Tuesday, April 14, 2009

तड़प , भाग-5

वह थी ही गज़ब की चीज... उसे देखकर किसी भी नौजवान के मुह में पानी आ सकता था... शराब पीकर तो वह और भी मद मस्त हो गयी थी... शैली की गरम जवानी दीपू को रोमांचित कर रही थी... उसने जब दीपू के हाथ को अपने हाथ में लिया तो वह रोमांटिक होने लगा, उसका विशेष अंग पेंट के साथ बगावत पर उतारू हो गया...शैली इस सबसे बेखबर होकर मस्त चाल चलती हुई एक होटल की तरफ़ जा रही थी... इस बीच उसने कोई बात नहीं की... होटल पहुचकर काउंटर पर उसने ख़ुद ही लिखा -पढ़ी की और फ़िर चाभी लेकर कमरे में घुस गयी ... दीपू उसके साथ था... वह बिस्तर पर लगभग गिर सी पड़ी... दीपू बाथरूम चला गया... इसके बाद शैली भी फ्रेश होने चली गयी... जब वे दोनों आमने -सामने आए तो दीपू की आंखों में चमक आ गयी... जिस काम के लिए वह सोच रहा था, वही काम तो ख़ुद शैली करने जा रही थी...यहाँ तक की उसे अब अपने पास रुपये नहीं होने का बिल्कुल अफ़सोस नहीं था... अगर वह घर से अपनी जेब में रुपोये लेकर चलता तो बेवजह वे खर्च हो जाते... उसने सबसे पहले अपने दोनों हाथ शैली की तरफ़ उठा दिए ताकि वह उसकी गोद में आकर समा जाए , और फ़िर वही हुआ जो उसने सोचा था... शैली सचमुच उसकी बांहों में समा गयी, फ़िर जुल्फों को झटकते हुए बोली-
-अगर यहाँ अचानक रेड पड़ती है तो अपना वास्तविक नाम बताना , मैंने यहाँ पर तुम्हें अपना पति लिखवाया है, ये मेरा कार्ड रखलो , इसमे मेरा पता लिखा है, तुम्हें यही बताना है...
दीपू- रेड कौन डालेगा यहाँ ?
शैली - पुलिस , और कौन ? उसे तो हफ्ता चाहिए... इसलिए घड़ी- घड़ी नाटक करती रहती है... जो कोई अपना ग़लत पता बताता है, उस पर पुलिस झूठ बोलने और चार सौ बीसी करने का मुकदमा जरूर चलाती है...

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