शैली-- अच्छा , क्या ये जवानी का नशा है, मगर पहले कभी तो यह नहीं चढ़ा ? आज इसे क्या हो गया ?
राजेश- होगा क्या यार , आज पर निकल आए हैं, जब तक सोने को किसी पारखी के पास न ले जाया जाए , तब तक उसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता... पता ही नहीं चलता की वह सोना है या पीतल ... इसी तरह से अगर जवानी के सही कद्रदान ना हों तब तक भी यह ज्ञान नहीं होता की जवानी की कीमत क्या है ?
रवि- ये त्तुमने सही बात कहदी... बिल्कुल सत्य बात... अब देखो न , अगर हम लोग शैली को नहीं मिलते तो ये कैसे जानतीं की ये हैं क्या ?
शैली- मुझे मजाक का विषय तो नहीं बना रहे हो ? आः, मेरे सर में चक्कर आ रहे हैं...
राजेश- ये लो... पकडो जाम , टकराओ और उड़ा जाओ... अभी ठीक से तुम्हारा गला तर नहीं हुआ है इसी कारण ये तकलीफें पेश आ रही हैं, इसके साथ अगर सिगरेट का काश लगाओगी तो आनंद बढ़ जाएगा...
शैली- मुझे तो इसके धुँए से ही अजीब सी परेशानी महसूस होती है, इसे कैसे पी सकती हूँ...
रवि- दूर से चीजें दूसरी तरह की लगती हैं, जब नजदीक आते हैं तब पता चलता है की वास्तब में वह है क्या ?
राजेश- हाँ, जैसे मेरे इस दोस्त को ही देखलो , एक बार अगर बिस्तर पर इसके साथ मजा लिया तो सब कुछ भूल जाओगी, यहाँ तक की मुझे भी... यह बिस्तर का बहुत बड़ा खिलाड़ी है... मुझे तो रोजी ने ये सब बताया है...
रोजी- हाँ, ये सच कह रहे हैं...इनकी बात में कोई बनावट नहीं है... मैं तो हफ्ते में एक बार जरूर रवि के साथ मस्ती करती हूँ, मगर महीने भर का मजा यह एक रात में ही दे देता है... एकदम जादूगर है ये...
शैली- हफ्ते में मजा क्यों लेती हो फ़िर, रोजाना क्यों नहीं ?
रोजी- क्योंकि मैं पढ़ती हूँ, वह भी पूना में और रवि रहता है मुंबई में , तो फ़िर रोजाना तो आ नहीं सकती...मेरी राय है की आज की रात कुछ समय के लिए तुम भी रवि के साथ सुख भोगकर देखो, तबियत खुश हो जायेगी तुम्हारी...
राजेश- मुझे तो कोई आपत्ति नहीं , मैं तो इसको खुश देखकर ही खुश हो लेता हूँ...
रवि-तुम तो राजी हो मगर शैली भी तो खुश होनी चाहिए...
रोजी- यह तो शैली के लिए गौरव की बात है जो इसका प्रेमी ही इसका इतना ध्यान रख रहा है ...इस बहाने मुझे भी आज की रात राजेश से प्यार करने का मौका मिल जाएगा...
रवि- बड़े शौक से... मुझे खुशी होगी, बल्कि मैं तो कहता हूँ की यहीं पर हम चारों मस्ती के समुन्दर में गोते लगायेंगे... जी भरके मजे लेंगे और फ़िर खूब आनंद एक दूसरे को देंगे...
शैली- ओह, तुम लोग ऐसी बात कैसे सोच सकते हो ? आज ना सही जीवन में फ़िर कभी राजेश मुझे इस बात का ताना जरूर देंगे...
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