्हें कुछ सुख नहीं मिला , आगे देखो होता है क्या ?





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