Thursday, November 13, 2008

रंगीला , भाग-17

रवि ध्यान से रंजना की बातें सुन रहा था... उस रंजना की बातें, जो अचानक उसकी जिन्दगी में परी बनकर शामिल हुई थी... रंजना अपने साथ हुए धोखे की दास्तान सुना रही थी...रमेश नामक एक लड़के ने उसको मोहब्बत में ऐसी दगा दी थी की वह पूरी तरह टूट गयी थी... रवि उसकी दास्ताँ सुनकर दर्द को कुछ कम करने की कोशिश कर रहा था... रंजना भी उसको आपबीती सुनाकर कुछ रिलीफ महसूस कर रही थी... रवि ने बहुत देर के बाद कहा-
- वह नशे के कारण अपनी रंगरेलियों की बातें बता रहा था या फ़िर उसको तुम पर भरोसा हो गया था ?
रंजना- फिफ्टी-फिफ्टी दोनों ही बातें थीं... वह नशे में भी था और भरोसे में भी... उसने आगे कहा-
- प्रभा का जिस्म बेहद कातिल था... मैं उसके गदराये हुए बदन की तारीफ करते हुए बोला-
- वाह... इस कातिल जिस्म को देखते ही मुह में पानी आ जाता है... इसको अब तक कैसे संभालकर रखा है ? दूर से ही सही मगर चुपके-चुपके मैं कई खूबसूरत हसीनाओं के नग्न बदन देख चुका हूँ... एक दिन ब्लू फ़िल्म भी देखि थी, उसी आधार पर कह सकता हूँ... की यह शरीर बेमिसाल है... तुमने सचमुच उम्र को मात दे दी है...
प्रभा- समझ लो इसको तुम्हारे लिए ही संभालकर रखा है... नए-नए लोगों से सम्बन्ध बनाना मुझे अच्छा लगता है... बहुत सारे लोगों के साथ मैंने सम्बन्ध बनाए भी, लेकिन तुम सबसे दिलचस्प और अलग हो...
रमेश- अच्छा ये बात है... मैं तो इतने सलीके से बातें करना नहीं जानता... मुझे तो सीधी सरल बातें ही समझ में आती है... मैं तो इतना ही जानता हूँ की कब तुम्हारा आदेश मिले और मैं तुम्हारी सेवा कर सकूं...
प्रभा- बिना सेवा किए दुनिया में कभी मेवा नहीं मिलती...
रमेश उसका इशारा समझ गया था... वह प्रभा के nagn जिस्म का मर्दन करने लगा... थोडी ही देर के बाद उसने देखा की प्रभा आहें भरने लगी थी... कामोत्तेजना की आग ने उसके जिस्म को झुलसाना शुरू कर दिया था... वह उसके सीने की गोलाइयों को ऐसे रगड़ रहा था जैसे कोई बच्चा शैतानी करते हुए किसी खिलोने को मसलता है... प्रभा ने रमेश के संवेदन शील अंग से छेड़छाड़ करनी शुरू की तो वह आह भरने लगा ... प्रभा पूछ रही थी-
- कैसा लग रहा है रमेश ?
रमेश- बहुत आनंद आ रहा है... ऐसा सुख पहले कभी तो नहीं मिला... यह पहला अनुभव है...
प्रभा- सच तो यही है की मैंने भी कभी ऐसा गज़ब सुख नहीं भोग... तुम्हारे हाथों में जबरदस्त जादू है... तुम्हारा स्पर्श ऐसा है की जिसे सालों साल नहीं भुलाया जा सकता...
रमेश - यह तो अनोखी दुनिया है... पहले से मैं न जाने क्यों इससे वंचित रहा ... अब तो चाहे अमेरिका भी जाना पड़े मगर तुमसे अलग नहीं रह पाऊंगा...
प्रभा- मोहब्बत एक ऐसी आगा है , इसको जितना बुझाओगे यह उतनी ही भड़केगी...
रमेश- अब जो चाहे हो, मगर मुझसे दूर मत जाना ...
प्रभा- पागल मत बनो... मुझे तो हर हालत में जाना ही पड़ेगा...

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