Monday, August 30, 2010

मुंशीजी - वाह , तुरंत दान और महा कल्याण वाला फार्मूला अपना . कभी हमें भी मिलवाइए अपनी उस गुरु से जों इतने अच्छे आइडिया सुनाती है.
डोली- आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे आपका कोई गुरु न हो , मेरा मतलब काम गुरु से है . अगर नहीं भी हो तो अपना कुछ अनुभव सुनाइये न. आज की रात तो हमको कामुक बातों में ही गुजारनी है.
मुंशीजी -मेरे पास कुछ कहास बातें नहीं है सूना है कि आज की इस तेज रफ्तार जिंदगी में अगर पति-पत्नी दोनों कामकाजी हों तो एक-दूसरे के साथ बैठने और बातचीत के लिए भी समय निकालना मुश्किल हो जाता है। इसका सीधा असर पड़ता है उनकी सेक्स लाइफ पर। लंबे समय तक सेक्स के प्रति उदासीनता धीरे-धीरे वैवाहिक जीवन पर असर डालने लगती है। नतीजा होता है आपसी कड़वाहट और रिश्तों में तनाव।
कॉरपोरेट कल्चर के बीच काम करने वालों की रोजमर्रा की जिंदगी में इतनी जिम्मेदारियां और तनाव होते हैं कि बेडरूम तक पहुंचते-पहुंचते वे बिल्कुल निचुड़ चुके होते हैं। एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले विनय और उनकी साफ्टवेयर इंजीनियर पत्नी गौरी भी इसे स्वीकार करते हैं। गौरी कहती हैं: मैं महसूस करती हूं कि पहले की तरह अब हम सेक्स के लिए समय नहीं निकाल पाते। अक्सर युवा सोचते हैं कि थोड़ा सेटल हो जाएं उसके बाद से इस भागदौड़ भरी जिंदगी को थोड़ा कंट्रोल में लाएंगे।
हालांकि जानकारों का मानना है कि अक्सर लेट थर्टीज़ में स्थितियां सुधरने लगती हैं। दंपति शुरुआती जिंदगी के मुकाबले थोड़ा निश्चिंत हो जाते हैं। इसका उनकी सेक्स लाइफ पर सकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा महानगरों में रहने वाले दंपति अब पहले के मुकाबले ज्यादा जागरुक हो गए हैं। इंटरनेट, सेटेलाइट चैनल और समाज में सेक्स को लेकर आए खुलेपन ने उनकी सोच बदली है। खास तौर पर स्त्रियां यह स्वीकारने लगी हैं कि सेक्स जीवन का एक अहम हिस्सा है।
यह सच है कि तनाव और थकान का पति-पत्नी के यौन जीवन पर बुरा असर पड़ता है, मगर वहीं यह भी सच है कि सेक्स ही आपके जीवन में पैदा होने वाले दबावों और परेशानियों से जूझने का टॉनिक भी बनता है। हाल ही में हुए शोध तो यहां तक बताते हैं कि नियमित सेक्स रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ाता है। जो पति-पत्नी सप्ताह में तीन बार तक सेक्स संबंध बनाते हैं वे अपनी उम्र से कम दिखते हैं। यह सिरदर्द, संधिवात और संक्रामक रोगों से भी बचाता है।
सेक्सोलॉजिस्ट कहते हैं कि सेक्स करना जॉगिंग से कहीं बेहतर व्यायाम है। सेक्स के दौरान मस्तिष्क के कुछ बेहद खास हिस्सों में रक्त का संचार बढ़ता है। इससे मस्तिष्क शांत होता है और यह थकान और तनाव को खत्म करता है। इससे बदन में हाइड़्रोलिक्स केमिकल का संचार होता है और आपकी त्वचा में स्निग्धता आती है।
सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं सेक्स का असर आपसी रिश्तों पर भी पड़ता है। यह पति-पत्नी को एक-दूसरे के करीब लाने में भी मदद करता है। उनके पास आपस में एक-दूसरे से कहने लिए बहुत कुछ होता है। वे अपने-आप पर ध्यान देने लगते हैं। पहले के मुकाबले वे ज्यादा चुस्त और स्मार्ट नजर आते हैं। पति-पत्नी के बीच आपसी मधुरता का असर उनके सामाजिक रिश्तों पर भी पड़ता है। उनका चमकता चेहरा उनके जीवन की खुशहाली को दर्शाता है।
डोली- मेरे ख़याल से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए ऐसा सेक्स जरूरी है जिसे दोनों पार्टनर एंज्वाय करें। इसके लिए जरूरी है कि इसे एक मशीनी क्रिया में बदलने की बजाय दिलचस्प बनाने पर जोर दिया जाए। इसमें फोरप्ले और कल्पनाशीलता की अहम भूमिका होती है। दरअसल यही आपको तनाव से मुक्त करता है और एक-दूसरे के करीब लाता है। सेक्स के दौरान सिर्फ एक-दूसरे के अंगों को सहलाकर और चूमकर शिथिलता दूर की जा सकती है। आपस में मधुर बातें, ओरल सेक्स या हस्तमैथुन के जरिए रुटीन की सेक्स लाइफ को ज्यादा स्पाइसी बनाया जा सकता है। इसलिए व्यस्तता भरी जिंदगी में भी सेक्स से मुंह न मोड़ें यह आपके जीवन को ज्यादा ऊर्जा से भरा और स्वस्थ बनाता है. अब आप समझ गए होंगे कि मैं क्यों आपसे आपका अनुभव सुनाने की जिद कर रही थी. कुछ लोग शराब के नशे में आते हैं और कमरे में अपनी अकेली पत्नी या महिला पार्टनर को देखते ही उस पर भूखे भेडिये की तरह टूट पड़ते हैं. बेचारी पार्टनर विरोध नहीं कर पाती . मगर जब तक वह तैयार होती है तब तक तो उसका मर्द पुरुष अपना कम निकालने के बाद खर्राटे भर रहा होता है. वह बेचारी खून के आंसू रो रही होती है. उसके अरमान छलनी हो जाते हैं . जज्बात तड़प उठते हैं . वह अपने आपको छली हुई महसूस करती है . उसे लगता है जैसे वह मात्र एक उपभोग की वस्तु है . उसे सिर्फ भोग के रूप में इस्तेमाल किया जाता है . धीरे -धीरे उसका मन सेक्स से विमुख होने लगता है . अब आप पूछेंगे कि मुझे यह सब कैसे मालूम हैं , तो मेरा जवाब होगा कि सब कुछ गुरु से सीखा है .

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