मुझे अपने स्वाभिमान से भी उतना ही प्यार है जितना की तुमसे... एक बार तुम शादी के लिए हामी तो भरो बाकी सब जिम्मेदारियों मेरी हैं, सब देख लूँगा मैं... मोहब्बत में डूबा आदमी कुछ भी कर सकता है... किसी भी हद को पार कर सकता है... मैं पहले नहीं जानता था की मेरे साथ ऐसा जुल्म भी हो सकता है, मेरा ही दिल मुझसे ही बगावत कर रहा है... दिमाग भी साथ नहीं दे रहा... ना जाने यह कैसा प्यार है, इस प्यार ने जीना हराम कर डाला है ... अब ना जाने कैसे जिऊँगा ... तुम्हारे बिना जीने की कल्पना करना भी मुश्किल है...
शैली- ऐसा क्यों सोचते हो दीपू... तुम्हें मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत लड़की मिल जायेगी, जो तुमसे खूब प्यार करेगी, तुम्हारा ध्यान रखेगी ... उसके आने से तुम्हारा समाज में मान -सम्मान बढेगा,... आदर भाव रहेगा... जबकि मुझे रिश्ता जोड़ने पर सिवाय बदनामियों के तुम्हें कुछ नहीं मिल पायेगा... हर इंसान मजाक उडाएगा, जिसके घर में खाने को अनाज नहीं होगा और जिसके ख़िलाफ़ मुक़दमे चल रहे होंगे ऐसे लोग भी तुम्हें सुनाकर चलेंगे... जब तुम्हारे बच्चे होंगे तो उन्हें भी वैश्या की संतान कहकर बुलाया जाएगा...
दीपू- बस शैली ... अपने मुंह से ऐसी जली कटी बातें मत कहो... मेरे दिल को ठेस पहुचती है...
शैली- बाद की बातें बाद में करेंगे, अभी तुम बहके हुए हो .... शराब ने तुम्हारा मूड ख़राब कर दिया है... तभी तुम्हारी जुबान बहकने लगी है और तुम एक काल गर्ल को शादी का प्रस्ताव दे रहे हो... जब तुम्हारा नशा उतरेगा तब जाकर जान पाओगे की पीनी के बाद तुम क्या- क्या अनहोनी बातें कह गए....
दीपू- मेरी जुबान पत्थर की लकीर की तरह है, जो कह दिया सो कह दिया...
शैली-० मैं बिखरने लगी हूँ दीपू, मुझे संतुष्ट करो.... मेरे जिस्म की ज्वाला भड़कने लगी है...
दीपू- मैं भी कम बेचैन नहीं हूँ.... मैं अपनी बेताबी कैसे कहूं... तुम ख़ुद ही समझ जाओ...
shaili - फ़िर समस्या क्या है , मैं जिंदा हूँ, तुम्हारा भी आदेश है फ़िर आक्रमण शुरू कर दिया जाए...
दीपू जोश में तो था ही , उसकी बात सुनकर वह और भी गर्म हो गया... शैली मद मस्त थी, जाम पर जाम छलकाए जा रही थी, दीपू ने उसके बदन से सारे वस्त्र उतार रखे थे , आखिरकार उसने शैली
ऐ यौवन द्वार पर दस्तक देनी शुरू करदी , थोडी देर तक सहलाने के बाद वह उस संवेदनशील स्थान को चूमने लगा, शैली के शरीर में हलचल मचने लगी... उसने अपनी बाँहें ऊपर उठादीन और जोरदार अंगडाई लेने लगी... यह आमंत्रण था... दीपू समझ गया और उसके रसीले होठों का रसपान करने लगा... वासना का तूफ़ान जोर-जोर से उमड़ने लगा... शैली अपने होठों को मुक्त करते हुए बोली-
- आह....... यह क्या कर रहे हो ... अगर यही हाल रहा तो मेरे प्राण निकल जायेंगे.......
Friday, May 29, 2009
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