Wednesday, April 8, 2009

rangeela रतन , भाग -८ april , shivaji paark

अब चौकने की बारी रंजना की थी... वह उसके साथ बिस्तर पर थी और विनीत उसके साथ मौजूद नहीं था .... उसके ख़याल में आना की वो सारी बातें आने लगीं जब वह उससे पहली बार मिला था..अना के सर पर उसका जादू चढ़कर बोलने लगा है, तभी तो वह कह रहा था-- मेरी इतनी तारीफ़ भीं मत करो की मेरा दिमाग ही ख़राब हो जाए, मैं तो तुम्हारा सेवक हूँ...अना - तुम क्या जानो ,कौन हो तुम .... हकीकत मैं जानती हूँ... तुम मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हो ... अगर आज के बाद तुम मेरे जीने का मकसद बन जाओ तो भी अतिशियोक्ति नहीं होगी...विनीत - तुम मेरे दिल में समा चुकी हो, मेरी अपनी बन चुकी हो, तुम्हारे जाने के बाद इस खालीपन को कौन भरेगा ? मैं तो यही सोच-सोचकर परेशान हो रहा हूँ... कोई राह नहीं सूझती...अना- तुम उसकी फ़िक्र मत करो, मेरे पास उसका जुगाड़ मौजूद है... मैं ऐसे कई लोगों को जानती हूँ जो तुम्हें जिगोलो बन्ने में मदद कर सकते हैं... इससे तुम्हें मेरी याद भी नहीं आएगी और तुम्हारी आर्थिक स्थिति भी ठीक हो जायेगी...विनीत- जिगोलो बनने के लिए मुझे क्या-क्या करना होगा ?अना- कुछ खास नहीं, बिस्तर पर औरतों को संतुष्ट करना होगा... जब वे खुश होंगी तो तुम्हें दोबारा बुलाएंगी, वे तुम्हारी सिफारिश किसी और से भी कर सकती हैं... जब तुम फेमस हो जाओगे तो अपने मन माफिक पैसे ले सकते हो... मैं अनुभव के आधार पर यह कह सकती हूँ की तुम एक रात भी खाली नहीं रह सकते... खूब दाम कमाओगे...मालामाल हो जाओगे... तुम्हारा जीवन बदल जायेगा... बस एक बात याद रखना ...विनीत- तुम्हारी हर बात दिलचस्प है, मजा रहा है... कहिये , क्या बात याद रखनी है...अना- जिसके साथ भी सेक्स करो, असुरक्षित सम्बन्ध मत बनाना... तुम्हारी सिर्फ़ एक ही भूल तुम्हारे खुशियों के इस स्वर्ग को नर्क बनाने के लिए काफी है.... तुमने एड्स के बारे में अपनी जो मंशा व्यक्त की थी वह बिल्कुल ठीक थी...यह रोग का नहीं, साक्षात मौत का दूसरा नाम है... इसके अलावा और भी ऐसे कई यौन रोग हैं जो असुरक्षित यौन संबंधों के कारण हो जाते हैं... इन रोगों के होने पर पछतावे के अलावा ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता... इंसान जीता है मगर जीने का मजा खराब हो जाता है... सब कुछ बेकार हो जाता है...विनीत- शुक्रिया दोस्त, अच्छा किया जो तुमने मुझे ये सब बता दिया... अब मैं एक बार के लिए खाना छोड़ सकता हूँ मगर इन चीजों को नही भुला सकता हूँ... मुझे जिगोलो भी नहीं बनना ... सड़कों पर सोना और भूखा रहना मंजूर है लेकिन इन लाफ्सों में पड़ना बिल्कुल मंजूर नहीं है...अना- ठीक है, आगे तुम्हारी इच्छा है... हर आदमी अपने जीवन को अपने तरीके से जीने के लिए स्वतंत्र है...विनीत- क्या तुम भी जिगोलो की सेवायें लेती रही हो ?अना- हाँ , मैं यहाँ पर भारतीय मर्दों के साथ हमबिस्तर होने के मकसद से ही आती हूँ, ऐसा करने से बहुत सुख मिलता है मुझे, आत्मिक शान्ति भी मिलती है...विनीत- अगर कोई मर्द रात को जबरन करने लगे , वह एड्स का मरीज हो और बिना सुरक्षा ही वह तुम पर टूट पड़े तो क्या करोगी ?
और फ़िर रंजना को गुस्सा आ गया ... उसने कहा-
- लगता है इस वक्त भी अना के विचारों में गम हो , तुम सब मर्द एक जैसे ही होते हैं... मैं जानती हूँ...

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