Thursday, August 19, 2010

लवगुरु , भाग-१३

मुंशीजी- आप बहुत अच्छे हैं, आपकी बातों में मिठास है . मेरे लिए आप खास हैं. आप गुरु भी हैं, दोस्त भी हैं और मार्गदर्शक भी .आज बहुत दिनों के बाद मुझे थोडा सा चैन नसीब हुआ है , वरना अब तक दिल बेकरार रहा करता था. सोचता रहता था कि इस जन्म में छबीली से मुलाक़ात हो भी पाएगी कि नहीं, मगर अब आशा बंधने लगी है.
लवगुरु- एक मन्त्र गाँठ बांध् लों . यहाँ पर कुछ भी असंभव नहीं है. कुछ भी . बस इंसान को ठीक तरह से काम करना आना चाहिए. कोशिश करनी चाहिए, शुरुआत होनी चाहिए . उसके बाद सफलता आपकी है. कुदरती तौर पर इंसान को इस तारक बनाया गया है कि वह सब कुछ हासिल कर सकता है. आसमां को झुका सकता है, जमीं को उठा सकता है . सच्चा प्रेमी चाहे तो अपने मिशन को हासिल कर सकता है . सिर्फ छबीली के प्रति प्रेम ही तुम्हारा आख़िरी और इकलौता प्रेम नहीं है . अगर तुम अपने बिजनेस को ऊंचाई तक पहुंचाना चाहते हो तो यह भी बहुत बड़ा प्यार है. मैं चाहता हूँ कि जितना प्रेम तुम छबीली से करते हो उतना ही खुद अपने आप से और ईश्वर भी करना.
मुंशीजी- मैं इस नसीहत को हमेशा याद रखूंगा. आज आपसे बहुत कुछ सीखने को मिला है . भागदौड भरी जिंदगी में न तो किसीको ऐसे समझने का मौका मिलता है और न ही किसी को समझाने का. जों कुछ हम सीखते हैं बस अपने-अपने प्रैक्टीकल से ही सीख लेते हैं , उसके अलावा सारा समय अपने काम में ही बीत जाता है . सच तो ये भी है कि आजकल आप जैसे दिव्य पुरुष भी कम ही हैं. विचारक रहे ही कहाँ है. जों हैं भी उन्होंने दूकान खोल ली है. इसको बिजनेस का रूप दे दिया है . अब विद्वान ब्रांड बनकर रह गए हैं. एक ऐसा ब्रांड जिसे सिर्फ दौलत से भुनाया जा सकता है . अगर वे लोग दवा निकालते हैं तो अपने स्वार्थ से, कैसेट बेचते हैं, अखबार, मैग्जीन भी बेचते हैं तो सबसे पहले आर्थिक फायदा देखते हैं . पटा नहीं क्या हो गया है ? कहाँ जा रहा है मेरा देश ? मेरे धन्य भाग्य जों आपसे भेंट हो गयी. अगर दर्शन नहीं होते तो पटा नहीं मैं क्या अनर्थ कर बैठता .
ये सब कहने के बाद रुके नहीं मुंशीजी , सीधे निकल गए . उन्होंने एक होटल में शानदार कमरा बुक करवा रखा था , पहले यह स्थान इतना मशहूर नहीं था , मगर जबसे लवगुरु का उदय हुआ , तबसे देश -विदेश के लोगों की भीड़ लगने लगी. इसी कारण होटल वालों ने भी मौके का फायदा उठाया और शानदार होटल बनते चले गए. अब तो होटल वालों ने दिल्ली और मुंबई की तरह कई सुविधाएँ भी देनी शुरू कर दी हैं. अब ग्राह्को के लिए हर तरह के इंतजाम किये जाते हैं . रातें रंगीन करने के लिए नई- नई लड़कियां रखी जाती हैं.जब मुंशीजी होटल पंहुचे तो उनसे भी लड़की के बारे में पूछा गया. वेटर ने बड़े अदब से कहा-
-साहब , हमारे यहाँ सब सुविधाएँ मौजूद हैं. कहिये हम आपकी क्या खास खिदमत कर सकते हैं ?
मुंशीजी- शुक्रिया. कुछ रहेगा तो बोलूंगा. आपके यहाँ बार कितने बजे तक खुलता है ?
वेटर - कोई चिंता नहीं साहब , जब तक चाहोगे , तब तक खुलेगा. हम किस काम आयेंगे ? पूरे सेवा की जायेगी . आप जैसे बड़े लोग यहाँ आकार रुकते हैं. कोई १६ साल की लड़की माँगता है तो कोई १८ सल की.हम सब इन्त्क्जाम करते हैं. टनाटन माल रखता हूँ साहब. कोलेज गर्ल, हाउस वाइफ से लेकर एअर होस्टेस , हीरोइन , मोडल सब मिलेंगी, और अगर देसी माल चाहिए तो क्या कहने ? आपके लिए भी यह सब हो सकता है साहब. हम ग्राहक को देवता समझते हैं . सिर्फ समझते ही नहीं, देवता समझकर उनकी सेवा भी करते हैं . कहिये तो कुछ फोटोग्राफ दिख्लादूं ? एक से एक मलूक है .
मुंशीजी- नहीं यार . शुक्रिया . मुझे लड़कियों के साथ रातें रंगीन करने का शौक नहीं है.
वेटर- क्या मजाक करते हैं साहब . लवगुरु से मिलने कोई आये और कहे कि रंगीन तबियत का नहीं है , कोई मान ही नहीं सकता. किसीको यकीं नहीं आएगा. क्सिको कुछ पटा नहीं चलता . सब कुछ सीक्रेट होता है . पुलिस के साथ पक्की सेटिंग होती है . सब कुछ ठीक ठाक हो तब आप फीस दीजिए , कोई दीकत नहीं है. मैं तो इसलिए कह रहा था कि आप न जाने कितनी दूर से यहाँ अकेले आए हैं. सोचिये ये तन्हाई आपको रात भर सोने नहीं देगी.












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