Sunday, May 10, 2009

तड़प, भाग-29

जब जिस्म में ताकत होती है और जवान साथी पहलू में होता है तो जज्बात ख़ुद ही भड़कने लगते हैं...दीपू नया लड़का था, वह जिन्दगी में कुछ बनाना चाहता था , तरक्की करना चाहता था , नाम और दाम कमाना चाहता था यही कारण था की अभी तक उसने किसी लड़की से मोहब्बत नहीं की थी ... मोहब्बत के चक्कर में उलझ कर वह अपना समय बरबाद नहीं करना चाहता था...लेकिन जब शैली जैसा बम उससे लिपट ही गया तो फ़िर उसे अपना दामन बचाना भी भारी हो गया... उसे क्या पता था की इश्क वाकी इतना बुरा होता है, वह तो अब तक यही मानकर चल रहा था की जैसे आज कोई और कपड़ा पहनते हैं और कल कोई दूसरा कपड़ा पहन लेते हैं , इसी प्रकार प्रेमकी भी बदल देते होंगे ... उसे क्या पता था की यह प्यार तो इंसान को पागल बना देता है ... शैली से मिलते ही वह उसका

मुरीद बनकर रह गया था... दीपू को लगने लगा था की अब वह जिन्दा नहीं रह पायेगी, बिना शैली के अब उसको अपना जीवन निरर्थक लगने लगा था... यह कैसा परिवर्तन था , यह कौन सी शक्ति थी जो उसे उससे ही अलग करने पर तुली थी... वह शैली के बदन पर हाथ फिर रहा था, शैली आहें भर रही थी, काम वासना बढ़ाने वाले प्रसंग सुना रही थी, वह उसको ऐसे ऐसे संस्मरण सुनाती की दीपू का उत्साह कई गुना बढ़ जाया करता था , वह उस पर आक्रमण करने लगता , प्रहार और भी तेज करने लगता, शैली अपने पास कंडोम रखा करती थी और एक बार भी उसने सुरक्षा के सम्बन्ध नहीं बनाए थे... जब दीपू ज्यादा जोश में होता तो होश खोने जैसी बात करने लगता था ... कहने लगता-

-हटाओ इसे , इससे मजा नहीं आता... मैं बिना इसके ही ज्यादा आनंद का अनुभव करता हूँ...

शैली- अच्छा, भूल गए ऐड्स को, सारी शेखी राखी रह जायेगी... सारा आनंद ख़ाक में मिल जाएगा... इसका दुनिया में कहीं भी इलाज नहीं है, जानते हो इससे अच्छी तो मौत होती है... अगर किसीको यह बीमारी लग गयी तो पूरे वंश का नाश कर डालती है... इसलिए कभी भी असुरक्षित यौन सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए... क्या तुम्हें मालूम है की यह लाइलाज बीमारी है ?

दीपू- हाँ , पढा तो बहुत है , मगर साथ में यह भी पढा है की कंडोम बेचने वाली कम्पनियां बेवजह टूल पहुचाकर अपना प्रोडक्ट बेचना चाहती हैं,

शैली- एक बार को अगर इसे सच भी मान लिया जाए तो हर्ज भी क्या है , कौन सा लाख रुपये का खर्च आता है ? कहीं कहीं तो यह मुफ्त में भी मिल जाता है ?अगर जान है तो जहाँ है... लोग सोचते हैं की बुरी चीजें हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती, लेकिन यह विचार ग़लत है... हमको सावधान रहना चाहिए...एक पल का मजा मौत में बदल सकता है...

दीपू- तुमने तो मुझे भयभीत ही कर दिया , मेरा सारा नशा हिरन हो गया है...

शैली- मेरा , मकसद तुम्हें सचेत करना है, तुम मेरे सबसे प्यारे दोस्त है , अब तुम जहाँ भी रहोगे मैं तुम्हारी चिंता करती रहूंगी.... शायद प्यार इसीको कहते हैं...

दीपू- अब से मैं गर्व से कह सकता हूँ की इस शहर में मेरा अपना भी कोई है जो मेरी इतनी फ़िक्र करता है...मुझे चाहता है...

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