Friday, August 13, 2010

लवगुरु भाग-७

जब वो उम्रदराज लड़की तुम्हारी छबीली से कहेगी कि तुम सुन्दर हो , ताकतवर हो और हर हाल में उसे सुख संतुष्टि दे सकते हो तब जाकर छबीली के मन में तुम्हारे लिए प्यार के अंकुर फूटेंगे . इधर तुम उसको प्रेम का पाठ पढाने के लिए तैयार रहना . पहले-पहले डायरेक्ट उसको नहीं, बल्कि उसके घर के किसी छोटे सदस्य को उपहार देना होगा. अगर घर का बच्चा पट गया तो समझो तुम्हारा आधा काम हो गया . उसीकी बदौलत उस घर में छाये रहोगे . इसके बाद जब भी मौक़ा पाओ, चौका जामा दो .
मुंशीजी- लेकिन डर इस बात का है कि यह होगा कैसे ?क्या जरूरी है कि छबीली किसी उम्रदराज महिला से खास सम्बन्ध रखती ही होगी ? और अगर ऐसा हुआ भी तो क्या जरूरी है कि वह महिला मेरे चंगुल में फंस ही जायेगी.?
लवगुरु- ये तुम्हारा जों नेगेटिव एटीट्यूट है न, यही तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन है. सबसे पहले इसे बदलो . पोजीटिव सोच रखो , ये सोचो कि क्यों नहीं होगा ? जब लवगुरु अपनी शिष्या का मन जीत सकते हैं. अपने से आधी उम्र की और बेंतिहाँ खूबसूरत लड़की को पटा सकते हैं तो यह काम आपके लिए क्यों असंभव है ? लीजिए गुरु का नाम और निकल पडिये . मेरा आशीर्वाद आपके सिर पर है . एक बात हमेशा ध्यान रखना, मैं तुम्हें जों टिप्स दे रहा हूँ ये सिर्फ प्रेम के लिए है. अगर इसमें आप वासना के लिए आते हैं तो इसमें आपकी कमी होगी , मेरी नहीं .मुझे ऐसा महसूस होता है कि प्रेम ही शाश्वत है. प्रेम ही सच है. मैं प्रेम का पुजारी हूँ , वासना का नहीं . जों लोग वासना के पुजारी होते हैं, मैं उनको अच्छा नहीं मानता . जानते हो क्यों ?
मुंशीजी - शायद आपने भी पहले किसी से प्रेम किया होगा, आपके मन में भी वासना की आग लगी होगी . किसी हसीना के साथ आपने उस आग को शेयर भी किया ही होगा ? क्योंकि यह कुदरत का नियम है और जों ऐसा नहीं कर पाता , उसे डॉक्टर असमान्य करार देते हैं. उसे इलाज की जरूरत होती है. वहीं से आपको बोध हुआ होगा .
लवगुरु- हाँ, कुछ हद तक यह सही भी है. कुछ हद तक नहीं भी .वो इसलिए कि मैंने लोगों को देखकर ही ज्यादा सीखा है. जों लोग कम क्रीडा करते हैं वे बाद में बहुत पछताते हैं. मैं भी पछताया , बहुत पछताया .लेकिन बताया था न कि इस बात को फिर कभी विस्तारपूर्वक समझाउंगा . अभी समय नहीं है. जब तुम सफलता की कहानी लेकर आओगे , तब मुंह मीठा कराउंगा. हो सके तो अगली बार अपने नई -नवेली सुन्दर पत्नी को भी साथ लेकर आना .
मुंशीजी- बिलकुल. मैं ऐसा ही करूँगा. काश आपकी वाणी सत्य निकले गुरूजी . आपके पास आकार मुझे बेहद संतुष्टि मिली है वरना दिल बड़ा बेकरार रहता था. हर समय छबीली की याद सताती रहती थी. जब आपने कहा है कि आपसे कुछ न छिपाऊं , हर बात खोलकर बताऊँ . तो मैं सब कुछ बयान करूँगा. दरअसल छबीली का जादू मेरे सिर पर ऐसे छाया था कि मैं दिन में उसके सपने देखता रहता था, उसके सीने की पुष्ट गोलाइयों को दबाता रहता था, ऐसा करके मुझे बहुत सुख की अनुभूति होती थी. मैं उसके होठों को चूमता रहता था , सपने में नहीं, दिन में , ख्यालों में . उसकी ऐसी दीवानगी है कि मैं रोजाना उसके साथ सफल शारीरिक सम्बन्ध बना लेती हूँ. बावजूद इसके कि उसका शरीर यहाँ नहीं है. मैं पूरा मजा भी ले लेता हूँ. इस रोग का निवारण भी चाहता हूँ. सोचता हूँ कि अगर वह मुझे नहीं मिल पाई तो शायद मेरी जान भी जा सकती है. कुछ भी हो सकता है . जैसे कि मैं पागल हो सकता हूँ . मुझे हार्ट अटैक हो सकता है.
लवगुरु- यह सब वहां है आपका. ऐसा कुछ नहीं होगा. तुम छबीली से प्रेम करोगे, शादी करोगे और उसे हासिल करके ही दम लोगे, ह्भारोसा है मुझे . पूरा भरोसा . दुनिया में हर काम होने के लिए ही होता है.













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