लवगुरु , भाग-२० , आपने तो बताया कि आप बिजनैसमैन हैं, फिर पैसों की चिंता क्यों करते हो ? जीवन भर कमाते रहे हो . उस दौलत का क्या करोगे ? कभी कभी ऐसा
होता है कि लोग धन संग्रह करते-करते अपनी सारी उम्र गुजार देते हैं . उन्हें धन तो मिल जाता है मगर कभी शान्ति नहीं मिल पाती. सुख और संतुष्टि नहीं मिल पाती.
मैं ये बातें आपके बारे में नहीं कह रही हूँ. मगर अक्सर देखा और सुना गया है कि दौलत पर मरने वाले और सिर्फ दौलत के दीवाने लोग कभी हसीनों का प्यार नहीं प्राप्त
कर पाते, वे प्यासे आते हैं और दुनिया से प्यासे ही चले जाते हैं. अगर हो सके तो आप ऐसी स्थिति से बचियेगा क्योंकि ये जन्म बार -बार नहीं मिलता. अनमोल है ये जीवन .
मुंशीजी- मैं समझ गया , तुम्हारा इशारा मेरी तरफ है और मैंने बुरा नहीं मना. बात में दम है . मैंने जीवन भर सिर्फ धन संग्रह ही तो किया . मैंने रिश्तों -नातों और प्यार -
मोहब्बत को कभी तरजीह नहीं दी . मैंने अपनी जवानी के महत्वपूर्ण पल ऐसे ही बेकार कर दिए . जीने के लिए सांस लेना जितना जरूरी है, दौलत जरूरी है , इश्क भी इससे
कुछ कम अहमियत नहीं रखता. अब याद आते हैं वे पल जब कई लड़कियों ने मेरे समक्ष प्रेम प्रस्ताव रखे मगर उस समय मैंने उनको रिजेक्ट कर दिया , क्योंकि उस वक्त
मैं पढ़ना चाहता था, मेरा ख्याल था कि पढ़ने-लिखने की उम्र में प्यार -मोहब्बत की बातें करना गुनाह है. इससे ध्यान भटक जाएगा . पढाई पूरी करने के बाद कैरियर के बारे
में सोचने लगा, प्यार मोहब्बत को मैंने उस वक्त भी वर्जित समझा , क्योंकि मुझे अपना ध्यान भटकने का डर था. एक जगह सरकारी महकमे में नौकरी भी मिल गयी , मगर जल्दी
ही उससे दिल ऊब गया, ज्यादा दौलत कमाने के लिए व्यापार शुरू किया . फ्री उसमे रम गया. किसी और चीज के लिए समय ही नहीं बचा . और जब होश आया को सब कुछ लुट चूका था
मेरी उम्र ५० को छूने लगी है. लड़किया इस उम्र को ढली हुई मानती हैं और सोचती हैं कि इस उम्र का व्यक्ति जिस्म को सुख संतुष्टि नहीं दे सकता .
डोली- ओह सोरी . मेरा मतलब आपका दिल दुखाना नहीं था . मैं तो बस ऐसे ही कह रही थी. लोगों से सुनी हुई बातें. काहिर, उनकी छोडिये , मैं नहीं मानती कि आपकी उम्र का व्यक्ति
मुझे सुख संतुष्टि नहीं दे पायेगा. मेरी मा कहती है कि अगर खाने को मिले तो मर्द और बर्ध कभी बूढ़े नहीं होते. बर्ध समझती हो ? बैल को कहते हैं .
मुंशीजी- अब मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता. एक बार बड़ी मुश्किल से मिली हो , मैं नहीं चाहता कि अब देर हो जाए . अगर सचमुच तुम्हें ऐतराज नहीं है तो यहाँ के जिम्मेदार
प्रतिनिधि से बात कराइए , मैं तुम्हें प्पूरे साल भर के लिए बुक करके अपने साथ ले जाना चाहता हूँ . इस शर्त के साथ कि आगे से वे लोग तुम्हें परेशान नहीं करेंगे .
आजाद हो जाओगी तुम . अपनी मर्जी की मालिक . जों जी में आये करना. मैं अगर अच्छा नहीं लागूं तो तुम अपना रास्ता चुनने के लिए स्वतंत्र रहोगी .
मुंशीजी भावुकता में न जाने क्या-क्या कहते चले जा रहे थे और डोली सोच रही थी कि उसका बड़े खतरनाक आशिक से पाला पड़ा है . फिर भी हालात उसके ही
पक्ष में थे वह प्लान बनाने लगी कि अगर मुंशीजी उसे एक साल के लिए बुक कर लेते हैं तो उनकी करोड़ों की प्रोपर्टी को हड़पने के लिए उसे इससे ज्यादा वक्त नहीं मिलेगा
इस दौरान वह अपने मंहगे और पक्के कस्टमर्स का इंटरटेन भी कर सकती है . उसकी सोच का सिलसिला उस समय टूटा जब मुंशीजी ने उसे झकझोर कर कहा-
-अचानक कहाँ गुम हो गयीं मेरी जान ?
डोली- जस्ट आपके बारे में ही सोच रही थी. कितने बहले इंसान हैं आप . कितना चाहने लगे हैं मुझे मैं इस प्यार को संभाल पाउंगी कि नहीं.
मुंशीजी- ओह , डोली . तुम्हारी ये गोलाईयां कितनी मनमोहक हैं. ये चिकनी जांघें आज रात भर सोने नहीं देंगी. थोड़ा और करीब आओ न.
डोली- इस बदन के हर हिस्से पर तुम्हारा अधिकार है और हमेशा तुम्हारा ही रहेगा . जब तक जान रहेगी , तब तक .
मुंशीजी- मेरे तो जैसे नसीब खुल गए हैं . यह मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ. आज मैं लवगुरु से मिला था. उन्होंने प्यार करने , किस करने और सेक्स करने के कई टिप्स सिखाये हैं
आज मैं इन सबको तुम पर प्रयोग करने वाला हूँ.
डोली- आप मिले उनसे ? मेरी भी बड़ी इच्छा है दर्शन करने की. क्या उन्होंने कंदम के बारे में नहीं बताया , मैंने सुना है वे हर व्यक्ति को सलाह देते हैं कि सेक्स करते समय
कंडोम का इस्तेमाल जरूर करें. कंडोम भी अच्छी कंपनी का हो, क्योंकि उसके फटने का डर रहता है.
मुंशीजी- अरे वाह, तुम्हें कैसे मालूम ?
डोली- आपने यहाँ की हर दीवार पर उनके पोस्टर नहीं देखे . सब पर यह सलाह लिखी होती है .
मुंशीजी मुस्कराते हुए डोली की चिकनी जाँघों को चूमने लगे. डोली भी गर्म हो चुकी थी. वह अपने प्यासे होठों से मुंशीजी के खास अंग को चूमने लगी.
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