Friday, August 6, 2010

प्यार से प्यारा , भाग-अंतिम

झंकार- ये तो बस प्यार है आपका । वरना मेरी क्या औकात है । मुझसे हजारों गुना ज्यादा अच्छी लड़कियां हर गली में मौजूद हैं। अपनी-अपनी इच्छाओं और विचारों का फर्क होता है । कुछ ऐसी होती हैं जिनेहं अपनी जवानी पर बड़ा घमंड होता है , वे सोचती हैं कि न जाने इस जवानी का अचार डालेंगी । जों लड़के उन्हें चाहते हैं, उनसे प्यार करने के इच्छुक होते हैं , उन्हें वे भाव ही नहीं देतीं, और जों लोग बिलकुल फालतू होते हैं, जिन्हें किसीसे कोई मतलब नहीं होता, बस खाओ, खुजाओ , बत्ती बुझाओ वाले हिसाब -किताब के होते हैं, उनके साथ वे फ़ौरन रात बिताने को तैयार हो जाती हैं। मैं ऐसी नखरेबाज कई लड़कियों को जानती हूँ।
शुजात-मेरे ऑफिस में भी दो लड़किया कुछ-कुछ इसी तरह की हैं, अब वे किसीके साथ हमबिस्तर होती हैं कि नहीं, इस बात का तो पता नहीं मगर हाँ, मेरे सामने बहुत नखरा दिखाती हैं। एक दिन मैंने उसे ऑफर दिया तो साफ़ मना कर दिया । उनमे से एक का नाम कम्मो है और दुसरे का नाम है शिल्पा। पहले शिल्पा मेरे ऑफिस में जॉब पर थी , फिर उसने अपनी सहेली कम्मो के लिए रिक्वेस्ट किया तो मैं मान गया। उसे नौकरी पर रखवा दिया। शिल्पा बोलती है कि उसे मर्दों के साथ बिसतर पर समय बिताना बिलकुल अच्छा नहीं लगता बल्कि इसके विपरीत वह लड़कियों के साथ हमबिस्तर होना पसंद करती हैं। उसे वहीं से संतुष्टि मिलती है।
झंकार -ऐसी लड़कियां बहुत खतरनाक होती हैं, उनसे हमेशा बचकर रहना चाहिए । हो सकता है उसके साथ सामूहिक बलात्कार कि घटना घटी हो, इस कारण वह मर्दों से नफरत करने लगी हो, या फिर हो सकता है कि किसी मर्द ने उसके जिस्म का उपयोग तो किया हो लेकिन उसकी इच्छा के मुताबिक़ उसे रिटर्न न दिया हो, यानि कि वादाखिलाफी की हो और इसी कारण वह उससे नफरत करने लगी हो। दोनों ही स्थिति में उसने अवश्य ही शारीरिक सम्बन्ध बनाए होंगे और संभव है कि इस बीच उसने असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाए हों। इससे उन दोनों को ही गंभीर यौन बीमारियाँ हो सकती हैं। मेरा कहना मानो , ऐसी लड़कियों से दूर ही रहना । और अगर दिल मानता ही न हो और उनसे मौज मस्ती करनी ही है तो कंडोम जरूर यूज करना , वह भी सावधानीपूर्वक। क्योंकि कंडोम भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता है। उससे भी गलती होने , बीमारी होने की गुंजाइश बनी रहतीहैं।
शुजात अंदर से डर गया । वह हैरत में था। जिस बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था , झंकार उस बारे में सब कुछ डिटेल बता रही थी। शुजात ने तो बेचारे ने इस तरीके से कभी विचार भी नहीं किया था। वह तो समझता था कि उसे कोई यौन रोग हो ही नहीं सकता. हर आदमी अक्सर ऐसा सोचता है कि उसे कोई आपत्ति-या विपत्ति नहीं आएगी , मगर कुदरत का क़ानून तो सबके साथ सामान रूप से काम करता है. शुजात ठीक तरह से सोच नहीं पा रहा था इसलिए उसने जल्दी से निकलने का फैस्ला किया. झंकार और वे काफी देर से प्रणय क्रीडा कर रहे थे. शुजात ने अगले आधे घंटे में ही उससे विदा ली . घूमने का कार्यक्रम उसने अगली मुलाक़ात पर छोड़ दिया. झंकार को उसने दस हजार की गड्डी बख्शीश में दी. अगर वह नशे में होता तो शायद लाख-पचास हजार भी उड़ा देता. दोनों विदा हो चुके थे. अब वह सीधा अपने ऑफिस पहुंचा. उसने शिल्पा और कम्मो के साथ नाश्ता लिया. उसने कहा-
- मैं हैरत में हूँ कि आप लोग मेरा दोस्ती का ऑफर ठुकरा रही हो. मगर शिल्पा यदि तुम चाहो तो मैं कम्मो की तकदीर बदल सकता हूँ.
शिल्पा- वो कैसे ?
शुजात - मैं इससे शादी करने के लिए तैयार हूँ.
कम्मो- हरगिज नहीं , मैं जब तक जीऊँगी तब तक सिर्फ और सिर्फ शिल्पा के साथ ही रहूंगी . मैं किसी मर्द के साथ प्यार नहीं कर सकती , मर्द के प्यार से प्यारा तो हमारा यार है, हमारा याराना है. और मेरा यार यानि कि शिल्पा मेरे साथ है . मैं भी सदैव इसके साथ हूँ.
शुजात ऐसे याराने को देखता ही रह गया.
---समाप्त.....
कल से पढ़िए एक और शानदार धारावाहिक कहानी............

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