Tuesday, June 15, 2010

प्यार से प्यारा , भाग-३७

जब ये इश्क का रोग लगता है तो सब इसकी धारा में बहने लगते हैं। पहले मेरी भी ऐसी ही हालत होती थी, बिलकुल तुम्हारी तरह । मैं भी जिस खूबसूरत लड़की को देखती थी उस पर फिसल जाती थी।सोचने लगती थी कि काश / अभी और इसी वक्त मैं उसको अपनी बांहों में भींच लूं और उसके होठों को चूसने लागूं। असल बात ये है कि उस वक्त मैं बेहद सेक्सी थी। मेरे सर्कल में जिततनी भी थीं वे मुझे इसी नाम से जानती थीं। उस वक्त तो मुझे इसके सिवाय और कुछ भाता ही नहीं था। तुम यकीं नहीं मानोगी ऐसा कोई दिन नहीं जाता था जब मैं मजा न लेती हौऊ।
कम्मो- आह। काश / तुम मुझे उस समय मिलीं होतीं, तब मैं भी तुम्हें उतना ही मजा देती।
शिल्पा- तब नहीं तो अब सही, तुम क्यों टेंशन लेती हो ? मैं क्या थक गयी हूँ या बूढ़ी हो गयी हूँ। जब तक बोलोगी तुम्हारा साथ निभाऊंगी , ये न सोचना कि बस हो गया । आज भी सारी-सारी रात जगाने की कुव्वत रखती हूँ।
कम्मो- नहीं । आज के लिए तो बहुत हो गया, अब हमें कल की जोरदार तैयारियां करनी चाहिए
शिल्पा- उसकी तो फ़िक्र ही मत करो, धमाल मचा देंगे हम लोग ।तुम क्या समझती हो,क्या सिर्फ हम लोग ही रहने वाले हैं ? नहीं यार । शुभा होगी और भी कई लड़कियां ऐसी होंगी जो कि इस खेल की माहिर खिलाड़ी हैं। जो सेक्स करना भी जानती हैं और कैसे किया जाए इसकी भी बहुत जानकारी रखती हैं। वे तुम्हें ख़ास गुर सिखाएंगी। मजा आ जाएगा , तुम भी कहोगी कि वाह क्या मस्ती हासिल हूई है।
कम्मो- ठीक है , मगर फिलहाल मैं सोना चाहती हूँ, जिसमें रात मैं ठीक से सो नहीं पाती, उस सुबह मैं बीमार जैसी हो जाती हूँ। अगर कल जमकर मस्ती करनी है तो मुझे आज रात खूब जी भरके सोना होगा।
शिल्पा- कल पहले तुम्हें मेरे साथ ऑफिस चलना है । तुम्हारी नौकरी की बात पक्की होने के बाद हम आगे का प्लान करेंगे , क्योंकि पहले वो जरूरी है । मेरे ख्याल से बोस तुम्हें देखते ही खुश हो जाएगा , मेरे यहाँ वैसे भी कई पद खाली हैं। बाकी जानकारी तुम्हें पहले ही दे चुकी हूँ। फ्लर्ट टायप का व्यक्ति है। सुन्दर लड़की देखते ही लार टपकाने लगता है । उसे हासिल करने की कोशिश करने लगता है ।
कम्मो- वो सब तुम मेरे पे छोड़ दो। ऐसी घुमौंगी कि बच्चू सब भूल जाएगा। एक बार नौकरी तो पक्की हो जाए , फिर मैं भी तुम्हारी तरह उसको साफ़-साफ़ बता दूंगी कि मेरे को लड़कों में नहीं, लड़कियों में दिलचस्पी है।
शिल्पा- इतनी आसानी से मान जाए तो बेहतर है , वरना मेरे मामले में तो उसने बहुत नाटक किया था। रोने -धोने पर उतर आया था। कहता था-
- ऐसा मत कहो प्लीज, मेरा दिल टूट जाएगा । इस नाजुक दिल को तोड़कर तुम्हें क्या मिलेगा । तुम्हें फर्क भी क्या पड़ता है , जैसे लड़कियों के साथ रिश्ता बनाती हो वैसे ही मेरे साथ बनाती हो । ये बस पांच मिनिट की ही तो बात है। ५ मिनिट में मैं तुम्हें इतना सुख दूंगा कि सारी दुनिया भूल जाओगी।

मैं सिर्फ प्यार का भूखा हूँ , अगर तुमने मेरा यह प्रस्ताव ठुकरा दिया .तो याद रखिये कि मैं ज़िंदा नहीं रह पाउँगा , अब इनकार मत करना। अगर मना किया तो बहुत पछताओगी , मेरा दिल आ गया है तुम पर । यह मेरा सच्चा प्यार है।










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