Tuesday, May 5, 2009
राजेश उसके सामने गिदगिदाने लगा था... उसकी आंखों में भी याचना के भाव थे... शैली उसका दयनीय चेहरा देक्खकर पिघल गयी... जी में आया की समर्पण करदे... अपना तन और मन राजेश के हवाले करदे... राजेश का खानदान आसपास के सौ गाँवों में सबसे असर रसूख और पैसे वाला था... उसके पुरखे राजा महाराजा थे... इसी कारण उनकी खूब इज्जत होती थी... अगर वे जबरदस्ती किसी को पकड़ भी लें यतो किसी की मजाल नहीं जो उनसे कुछ कह सके... बचपन में इसी खानदान के एक लड़के ने शैली की इज्जत लूटी थी, लेकिन यह बात अब पुराणी हो चुकी थी, जिस तरह हर बड़ी घटना के बाद छोटी घटना लोगों को याद नहीं रहती वही हाल शैली का भी हुआ था, शैली के साथ हुई बलात्कार की घटना को लोग भूल चुके थे... यहाँ तक की ख़ुद बलात्कारी भी अब तक न जाने कितनी अब्लावा की आबरू लूट चुका था... उसे भी अकेली शैली कैसे याद रहती... इस बड़े गाँव की जैसे हर चीक पर ठाकुरों का वर्चस्व था... राजेश का स्वभाव वैसे उन सबसे अलग था...
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