Sunday, August 8, 2010

लव गुरु , भाग-०२

मुंशीजी सोचने लगे कि किसी तरह से लवगुरु यानि मटुकनाथ चौधरी से मुलाक़ात की जाए। उसका जीवन धन्य होजाएगा , उसके मुरझाए हुए जीवन में फिर से बहार सकती है वह भी छबीली के मादक यौवन का रस चखसकता है। उसकी कातिल अदाओं ने उसका जीना हराम कर रखा था बदन ऐसे गदराया हुआ था मानो इलाहाबादीअमरुद पका हो। यौवन की चोटियाँ हिमालय पर्वत सी प्रतीत होती थीं, मुंशीजी लार टपकाकर रह जाते थे। उन्होंनेशिव पांडे नामक महापुरुष का नाम सुन रखा था। शिव पांडे पेशे से शिक्षक थे मगर उन्हें जीवन का हर पहलू काअच्छा ज्ञान था। सद्चरित्र थे मगर प्रेम संबंधी किसी भी समस्या का समाधान वे चुटकी बजाकर कर दिया करतेथे। वैसे उन्होंने बाहर की दुनिया में बहुत कम ही हाथ पाँव मारे थे मगर इसके बावजूद भी लोग उन्हें लवगुरु केखिताब से नवाजते थे। उनके बंगले में भारी भीड़ रहती थी। उनमे प्रेमी -प्रेमिकाएं की भरमार रहती थी। कोई प्रेमीअपनी रूठी हुई प्रेमिका को मनाने आता था तो कोई ऐसी भी थी जों पहले को छोडकर दुसरे को पकड़ने का नुस्खे भीसीखने आती थी। लवगुरु उर्फ शिव पांडे उन सबके सवालों को पूरे ध्यान से सुनते और उनका समाधान बताते बाद में फिर लोग उन्हें धनयवाद देने आते थे। दूर- दूर तक बात जंगल में आग की तरह फ़ैल गयी कि लव गुरु काबताया हुआ नुस्खा हर हालत में कामयाब होता है। कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसीने यह शिकायत की हो कि उनकेगुरु मन्त्र की वजह से उनका काम बिगाड़ा हो। मजे की बात ये कि इस नेक काम के लिए वे कोई फीस भी नहीं लेतेथे। धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति थे सो चंदे का एक पात्र रखना नहीं भूलते थे। अपनी श्रद्धानुसार उसमे लोग रुपये डालदिया करते थे। बिछड़े हुए लोगों को मिलाने में लवगुरु को असीम महारत हासिल थी। लड़की पटाने के भी अचूकमन्त्र रखते थे। जों कुछ था सब विज्ञान पर आधारित था, अनुभव पर आधारित था। पाखण्ड का नामोनिशान नहींथा। जब मुंशीजी ने ऐसे लवगुरु का नाम सुना तो मिलने के लिए बेताब हो
गए।उनकी हसरत जल्द ही पूरी हो गयी। आखिर लवगुरु से उम्नी मुलाक़ात हो ही गयी । उनकी बारी आने पर उन्होंने पूछा-
- क्या दिक्कत है मित्र , कुछ परेशान लगते हो ? क्या किसीसे प्रेम हो गया है ?
मुंशीजी- हाँ, महाशय ... प्रेम के रोग का शिकार हो गया हूँ। मैं लगभग पचास का हूँ, अभी वह कोरी कली ही है ।
लवगुरु- सचमुच प्रेम करते हो या फिर वासना के चक्कर में हो ? कहीं अपनी हवस की पूर्ती तो नहीं करना चाहते ?
मुंशीजी- अगर ऐसी कोई बात हो तो सुबह का सूरज न देख पाऊँ, ऐसे ही मर जाऊं। खडा -खडा ही।
लवगुरु- बैठ जाओ।
जिन्हें किसीसे प्रेम हो जाए तो अक्सर उनकी समझ नहीं आता कि वे ऐसा क्या करें जिससे उनके दिल का तार हमेशा जुड़ा रहे। प्यार फीका पड़ने के बजाय पल-पल निखरता जाए।

वे इसी उधेड़बुन में रहते हैं कि मुरझाए हुए प्रेम को तरोताजा करने के लिए वे क्या उपाय अपनाएँ। उन्हें लगता है वे कई ऐसी चीजें कर चुके हैं जिससे उन्हें बेहद खुशी मिली थी पर उसे दुहराना ठीक रहेगा या नहीं। अब उन्हें कौन समझाए कि जिस प्रकार प्यार का अहसास कभी पुराना नहीं होता उसी प्रकार उसमें ताजगी भरने की पुरानी कोशिश भी बेकार नहीं जाती। "आई लव यू" का जादू कभी पुराना नहीं होता।
सोए हुए प्यार को जगाने के लिए बारिश के मौसम का सहारा लें। यकीन मानें आसमान से बरसता अमृत आपको प्यार से सराबोर कर देगा। इस नुस्खे को आजमाएँ और आप पाएँगे कि आपके बीच का सारा मैल धुल गया है।
खासकर वे जोड़े जिनके रिश्ते को थोड़ा समय हो चुका है, उनके लिए ये बूँदें आकाश में बैठे देवताओं के आशीर्वाद के मोती हैं। जिन्हें पानी में भीगने से परहेज हो, वे किसी बालकनी से बारिश का रिमझिम गिरता पानी निहार सकते हैं। पेड़ों, फूलों, पत्तों, छतों से टपकता, तेज बहता पानी बहुत सुंदर दिखता है। उनका धुला हुआ भीगा रूप देखकर आपका मन भी भीग जाएगा। प्रकृति का यह नजारा मन को बहुत सुकून देता है.

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