दीपू की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा... वह खुशी में झूम रहा था... मन में लड्डू फूटने लगे... दिल में आया की तुंरत शैली से लिपट जाए और उसके बदन पर हावी होने लगे मगर फ़िर वह कुछ सोचकर अपने आपको रोक गया, आहिस्ता -आहिस्ता हाथ बढाकर शैली के सर को दबाने लगा... उसके मन में इस समय भी डर के भाव थे... रात गहराती जा रही थी, निंदिया भी आंखों में दस्तक देने लगी ... वह इस बात पर जल्दी से भरोसा नहीं कर पा रहा था की जो कुछ उस बीत रही है, वह सच है या ग़लत ? उसे अपनी किस्मत पर अभी भी भरोसा नहीं हो रहा था... शैली ने एक जोरदार अंगडाई ली और सिगरेट जलाते हुए पूछा -
-क्या तुम भी सिगरेट का शौक रखते हो ? मैं तो अपनी इस गंदी आदत से बहुत परेशान हूँ, सचमुच तंग आ गयी हूँ लेकिन क्या करुँ, एक बार लगने पर यह आसानी से नहीं हटती ... मैं जानती हूँ की यह धुआं मेरे शरीर को ही नुक्सान पहुचा रहा है , फ़िर भी इसे छोड़ नहीं पाती हूँ... अगर तुम्हें भी आदत हो तो स्वागत है, और नहीं पीते तो बहुत बढ़िया... फ़िर पीना भी ठीक नहीं...
दीपू- हाँ, मैं इसका आदी नहीं हूँ और इससे अछूता भी नहीं ... तुम कहोगी तो इनकार नहीं करूँगा...
शैली- मैं लड़की होकर भी तुम पर भरोसा कर रही हूँ लेकिन तुम ऐसा नहीं कर पा रहे हो, तुम मुझ पर भरोसा कर सकते हो मित्र... मैं विश्वशनीय हूँ... शायद तुम्हारे मन में मेरे बारे में कई सवाल उठ रहे होंगे, तुम सोचते होंगे की मैं कौन हूँ, कहाँ की हूँ, कहाँ रहती हूँ और क्या करती हूँ, इसी जिज्ञासा के कारण ही तुम खुल नहीं पा रहे हो... जब तक पूरी तरह घुलोगे-मिलोगे नहीं तब तक आनंद भी नहीं मिलेगा ... ना तो तुम्हें ही और ना मुझे ही... जबकि हो सकता है की आज के बाद हम लोगों की मुलाक़ात भी हो पाये की नहीं ... न जाने शहर की आबो-हवा कब कहाँ ले जाए ? किसी पल का पता चलता है क्या ? मैं हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूँ मगर प्लीज मुझे इस तरह
गैरों की तरह मत देखो, मुझे अपनेपन से देखो...
दीपू- मेरी झिझक दूर करने के लिए शुक्रिया... मैं एक छोटा सा स्ट्रगलर हूँ, तुम्हारी बराबरी का नहीं, फ़िर भी एक जिज्ञासा ये तो है की तुम्हारे बारे में कुछ जानकारी की जाए...
शैली- बहुत खूब ... मैं जानती थी, मेरा नाम तो जान ही चुके हो, शैली.... मगर ये मेरा सच्चा नाम नहीं है... उस नाम को जानने से तुम्हें कोई नफ़ा नुकसान भी नहीं है... मैं मालाड में रहती हूँ, ओशिविरा में भी मेरा एक फ्लेट है... और भी कई जगह मकान -दूकान हैं मगर मैं ज्यादातर होटलों में रहती हूँ... मेरा काम है डांस करना, बीयर बार में काम करती हूँ, अगर कोई बन्दा मेरे जिस्म का लुत्फ़ उठाना चाहे तो कोई एतराज नहीं, उसके लिए उसे अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है... वह भी अच्छी तरह से...
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