-तुमने शराब तो खैर पिलादी है मगर दिल नहीं भरा ...
रमेश- यह शराब कहाँ थी ... यह तो...
रंजना- कोल्ड ड्रिंक में मिलाकर पिलाने शराब कोई अमृत तो नहीं बन जाती...
रमेश - ठीक है... यह अमृत न सही लेकिन अमृत से कम भी नहीं है...अगर यह नहीं होती तो तुम अपनी झिझक नहीं तोड़ पाती... और अगर इसी तरह लाजशर्म का प्रदर्शन होता रहता तो यह रंगीन माहोल कैसे तैयार कैसे होता ?
रंजना- तभी तो कहती हूँ की आनंद कुछ कम आ रहा है... या तो कोई काम करना नहीं चाहिए और अगर करना ही है तो जी भरके करना चाहिएतुमने जो पिलाई थी वह तो कबकी उतर गयी... और पैग तैयार करिए...
रमेश - तुमने मेरे दिल की बात कहदी ... मैं ख़ुद भी अभी यही कहने जा रहा था, झिझकता था की तुम झिड़क न दो... अब इशारा कर दिया है तो पटियाला पैग रेडी करता हूँ... शबाब के साथ अगर शराब न हो तो मज़ा नहीं आता...
रंजना- जीवन का हर आनंद , हर अनुभव प्राप्त कर चुके हो ?
रमेश - करना जरूरी होता है... जिन्दगी में जब तक लुत्फ़ नहीं आता तब तक की हर घाट का पानी न पीया जाए...
रंजना चुप हो गयी... रमेश पैग तैयार कर चुका था... दोनों ने अपने-अपने गिलास थाम लिए... रंजना एक ही बार में शराब पी गयी... रमेश ने भी उसका अनुसरण किया ... जब वे दोनों ही पीकर टट्टू हो गए तो रंजना ने पुछा-
- अब कहो, अब सुनूंगी... बिना पिए मूड ही नहीं बन जाता ... तुम सच कहते , यह वाकी अमृत जैसी है , मैं तो मानती हूँ की अमृत से भी बढ़कर है... अमृत सिर्फ़ जिन्दगी बक्श्ता है और शराब तो जिन्दगी में रंगीनियाँ घोलती है... इसे पीकर साहस सा पैदा हो जाता है... मन के अन्दर हिलोरे सी पैदा होने लगती हैं... सच कहूं तो जीने का मज़ा दोगुना हो जाता है... तुम शराब और शबाब के बारे में बात कर रहेथे ... मेरे साथ भी कुछ शेयर करो न...
रमेश- फ़िर कभी ... अभी तो मोहब्बत का आनंद लेने दो...
रंजना- मैं बुरा नहीं मानूंगी... बल्कि मोहब्बत का मज़ा और भी कई गुना बढ़ जायेगा...
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