Monday, May 25, 2009

तड़प, भाग-44

दीपू- इसका मतलब पहले से ही तुम जबरदस्त सेक्सी थीं ? हांलाकि तुम्हारे होठों का तिल ही बता रहा है कितुम अन्य लड़कियों से अलग हो , सुंदर भी और समझदार भी हो... ऐसा गज़ब का मेल हर जगह नहीं मिल पाता
शैली- मेरी जान ये क्या कह रहे हो , मेरी गलती इतनी सी है कि मैं जो भी कहती हूँ सच कहती हूँ, दिल से कहती हूँ... उसमें कुछ घटाया या बढाया नहीं जाता, इसी कारण लोग मेरे बारे में कुछ से कुछ राय बना लेते हैं... अगर मेरी जगह पर दूसरी कोई लड़की होती तो कहती कि उसे राजेश ने जबरन अपनी हवस का शिकार बनाया था, मैं ऐसी हूँ कि हर बात सच ही बाताउंगी,अगर मेरी गलती हुई तो उसे भी बयान करुँगी...
दीपू- ठीक है, अब आगे कहो .... इसके अलावा उअर क्या -क्या सोच रही थीं तुम?
शैली यही कि राजेश के तीन भी और हैं,, वे मानने वाले तो हैं नहीं ... अगर मैं राजेश कि दुल्हन बन्ने में कामयाब हो गयी तो अन्य तीन भी मेरे साथ सहवास किया करेंगे... मैं उन क्षणों कि कल्पना करके ही आनंद के सागर में गोते लगाने लगती थी जब बारी -बारी से राजेश और उनके तीनों भाई मेरे साथ सम्बन्ध बनाते ...
दीपू- तो क्या राजेश भी अपनी भाभी के साथ में सम्बन्ध बनाया करता था ?
शैली- मैंने भी पूछा था उससे... राजेश ने मुझे बताया था कि उसकी भाभी तो चाहती है, भाइयों को भी ऐतराज नहीं था मगर शर्म की वजह से उसने एक बार भी सम्बन्ध नहीं बनाया था... दो बड़ी भाभी तो उससे काफी बड़ी थीं इस कारण भी वह नहीं कर पाया... हाँ, उससे बड़े वाले की शादी होने वाली थी इसके लिए उसने पहले से ही योजना बना राखी थी की मौका मिला तो भाई से पहले वो ही सुहागरात मनायेगा... इससे किसी को भी आपत्ति नहीं थी...
दीपू- मैं पहली बार इस तरह की बात सुन रहा हूँ... मुझे यह बात बेहद अटपटी लग रही है... ऊंची दूकान और फीके पकवान वाली बात हुई ये तो ... कहाँ तुम बता रही हो की वह राजाशाही खानदान है.... और उनके बारे में ये सब कह रही हो... किस तरह लोग इस तरह की संस्कृति को अपना लेते हैं... इनसे अच्छी तो वो वेश्याएं भी हैं जो सरे आम अपना जिस्म बेचकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह तो करती हैं... वे किसी ढोंग को तो नहीं अपनातीं...
शैली- इतना भावुक होने की जरूरत नहीं है मेरी जान ... मौज लो मौज दो... क्या रखा है इन बातों में ?
दीपू- हाँ तुम ठीक कहती हो, इस तरह की बातें सुन सुनकर मूड ख़राब करना ठीक नहीं है.... अब मैं बेताबी की हद तक पहुच चुका हूँ, हमें छोटा सा ब्रेक लेना होगा... थोड़े से ब्रेक में ही सुख भोगना है, इसके बाद कुछ खाना है और फ़िर आराम करना है... सोने के बाद फ़िर प्रणय क्रीडा का आनंद भोगेंगे...
शैली- मेरा भी कुछ इसी तरह का ख़याल है... मैं भी यही चाहती हूँ.... शायद तुम थक गए होंगे.... मैं भी शराब के सहारे चल रही हूँ वरना थकान तो बहुत है...










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