Saturday, May 16, 2009

तड़प, भाग-35

राजेश के दोस्त रवि की आंखों में वासना के भाव दिखाई देते थे , कम समय में ही वह उसके बारे में काफी कुछ अंदाजा लगा चुकी थी... उसने सोचा भी नहीं होगा की उसका होने वाला पति ही उसकी इज्जत को तार-तार करने का इंतजाम कर चुका था... शैली की मुश्किल यह थी की वह राजेश की किसी भी बात को गिरा नहीं सकती थी... उसने जो कह दिया सो कह दिया , उसकी हर बात उसके लिए मायने रखती थी, वह अपनी छवि एक आज्ञाकारी प्रेमिका की बनाना चाहती थी इसलिए उसने हवेली में जाना ही बेहतर समझा... थोडी देर के बाद ही उसके मम्मी -पापा भी वहाँ पहुच गए , शैली ने उनको खेत के बारे में शुभ सूचना दी और थोडा सा इशारा करने के बाद वह चली गयी... हवेली तक वह छिपते-छिपाते पहुची... हवेली के अन्दर सिर्फ़ तीन लोग ही मौजूद थे...राजेश, रवि और रवि की प्रेमिका ...रवि अपनी प्रेमिका रोजी को मुंबई से ही लेकर आया था, वह खुले विचारों की लड़की थी...जब शैली ने हवेली में प्रवेश किया तो रोजी, रवि और राजेश जाम छलका रहे थे... थोड़े से संकोच के बाद शैली ने गिलास हाथ में थाम लिया, चीयर्स की आवाज के साथ ही फ़िर पीने का दौर शुरू हो गया...
दीपू- तुमने गिलास हाथ में क्यों पकडा ? इनकार करना चाहिए था तुम्हें ?
शैली- हाँ, वाही तो नहीं कर पाई मैं , उसीका खामियाजा तो मैं अब तक भुगत रही हूँ... उन लोगों ने ऐ मुझे पीने की ऐसी लत डाली की अभी तक भुला नहीं पाई हूँ... अब यह शराब मेरे जीवन के लिए उतनी ही जरूरी बन चुकी है जितने की तुम...
दीपू- शुक्रिया शैली... इतना प्यार देने के लिए मैं अआभारी हूँ...
शैली - फोर्मेलिती मत करो दीपू... मैं कहाँ कर रही हूँ... तुम्हारे मुह पर तारीफ़ करने कामतलब यह नहीं होता की मैं चापलूसी कर रही हूँ... मुझे तो आदत है सच कहने की...
दीपू- ठीक है, मैं आगे की बातें सुनना चाहता हूँ,। अपनी शैली में ही बताइये...
शैली-बस मैंने शराब पीनी शुरू की और रवि ने मेरे हुस्न की तारीफ़ करते हुए कहा-
- तुम बेहद सुंदर हो, मैं चाहता हूँ की तुम मेरे साथ मुंबई चलो, मैं अपने मामा से कहकर तुम्हें एक्ट्रेस बनने की कोशिश करूँगा, हंगामा हो जाएगा... अच्छी- अच्छी एक्ट्रेस की छुट्टी कर डौगी तुम... तुम्हारी यह जवानी इतनी कातिल है की देखते ही दीवाना हो गया हूँ...ये तो शुक्र है की तुम अपनी ही दोस्त निकलीं वरना गज़ब हो जाता... जब तुम राजेश की मित्र हो तो मेरी भी मित्र हो...
राजेश- बिल्कुल सही है यार , तुम्हारा उअर क्या बँटा है... शैली को अपनी ही समझो...
शैली- मैं तो राजेश की गुलाम हूँ, राजेश अगर जान भी देने को कहे तो दे दूंगी... ज़रा भी टाइम ख़राब नहीं करुँगी...
रवि- अगर राजेश तुमसे मेरे साथ सोने को कहे तो इनकार तो नहीं करोगी ?
शैली- बिल्कुल नहीं करुँगी... ओह,, यह मुझे क्या हो रहा है ? क्या सवाल पूछ रहे हो तुम ? और मैं भी ये क्या जवाब दी जा रही हूँ , लगता है मुझे बहुत चढ़ गयी है....

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