तुम अगर कहोगी किजाओ , कुँए में कूद जाओ तो आदेश ख़त्म होने से पहले ही ख़ुद को ख़त्म कर लूँगा...
शैली- प्यार जिन्दगी देता है, लेता नहीं है... प्यार जीने कि राह दिखाता है... इसलिए शुभ -शुभ बोलो...
दीपू- शुभ मुहूर्त में अशुभ बातें तो तुम कर रही हो... तुमने ही हमको पागल बनाया और अब तुम ही हो कि मजाक उदा रही हो मेरी दीवानगी का... जानती हो मैं तुम्हें क्यों चाहता हूँ ?
शैली- हाँ, जानती हूँ ... बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ... आज से नहीं बहुत दिनों पहले से ही इस राज को जानती हूँ... यह सवाल भी पहली बार नहीं सुन रही हूँ ... फर्क ये है कि इस बार तुमने पहले ही सवाल कर दिया है...इससे पहले लोगों से मुझे सवाल करना पड़ता था... तब जो निचोड़ निकलकर सामने आता था वह चौकाने वाला होता था , लेकिन अब मैंने चौकना छोड़ दिया है, अब मुझे हंसी भी नहीं आती ... हर बात को सामान्य रूप में लेती हूँ...
दीपू- ठीक है , जब इतनी जानकारी दे ही दी है तो लगे हाथों बता ही दीजिये हम भी तो जाने कि हमारे विचार कितने मिलते हैं... और फ़िर थोड़े बहुत मिलते भी हैं या नहीं ?
शैली - सब लोग मुझसे प्यार जो करते हैं उसकी सिर्फ़ दो अहम् वजहें हैं - एक तो ये कि मैं गज़ब कि खूबसूरत हूँ और यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है... दूसरी अहम् वजह है मेरा करोरपति होना... अभी तक इससे तीसरी वजह कोई मेरे सामने नहीं आयी... अगर वो है तो कहो...
दीपू- वाह शैली , वाह... तुमने मुझे भी उसी तराजू में टोल दिया जिसमें सब एरों -गैरों ,नत्थू खैरों को तोलती हो... खैर, कोई नहीं... मेरा दिल तो इस बात से बहुत दुखा है मगर कोई बात नहीं ... तुम मेरी मोहब्बत हो और मैं तुम्हें सौ खून माफ़ करने तक का वादा दे चुका हूँ...
शैली- तुमने मेरी बात का बुरा मान लिया , अरे मजाक कर रही हूँ मैं... बोलो न तुम कुछ कह रहे थे...
दीपू- यही कि तुम्हारी सादगी और ईएमान्दारी के कारण मुझे तुम पर प्यार आया है... तुम्हारे पास बिल्कुल भी बनावट नहीं है... जो भी कहती हो सच कहती हो वरना कोई लड़की अपनी बीती हुयी जिन्दगी के नाजुक पलों का वर्णन नहीं करती... तुमने अपनी सच्ची बातें बताकर मेरा दिल मोह लिया है...
शैली- तुम सबसे हटकर हो दीपू... सबसे बेहतरीन हो... तुम्हारे विचार बहुत उत्तम हो... तुम दोस्ती करने लायक हो, भरोसा करने लायक हो और ऑफकोर्स , प्यार करने लायक हो...
दीपू- तो क्या मैं शादी करने लायक भी हूँ....?
शैली- अभी इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं है... यह हमारी अभी पहली मुलाक़ात है... जब हम दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह से जान जाएँ तब कोई फैसला लेंगे...
दीपू- मेरी तरफ़ से तो हाँ है, अब तुम करती रहना सोच विचार... शादी के बाद मैं तुम्हारे बंगले में नहीं अपने किराए के घर में रहूँगा... लेकिन दिन रात म्हणत करके जल्द ही तुम्हारे लिए प्यारा सा बँगला बनवा दूंगा... गाडी खरीद दूंगा और जीवन कि किसी भी सुख सुविधा का भाव नहीं रहने दूंगा...भले ही गरीब हूँ , मगर स्वाभिमानी भी हूँ...
Thursday, May 28, 2009
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