रमेश- मैं कुछ समझा नहीं... ये सेवायें तो आप किसी और से भी ले सकती थीं... इसके लिए आपने मुझे ही क्यों चुना ? जबकि मैंतो एक साधारण सा लड़का हूँ....
रागिनी - तुम मेरे लिए बहुत ख़ास हो... मेरी नज़र में आज तक ऐसा लड़का नहीं गुजरा...
रमेश- ये काम तो आप बहुत पहले भी कर सकती थीं... आपको सेवायें देने वाले और भी बहुत लोग मिल जाते , फ़िर इसके लिए मुझे ही क्यों चुना ?
रागिनी- उस समय को छोड़ दीजिये ... तब काफी बातें थीं... कई साल तक तो लगता रहा की अभी जरूरत ही नहीं है... फ़िर काफी दिनों तक पति की कमजोरी को भी छिपाती रही... दिल को मनाया शरीर नहीं माना... आखिरकार भूख तो भूख ही होती है... जिस्मानी भूख को कोई ऐसे ही कैसे शांत कर सकता है...
Saturday, November 22, 2008
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