- जो महिलायें तुम्हें मनमर्जी फीस देती थीं वे ग़लत नहीं थीं... तुम्हारे पास एक ऐसा खजाना मौजूद है जिससे कोई भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता...मैं आज खुश हूँ, बेहद खुश... अब ज़रा बताओ अना को जब तुमने पहली बार सुख दिया तो उसकी फीलिंग्स क्या थीं ?क्या वह भी खुशी के मारे उछल पड़ी थी ?
विनीत-हाँ , बहुत खुश थी अना... उसकी खुशी का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है की वह मुझे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी... उसने काफी देर तक अपने आपसे ही लिपटाए रखा ...वह मेरे अंग -प्रत्यंग को चूम रही थी... मैं उत्तेजित होने लगा... मेरी भावनाएं फ़िर से भड़कने लगीं... वह मेरे सीने को सहला रही थी... मैं उसके होठों का रस चूमने लगा... वह कह रही थी-
- तुम जबर्दस्त खिलाड़ी हो, तुम्हारा कोई जवाब नहीं है... मेरी कई परिचित इस देश में घूमने के लिए आती रहती हैं, घूमना या कोई काम तो महज बहाना होता है, उनका असली मकसद होता है अपनी जिस्मानी भूख को शांत करना... जो हमारे देश में सम्भव नहीं होता, यहाँ के लोग बहुत गर्म होते हैं... तुम लोगों को वह विशेष कला आती है जिससे बिस्तर पर औरतों को पूरी संतुष्टि दी जा सके...
विनीत- मैं तो एक मामूली इंसान हूँ, मुझे खुशी है जिससे आपको कुछ सुख और शान्ति दे पाया...
अना- यह विनम्रता ही तुम्हारा असली हथियार है, इतना करके भी त्तुम इतने नम्र क्यों हो, तुम्हें तो घमंडी होना चाहिए, अपनी शक्ति पर इतराना चाहिए , मगर तुम ऐसा नहीं करते इसीलिए महान हो, तुम्हारी यही खासियत तुम्हें औरों से अलग करती है... मैं तुम्हें इतना काम दिलवाउंगी की तुम खूब अमीर बन जाओगे... तुम्हारा सानिध्य पा-पाकर मेरी सहेलियां भी जनात जैसा सुख उठा सकेंगी...
विनीत- अगर हमारे देश के लोग तुम्हें इतने ही पसंद हैं तो फ़िर यहाँ के किसी जवान मर्द के साथ शादी क्यों नहीं कर लेतीं, हमेशा के लिए टेंशन ख़त्म हो जायेगी... पैसे भी खर्च नहीं होंगे...
अना - यह तुम्हारा सोचना है, मेरा मानना है की ऐसा करने से हम और भी मुसीबतों में फंस जाते हैं... कोई -कोई इतना बदमाश निकलता है की वह ब्लेकमेल भी करने लगता है...
विनीत- ओह, क्या तुम्हारे साथ भी कोई ऐसी अनहोनी घटना हुई है ?
अना- कभी नहीं... मैंने किसी का क्या बुरा किया है जो मेरे साथ ऐसा होता, हाँ मेरी एक सहेली को इसका खतरनाक अनुभव जरूर हुआ है... वह ब्राजील की रहने वाली थी, उसका वहाँ पर अच्छा खासा व्यापार था, एक सड़क हादसे के दौरान उसके पति की मौत हुई तो जिस्मानी सुख पाने के लिए इंडिया आ जाया करती थी... यहाँ वह जिगोलो की मदद से संतुष्टि प्राप्त करके चली जाया करती थी... उसने सोचा की इतना खर्च करने से बेहतर है की किसी लड़के से दोस्ती कर ली जाए , ऐसा करने से उसके रुपये बच जायेंगे, दो साल पहले जब वह आगरा में ठहरी तो उसने एक गाइड से दोस्ती करली....
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