Wednesday, November 12, 2008

रंगीला रतन -भाग -१६

वही रमेश आज प्रभा के कहने पर उसी शराब का आनंद उठा रहा था, जिससे वह बेहद नफरत किया करता था...
प्रभा खुश थी... इस उम्र में भी उसके यौवन उभार दिल में कसक पैदा कर रहे थे... अब तक उन दोनों के बीच बातें तो काफी खुलकर हुई थीं, मगर रमेश आगे बढ़ने से डर रहा था... वह चाता था की ख़ुद प्रभा ही पहल करे तो उसको कोई परेशानी न हो... रिस्क लेने से वह हमेशा से ही डरता था... प्रभा उसकी मजबूरी समझती थी... रमेश की प्रष्ठभूमि गाँव की थी... गाँव का होने के साथ-साथ वह संपन्न परिवार से भी ताल्लुक नहीं रखता था... प्रभा जान गयी की रमेश को इतनी जल्दी बिंदास नहीं बनाया जा सकता... वह उसके बिल्कुल करीब बैठ गयी ... उसके हाथ को अपने हाथ से दबाते हुए बोली-
- अब कहो, कैसा लग रहा है ? यह तरीका है लड़की फंसाने का ... जब पहली बार किसी से मिलना तो ऐसे लड़की के हाथ पर धीरे से दवाब बनाना...
रमेश- और इसके बाद ?
प्रभा- पहले इतना तो करके बताओ, जब यह सीख जाओगे तो आगे के बारे में बताउंगी...
अब रमेश का हौंसला बढ़ गया... उसने प्रभा के हाथ को अपने हाथ में थामकर धीरे से दबा दिया... फ़िर वह अपने दूसरे हाथ से सहलाने लगा... प्रभा को मजा आने लगा... रमेश बढ़ता ही जा रहा था... प्रभा की हिम्मत भी बढ़ने लगी... वह रमेश के गाल पर चिकोटी काटते हुए बोली-
- बहुत शैतान हो रमेश... खेले खाए खिलाडी हो और कहते हो की कुछ नहीं जानते... मैं जा रही हूँ... मुझे नींद आ रही है... तुम यहीं बैठकर प्रेक्टिस करो...
जब झूठी नाराजगी दिखाकर प्रभा वापस जाने लगी तो रमेश ने उसका हाथ खींचकर अपनी तरफ़ गिरा लिया... अब उन दोनों के दिल की धड़कने जोर-जोर से चल रहीं थीं... दोनों ने एक दूसरे की nigaahon me झाँककर देखा, वहाँ वासना की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी... रमेश ने उसकी आँख से आँख मिलाते हुए कहा-
- अब राह में छोड़कर जाना आसान नहीं है... मुझे पूरी शिक्षा देकर जाओ...
प्रभा- मुझे लगता है तुम पर शराब का नशा चढ़ गया है... नशे की हालत में तुम बहक गए हो...
रमेश- यहाँ तक तो ठीक है की मैं बहक रहा है लेकिन यह नशा शराब का नहीं तुम्हारी कमबख्त जवानी का है... १७ वर्ष की उम्र में ही जब तुम तीन दोस्तों के साथ आनंद उठा चुकी थीं तो फ़िर मुझे तरसाकर क्यों जा रही हो ?
प्रभा- बस इतना ही ठीक है , अब तुम किसी और लड़की को तलाश कर लेना... इस तरह सम्बन्ध बनाना अच्छी बात नहीं है... तुम्हारे और मेरे बीच काफी फासला है...
रमेश - विचारों में तो कोई फासला नहीं है... मुझे भी एक पार्टनर की चाहत है और तुम्हें भी एक मर्द की जरूरत महसूस हो रही होगी... क्योंकि तुम भी इंडिया में काफी दिनों से अपने पति से अलग रह रही हो...
प्रभा- फ़िर ये न कहना की किसी ने बहकाकर तुम्हें ये सब करवाया , साथ ही भविष्य में मेरे साथ सम्बन्ध बनाने से इनकार मत करना... मेरी एक आदत ये है की एक बार जो स्वाद मुह को लग गया तो फ़िर मैं उसको बार-बार दोहराती हूँ...
रमेश- मुझे मंजूर है... मैं हर समय सेवा के लिए तैयार रहूँगा...




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