शैली- तुम्हारी बातों पर भरोसा करने को जी चाहता है वरना तो ऐसे मीठे- मीठे शब्द मर्द लोगों के सबसे बड़े हथियार होते हैं , हमारे गाँव का राजेश भी इसी तरह की प्यारी -प्यारी बातें किया करता था... जब उसने पहली बार मेरे जिस्म को हासिल किया तो मैं उसको पूजने की हद तक चाहने लगी थी, उसकी बेहद इज्जत करने लगी थी, वह ग़लत कहे या सही मैं उसकी हर बात को देव वाणी की तरह मानने लगी... एक रात वह मेरे घर आया , मेरे बूढे पिता की नजरों से भी यह बात छिप नहीं पायी थी, वे मेरे और राजेश के संबंधों के बारे में जानने लगे थे और शायद इसी कारण हमेशा सोच में डूबे रहते थे... जब राजेश घर आया तो पिता घर से बाहर निकल गए.... मेरी माँ सुबह से ही राजेश के खेतों में मजदूरी करने गयी हुई थी...राजेश अकेला नहीं था उसके साथ उसका एक शहर का दोस्त भी था... जब उसने मेरा परिचय karaayaa तो मैं बहुत खुश हुई ... मुझे लगा की राजेश अब सचमुच मुझे गहराई से चाहने लगा है, मैं अन्दर ही अन्दर खुश थी... राजेश का दोस्त रवि कहने लगा-
- यार राजेश तुमने प्रेमिका तो गज़ब की पाई है, अगर इसको शहर में लाया गया तो क़यामत हो जायेगी, इसको फ़िल्म स्टार बन्ने से कोई नहीं रोक सकता... यह तो धमाका है यार ... हमारी दोस्ती नहीं करवाएगा?
राजेश- ताना क्यों देता है, इसीलिए तो तुझे यहाँ लेकर आया हूँ, शैली , यह मेरा ख़ास दोस्त है... मैं और ये दोनों एक जिस्म दो जान हैं, हम एल दूसरे को अपनी सब बातें बताते हैं, मैंने तुम्हारे बारे में भी इसको सब कुछ बता दिया है... यह कहता है की तुम फ़िल्म स्टार बनने लायक हो, इसके साथ एक बार शहर चली जाओ, हो सकता है तुम्हारी किस्मत ही खुल जाए...
शैली- मेरी किस्मत तो आप हैं, और मुझे कुछ नहीं चाहिए ...
राजेश- ठीक है , ठीक है ,,,मगर कम से कम तुम मेरे दोस्त से हाथ तो मिला सकती हो....
शैली- मैं मिला चुकी हूँ... आपका ध्यान उस समय मेरी तरफ़ नहीं था...
रवि- तुम से अपना ध्यान कौन हटा सकता है, पटाखा हो तुम तो... हम इतनी दूर से तुम्हें देखने आए हैं, तुमसे मिलने आए हैं और तुम नखरे दिखा रही हो... मैंने सोचा था की तुम मोहब्बत से पेश आओगी मगर....?
राजेश- तू भी कमाल का इंसान है यार, अभी वक्त ही कितना हुआ है तुझे आए हुए , अभी ठीक से पहचान हुई है , साथ में उठेंगे बैठेंगे , दुःख सुख की बात करेंगे खाएँगे पियेंगे ऐश करेंगे ... सब ठीक हो जाएगा धीरे- धीरे... क्यों टेंशन लेते हो... अरे प्यार से बात करो , गिले शिकवे मत करो...
शैली- मैं आप लोगों के लिए नाश्ते का इंतजाम करती हूँ... अआप आराम से बैठिये,...
राजेश - मेरे यार रवि की बातों का बुरा मत माना ,, मेरे से छोटा है... इस लिहाज से तुमसे मजाक करने का इसका हक़ बनता है... इ९से इस हक़ से वंचित मत करो... मुह से बक-बक करता है लेकिन दिल का बड़ा साफ़ आदमी है... दोस्ती के लायक है ये... इससे दोस्ती करके कई लडकियां अपनी जिन्दगी बना चुकी हैं... इसका सगा मामा बहुत बड़ा फ़िल्म डायरेक्टर है , मुंबई में रहता है... यह कई लड़कियों की सिफारिश करके उनकी जिन्दगी खुश हाल बना चुका है, बहुत काम का आदमी है... जितना जमीन का ऊपर है उससे कई गुना जमीन के नीचे भी है...
रवि- चल छोड़ यार अगर ये हमसे दोस्ती नहीं करना चाहतीं तो जबरदस्ती करनी बेकार है...
राजेश-त०ऊ दिल छोटा कर रहा है क्या, मैं अभी शैली से कहता हूँ वह तुम्हें किस देकर अभी खुश कर देगी...
Wednesday, May 13, 2009
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