Sunday, May 24, 2009

तड़प, भाग-43

और इसके बाद डगमगाते हुए क़दमों से रोजी अपने पलंग पर चली गयी... यह काफी बड़ा कमरा था... इसमे दो पलंग बिछाए गए थे, हमारे गाँव में राजेश के खानदान के पास ही सबसे ज्यादा जायदाद थी, खेत थे और आलिशान महल थे... उनमें सभी सुख सुविधाएं मौजूद थीं.... राजेश के परिवार के लोग लड़ने झगड़ने में विश्वास नहीं रखते थे... बस उनकी एक ही कमजोरी थी- सेक्स... खूबसूरत महिलाओं के साथ सम्बन्ध बनाने में राजेश के भाई और चाचा सहित सभी आगे रहते थे... इसके बदले वे लोगों का हर तरह ध्यान भी रखते थे , यही कारण था की ज्यादातर महिलायें ख़ुद ही इस परिवार से सम्बन्ध बनाने के लिए आतुर रहती थीं...
दीपू- और तुम ? तुमने क्या सोचा था ?
शैली- मेरी सोच भी अन्य लोगों से अलग नहीं थी... मैं भी चाहती थी की राजेश मुझसे प्यार करे , मेरे साथ सम्बन्ध बनाए , मगर ये सम्बन्ध स्थायी होने चाहिए...सिर्फ़ एक रात भर के लिए मैं दुल्हन बन्ने के पक्ष में नहीं थी... लेकिन बचपन में मेरे साथ जो हादसा हुआ उससे मैं मर्दों से नफरत करने लगी थी... राजेश ने मेरी इस विचारधारा को बडी मुश्किल से चेंज किया था... यही कारण था की रवि ने जब राजेश की बुराई की तो मुझे बहुत बुरा लगा... मेरे लिए राजेश सब कुछ था... वह जितना ताकतवर था मेरे लिए वह कम नहीं था... मैं चाहता भी यही था की किसी तरह से वह मेरा दोस्त बना रहे और फ़िर किसी दिन हम दोनों हमेशा हमेशा के लिए विवाह के बंधन में बाँध जाएँ.... मेरा तो बस यही सपना था....
दीपू- लेकिन उसके विशेष एंड का छोटा होना या उसकी पावर कम होना तुम्हारे लिए कोई मायने नहीं रखता था ?
शैली- बिल्कुल नहीं... यह सामान्य बात थी, मेरे लिए इसका ज़रा भी महत्व नहीं था...
दीपू- मैंने तो सुना है की तुम लोगों को एक बार खाना नहीं मिले तो चल जाता है मगर मर्द मजबूत होना ही चाहिए... इस कहावत में कितना दम है ?
शैली- बात ये भी सच्ची है .... ऐसा ही सोचती हैं, ज्यादातर लड़कियां.... यहाँ तक की मैं भी... मगर राजेश के मामले में बात दूसरी थी... एक तो वह ज्यादा कमजोर नहीं था... हाँ उसके मुकाबले उसका दोस्त रवि बहुत मजबूत था... उसका ख़ास अंग भी दमदार था... इतना दमदार की उसने एक रात में ही मुझे एक साल का सुख दे दिया था... मगर राजेश के बारे में एक अन्य सच्चाई मैं जानती थी... राजेश के तीन भाई थे , वे तीनों ही मिलजुलकर एक दूसरे की पत्नी के साथ रात बिताया करते थे... उनका मानना था की घर का माल घर में ही रहना चाहिए... एक लड़की ने मुझे उसके भाई के विशेष अंग के बारे में बताया था... वह बहुत बड़ा रसिया था... किसी भी लड़की को छोड़ता नही था, उसके चंगुल में आने के बाद निकलना बेहद मुश्किल हो जाया करता था.... वह मेरी एक सहेली को नियमित बुलाया करता था , मैं समझ गयी की राजेश से शादी होने के बाद मुझे उसका स्वाद भी चखने को मिलता... इसीलिए मुझे राजेश से कोई ऐतराज नहीं था...

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