रमेश बेहद चालाक था... नई- नई लड़कियों को अपने जाल में फंसकर उनका शोषण करना ही उसका मुख्या उद्देश्य था...उसने अपना यह तरीका कई बार आजमाया था... रमेश गरीब घर से था... गरीब होना कोई गुनाह नहीं होता, मगर गरीबी में ग़लत काम करने से इंसान का गुनाह बढ़ जाता है... रमेश भी ऐसे ही गुनाहगारों में से था... वह न जाने कितनी लड़कियों का शारीरिक शोषण करने में माहिर था ... वह न जाने कितनी लड़कियों का जीवन बरबाद कर चुका था... रंजना के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद वह उससे बोला-
- रंजना तुम्हारे साथ आनंद आया मैं निहाल हो गया... आज से पहले मैंने और भी कई लड़कियों के साथ रिश्ता बनाया था, मगर तुम सबसे अलग हो... तुम्हारे साथ मैंने जन्नत का मज़ा लिया है ... मैं बहुत खुश हूँ...
उसकी बात रंजना के कलेजे को चीरती चली गयी... रमेश रोजाना पीनी वाला तो था नहीं... वह तो रंजना को बहकाने के लिए पी रहा था... उसका मकसद काफी हद तक सफल भी हुआ था॥ रंजना मदहोश होकर उसकी बांहों में समा चुकी थी... उसको अपना सब कुछ समर्पण कर चुकी थी... रंजना चरोत्र्हीं तो थी नहीं, वह तो बड़े खानदान की लड़की थी... उसके माता -पिता अमीर इंसान थे... दोनों हो डॉक्टर थे... उनके पास अकूत धन दौलत थी... उसका यही कसूए था की ग़लत सोहबत में फंसकर वह आज्जाद ख्यालों की मलिका बन चुकी थी... जो उसके जी में आता था, वह वही करती थी... उसका विचार था की पुराने ख्याल, विचार और परम्पराएं अब प्रासंगिक नहीं हैं.... इसी कारण उसकी दोस्ती कई लड़कों के साथ थी... मगर प्यार वह सिर्फ़ रमेश से करती थी... रमेश का व्यक्तित्व बिल्कुल अलग था... भले ही वह गरीब था मगर देखने औए बातचीत करने में वह बदा माहिर था... यहाँ तक की बड़े-बड़े रईस भी उसके सामने भिखारी नज़र आते थे... यही एक वजह थी की अच्छे-अच्छे घर के दोस्तों को ठुकराकर उसने रमेश को अपना दोस्त चुना था... वह बेहद वाक्पटु था... उसकी बातों से शहद टपकता था... उसकी बातों में रंजना ऐसी आए की अपने खानदान की मान मर्यादा और प्रतिष्ठा को भुलाकर भी रमेश को भुला बठी... रमेश ने उसके बदन का स्व्वाद चखने के बाद भी जब केई लड़कियों का उदाहरण दिया तो रंजना भड़क उठी... कहने लगी-
- ओह, इसका मतलब तुम और और भी लड़कियों के साथ वही सब कर चुके हो जो तुमने मेरे साथ किया ?
रमेश- ये कौन सी बड़ी बात है ? तुम भी कौन सी सीता हो ? क्या तुमने कभी किसी लड़के से रोमांस नहीं किया ?
रंजना- रमेश, ये तुम क्या कह रहे हो ? मुझ पर इल्जाम लगा रहे हो ? मैं तुम्हारे सिवाय अपना जिस्म किसी और को कैसे सौप सकती हूँ ? तुम ये सोच भी कैसे सकते हो ?
राजना बिगड़ चुकी थी ... उसके माथे पर पसीना आ चुका था ... वह बेहद गुस्से में थ... रमेश भी कम कम उस्ताद नहीं था... उसने रंजना को फ़ौरन मना भी लिया... उसके होठों को चूमते हुए कहा-
- मैं तुम्हारी परिक्षा ले रहा था ... मैंने तुम्हारे सिवाय कभी किसी के बारे में कभी सोचा भी नही था... मैं तो यह देख रहा था की तुम मेरी बात पर क्या प्रतिक्रया देती हो...
अब आकर रंजना की जान में जान आई ... वह उसके सीने से लिपट गयी ... तन्हाई तो थी ही... रमेश और रंजना के सिवाय उस कमरे में कोई दूसरा नहीं था... कामोत्तेजना का तूफ़ान जोर मारने लगा ... रमेश का संवेदनशील अंग काले नाग की तरह दहाड़े मारने लगा था...
Sunday, November 9, 2008
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