- आह, बहुत अच्छा लग रहा है... मन के अन्दर ऐसी हिलोरें उठ रही हैं की बयान नहीं कर सकता...
रागिनी- तुमने मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल कर दिया है... देखो न अब मैं अजीब हालत में हूँ... वैसे यह कोई दुःख की नहीं सुख की निशानी है...
खुशी की अधिकता के कारण मेरा बुरा हाल है... इतनी सच्ची खुशी मुझे बहुत दिनों के बाद नसीब हुई है ... अब आएगा जिन्दगी जीने का मजा... तुम मिले हो तो एक बच्चे का ख्वाब भी पूरा होने की आश बंधी है... पूरी करोगे न ये आश ?
रमेश-लेकिन.... कैसे होगा ये सब ? मैं तो बहुत घबरा हूँ... मेरा दिल धड़क रहा है...
रागिनी- इसमें घबराने की क्या बात है ? मैं हर हाल में तुम्हारे साथ हूँ... तुम्हारे और मेरे सिवाय इस बात को कोई नहीं सुन रहा है... इसीलिए तो प्रभा भी अन्दर चली गयी है...
रमेश- तुम्हारी बातों से लगता है की प्रभा मैडम और तुम्हें पहले से ही मेरे बारे में जानकारी थी ?
रागिनी- हाँ, जिस दिन तुम आए , उसी दिन से तुम पर हमारी नज़र पड़ चुकी थी... तभी यह योजना बना ली गयी थी...
रमेश- बहुत तेज चैनल है ?
रागिनी - तेज बन्ना पड़ता है... अगर ऐसे नहीं बनेंगे तो फ़िर कैसे काम चलेगा ? हम लोगों के पास बहुत कुछ होकर भी कुछ नहीं है... कभी- कभी लगता है की हमारी स्थिति भिखारियों से भी बदतर है... तुम्हें किसी तरह की नेगेटिव बात सोचने की जरूरत नही है... जब तक मैं गर्भवती नहीं हो जाती , तब तक तुम्हें सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे साथ रहना , इसके बाद तुम आजाद हो, जहाँ चाहो जा सकते हो... इसके बदले में मैं तुम्हारा डॉक्टर बन्ने का सपना पूरा कर सकती हूँ... खर्च की सारी जिम्मेदारी मेरी होगी... जितनी भी परेशानियां आएँगी, उनको मैं बर्दाश्त करुँगी ...
रमेश- मुझे किसी तरह का कोई लालच नहीं है... प्रभा मैडम और जो भी आदेश देंगी, मुझे मंजूर है...
रागिनी ने उसको पूरी ताकत से अपनी तरफ़ खीच लिया... रमेश ने प्रहार करने की कोशिश तेज करदी ... अब वह तन से तो रागिनी के साथ था मगर मन से उलझन में फंस गया... उसकी परेशानी का कारण था , रागिनी का प्रस्ताव... मौज -मस्ती तक तो बात ठीक थी मगर यह सब बातें उसने कभी ख़्वाबों में नहीं सोचीं थीं... उसकी छठी ज्ञानेंद्री बार-बार उसको कुछ इशारा कर रही थी... उसको महसूस होने लगा था की जरूर वह कहीं न कहीं कुछ ग़लत करने जा रहा है...
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